सोनाबाल में तुमा हस्तशिल्प कार्यशाला: बच्चों ने सीखी पारंपरिक शिल्प कला की बारीकियां, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अनिल विश्वकर्मा ने दिया प्रशिक्षण

Tuma Handicraft Workshop Sonabal के तहत जनपद प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक शाला सोनाबाल में बच्चों को सोमवार को एक विशेष शिल्प प्रशिक्षण मिला। स्कूल प्रबंधन की इस पहल ने छात्रों को न केवल कला से जोड़ा, बल्कि उन्हें अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को नज़दीक से समझने का अवसर भी दिया।

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता ने सिखाईं बारीकियां

कार्यक्रम में कमलादेवी जूनियर राष्ट्रीय पुरस्कार 2016 से सम्मानित सिद्धहस्त तुमा हस्तशिल्पी अनिल विश्वकर्मा और सहयोगी हस्तशिल्पी नगीना विश्वकर्मा ने बच्चों को तुमा हस्तशिल्प बनाने की विभिन्न तकनीकें सिखाईं।
बच्चे पूरे उत्साह के साथ कार्यशाला में हिस्सा लेते दिखे और कई छात्रों ने पहली बार इस पारंपरिक कला को हाथों से सीखने का अनुभव साझा किया।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का सार्थक क्रियान्वयन

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में मौलिक परंपरागत ज्ञान एवं स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहन देने पर विशेष जोर दिया गया है।
इसी उद्देश्य के तहत Tuma Handicraft Workshop Sonabal जैसी गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं, जो बच्चों में कौशल विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक जागरूकता भी बढ़ाती हैं।

संकुल सोनाबाल का सामूहिक प्रयास

इस कार्यशाला को सफल बनाने में संकुल समन्वयक जगतराम शोरी, प्रधान अध्यापक पुरुषोत्तम दीक्षित, हितेंद्र कुमार श्रीवास, ईश्वरी कौमार्य, शिक्षक चंद्रवंशी, सहायक शिक्षक रोहित मरकाम तथा दुर्गेश सहित पूरी टीम ने अहम भूमिका निभाई।
सभी ने विद्यार्थियों को तुमा हस्तशिल्प की सुंदर दुनिया से परिचित कराने में उत्साहपूर्वक योगदान दिया।

विद्यार्थियों में बढ़ी स्वदेशी कला के प्रति रुचि

बच्चों ने कार्यशाला में प्राप्त अनुभव को बेहद उत्साहजनक बताया। कई छात्रों ने कहा कि यह कला सीखकर उन्हें गर्व महसूस हुआ, क्योंकि यह उनके अपने क्षेत्र की पारंपरिक धरोहर का हिस्सा है।
कार्यशाला के बाद बच्चों में स्वदेशी शिल्प और भारतीय कला–संस्कृति के प्रति रुचि स्पष्ट रूप से बढ़ती दिखी।