छत्तीसगढ़ में बड़ा नक्सल सरेंडर: 61 मामलों में वांछित सीसीएम रामदर उर्फ सोमा ने 11 साथियों संग हथियार डाले

Ramder Soma Maoist Surrender: राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है। CPI (Maoist) के सेंट्रल कमेटी मेंबर और 61 आपराधिक मामलों में वांछित रामदर उर्फ सोमा ने सोमवार सुबह राजनांदगांव पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। उनके साथ कुल 11 अन्य माओवादी भी हथियार डालकर मुख्यधारा में लौट आए

यह आत्मसमर्पण नक्सली संगठन पर बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि CCM Ramder Soma Maoist Surrender के साथ अब संगठन के सिर्फ तीन CCM और दो पोलित ब्यूरो सदस्य ही सक्रिय बचे हैं—वह भी छत्तीसगढ़ में नहीं


कौन हैं रामदर उर्फ सोमा?

Ramder Soma Maoist Surrender: 65 वर्षीय रामदर उर्फ सोमा का जन्म बीजापुर जिले के बेदरे थाने के अंतर्गत माज्जी मेन्द्रि में हुआ था। वे उन चुनिंदा माओवादी नेताओं में शुमार हैं जिन्होंने संगठन में सैन्य और राजनीतिक दोनों भूमिकाएँ निभाईं।

वे महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ (MMC) क्षेत्र के प्रभारी थे। वर्ष 2017 में सुरक्षा एजेंसियों को जानकारी मिली थी कि संगठन इस ज़ोन के जरिये बस्तर से बाहर नेटवर्क बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। यह क्षेत्र मध्य प्रदेश के बालाघाट, महाराष्ट्र के गोंदिया और छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव, कबीरधाम और मुंगेली के जंगलों तक फैला हुआ है।


आत्मसमर्पण के दौरान हथियारों का बड़ा जखीरा मिला

Ramder Soma Maoist Surrender: सुरक्षा बलों ने सरेंडर के बाद बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किए, जिनमें शामिल हैं—

  • 3 AK-47 राइफल
  • 3 INSAS राइफल
  • 1 SLR
  • 1 कार्बाइन
  • 2 .303 राइफल

यह ज़खीरा संगठन की कमज़ोर होती क्षमताओं का संकेत माना जा रहा है।


किन बड़े नक्सलियों के साथ नेटवर्क कमजोर हुआ?

Ramder Soma Maoist Surrender: रामदर के आत्मसमर्पण के बाद संगठन के तीन CCM अब भी सक्रिय हैं:

  • गणेश उइके – ओडिशा में सक्रिय
  • मल्लाराजी रेड्डी उर्फ संग्राम – पहले छत्तीसगढ़ में सक्रिय, वर्तमान में राज्य से बाहर
  • अनालदा उर्फ तूफ़ान – झारखंड में सक्रिय

पोलित ब्यूरो स्तर पर भी संगठन लगातार कमजोर हो रहा है।

  • तिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी और मुप्पल्ला लक्ष्मणराव गणपति पहले ही छत्तीसगढ़ से पलायन कर चुके हैं।
  • मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर फिलहाल झारखंड में सक्रिय हैं।

इस वर्ष नक्सल संगठन को लगे बड़े झटके

Ramder Soma Maoist Surrender: साल 2025 नक्सली संगठन के लिए सबसे नुकसानदेह साबित हो रहा है।

  • शीर्ष नेता बसवा राजू उर्फ नंबाला केशव राव की सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मौत
  • 9 सेंट्रल कमेटी मेंबर, जिसमें कुख्यात सैन्य कमांडर हिडमा भी शामिल, मारे गए
  • इनमें 4 की मौत छत्तीसगढ़, 2 की झारखंड और 2 की आंध्र प्रदेश में हुई
  • पोलित ब्यूरो सदस्य वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू और पुल्लुरी प्रसाद राव उर्फ चंद्रन्ना ने भी हाल ही में सरेंडर किया

इन घटनाओं ने CPI (Maoist) की राष्ट्रीय संरचना पर गहरा असर छोड़ा है।


सरेंडर का महत्व: सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता

CCM Ramder Soma Maoist Surrender को सुरक्षा तंत्र अब तक की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक मान रहा है। रामदर उन चुनिंदा नेताओं में थे जो ज़मीनी स्तर पर कैडर को मजबूत करने में सक्षम थे। उनके हथियार डालने से नक्सल संगठन की रणनीतिक कमान और कमजोर हो गई है।

स्थानीय पुलिस और केंद्रीय बलों का कहना है कि सरेंडर नीति और लगातार दबाव ने इस सफलता को संभव बनाया।


निष्कर्ष

राजनांदगांव में हुआ यह सरेंडर न सिर्फ एक उच्च-स्तरीय माओवादी ढांचे के पतन का संकेत है, बल्कि आगामी महीनों में नक्सल गतिविधियों में भारी कमी की उम्मीद भी जगाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से छत्तीसगढ़ में शांति प्रक्रिया और गहरी होगी।