Chhattisgarh Naxalist Surrender: छत्तीसगढ़ के बकरकट्टा क्षेत्र में आज सुबह सुरक्षा बलों ने एक ऐतिहासिक पल दर्ज किया। लंबे समय से फरार और कुख्यात नक्सली नेता रामधेर मज्जी, जो नक्सल संगठन में सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) के रूप में सबसे ऊपरी रैंक पर था, ने अपने पूरे ग्रुप के साथ पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
Chhattisgarh Naxalist Surrender अभियान के तहत इसे सुरक्षा एजेंसियों की सबसे बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
1 करोड़ का इनामी नक्सली, हिडमा के बराबर प्रभाव
Chhattisgarh Naxalist Surrender: रामधेर मज्जी को संगठन में हिडमा के समकक्ष माना जाता था। उसकी रणनीति और नेटवर्क ने वर्षों तक सुरक्षा बलों के लिए चुनौती खड़ी की।
उस पर 1 करोड़ रुपए का इनाम घोषित था, जो उसके कद और उसके खतरे को स्पष्ट दर्शाता है।
MMC ज़ोन पर नक्सल प्रभाव लगभग खत्म
रामधेर मज्जी के साथ कुल 12 नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद एजेंसियों ने दावा किया है कि MMC ज़ोन (महाराष्ट्र–मध्य प्रदेश–छत्तीसगढ़) अब लगभग नक्सल-मुक्त हो चुका है।
यह वही इलाका है, जहाँ कभी नक्सली गतिविधियाँ चरम पर थीं और सुरक्षा बलों को लगातार अभियान चलाने पड़ते थे।
आज हुआ आत्मसमर्पण इस पूरे ज़ोन में स्थायी शांति की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
कौन-कौन हुए आत्मसमर्पण (हथियारों सहित)?
रामधेर मज्जी – CCM – AK-47
चंदू उसेंडी – DVCM – 30 कार्बाइन
ललिता – DVCM – बिना हथियार
जंकी – DVCM – इंसास
प्रेम – DVCM – AK-47
रामसिंह दादा – ACM – 303 राइफल
सुकेश पोट्टम – ACM – AK-47
लक्ष्मी – PM – इंसास
शीला – PM – इंसास
सागर – PM – SLR
कविता – PM – 303 राइफल
योगिता – PM – बिना हथियार
इन सभी के सरेंडर ने पूरे क्षेत्र में एक सकारात्मक माहौल पैदा किया है।
रामधेर मज्जी कौन है? नक्सलियों का बेहद शक्तिशाली कमांडर
रामधेर मज्जी नक्सली संगठन की रीढ़ माना जाता था।
CCM—यानि सेंट्रल कमेटी मेंबर—का पद संगठन के सर्वोच्च नेतृत्व में आता है।
इस पद पर वही लोग होते हैं जिन पर संगठन पूर्ण विश्वास करता है।
- वह वर्षों तक बस्तर के जंगलों में सक्रिय रहा।
- कई बड़े हमलों और फैसलों में उसकी भूमिका बताई जाती रही।
- वह महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के नक्सली इलाकों में प्रभावशाली माना जाता था।
सुरक्षा एजेंसियाँ लंबे समय से उसकी तलाश में थीं। उसका सरेंडर नक्सली ढांचे के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
सरेंडर क्यों हुआ? क्या बदला?
अधिकारियों के अनुसार—
- लगातार बढ़ता पुलिस दबाव,
- राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति,
- और संगठन के भीतर बढ़ती अव्यवस्था
इन तीन कारणों ने मज्जी और उसके साथियों को सरेंडर के लिए मजबूर किया।
युवाओं पर नक्सल प्रभाव और कमजोर पड़ेगा
विशेषज्ञों का मानना है कि मज्जी जैसे वरिष्ठ नेता के आत्मसमर्पण से संगठन की भर्ती प्रक्रिया पर गहरा असर पड़ेगा। इससे जंगलों में सक्रिय युवाओं के मन में भी वापसी की उम्मीद जगेगी।
अंत में… सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता
Chhattisgarh Naxalist Surrender अभियान के तहत आज की कार्रवाई छत्तीसगढ़ में बीते कई वर्षों में दर्ज की गई सबसे बड़ी सफलता में से एक मानी जा रही है।
MMC ज़ोन में शांति की नई शुरुआत अब और मजबूत दिख रही है।
