सुरगुजा में कोयला खदान विस्तार को लेकर हिंसक विरोध: 30 से अधिक पुलिसकर्मी घायल, ग्रामीणों की जमीन बचाने की जिद

छत्तीसगढ़ के सुरगुजा जिले में Surguja coal mine protest उस समय हिंसक हो गया जब पारसोडी कला गांव के ग्रामीणों ने Amera कोयला परियोजना के विस्तार का विरोध करते हुए पुलिस पर पथराव कर दिया। इस दौरान 30 से अधिक पुलिस जवान घायल हो गए। कुछ ग्रामीणों को भी चोटें आईं।

ग्रामीणों का कहना है कि उनकी पुश्तैनी जमीन पर खदान का विस्तार उन्हें उजाड़ देगा। वहीं प्रशासन का दावा है कि भूमि अधिग्रहण 2016 में ही पूरा हो चुका है और कानूनी प्रक्रिया के तहत SECL को काम की अनुमति है।


ग्रामीणों की पीड़ा: “हमारी जमीन जाएगी तो हम जियेंगे कैसे?”

पारसोडी कला की एक महिला प्रदर्शनकारी, लीलावती, आंखों में आंसू लिए कहती हैं—
“हम अपनी जमीन से प्यार करते हैं। SECL को कोयला मिल जाएगा, पर हमारा भविष्य क्या होगा? हमारे बच्चे भीख मांगने को मजबूर हो जाएंगे। सिर्फ हमारे ही खेत क्यों?”

उनकी इस बात ने पूरे आंदोलन में भावनात्मक स्वर जोड़ दिया। कई ग्रामीणों ने कहा कि जमीन सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि जीवन और पहचान है।


प्रशासन की दलील: 2001 में अधिग्रहण, 2011 से उत्पादन

अतिरिक्त जिला कलेक्टर सुनील नायक ने बताया कि Amera Opencast Mine का भूमि अधिग्रहण 2001 में शुरू हुआ, और खदान ने 2011 में उत्पादन शुरू किया
2019 में ग्रामीणों के कड़े विरोध के कारण काम रोका गया, लेकिन 2024 में प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद संचालन फिर शुरू हुआ।

SECL के अनुसार, अब तक पारसोडी कला के प्रभावित परिवारों को करीब ₹10 करोड़ का मुआवजा दिया जा चुका है और रोजगार भी प्रदान किया जा रहा है

लेकिन जैसे ही खदान का विस्तार ग्रामीणों की ओर बढ़ा, विरोध तेज हो गया।


हिंसा कैसे भड़की?

जिला अधिकारियों और पुलिस टीम ने बुधवार सुबह 10 बजे ग्रामीणों से बातचीत की कोशिश की।
लेकिन SECL और प्रशासन के मुताबिक, कुछ “अवैध गतिविधियों में शामिल लोग” भीड़ को उकसा रहे थे।

संवाद असफल हुआ और देखते ही देखते भीड़ ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया।
पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का उपयोग करते हुए स्थिति को नियंत्रित किया।

IG दीपक झा ने बताया—
“Surguja coal mine protest में 30 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए। हालात अब नियंत्रण में हैं और खनन गतिविधियां फिर शुरू हो गई हैं।”


CBA ने कार्रवाई को ‘दमन’ बताया

“छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन” के संयोजक अलोक शुक्ला ने कहा कि यह कार्रवाई
पांचवीं अनुसूची, PESA कानून और Forest Rights Act का उल्लंघन है।

CBA ने कहा—
“सरकार तत्काल Amera खदान विस्तार को रोके। ग्रामीणों पर पुलिसिया दमन अस्वीकार्य है।”


आगे क्या? ग्रामीणों का संघर्ष जारी

हालात भले ही नियंत्रण में हों, लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है।
वे बार-बार दोहराते हैं कि उन्हें सिर्फ मुआवजा नहीं, सम्मानजनक आजीविका और भविष्य की सुरक्षा चाहिए।

Amara खदान का विस्तार शांतिपूर्ण समाधान पर निर्भर है—और यह तभी संभव है जब ग्रामीणों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए।