छत्तीसगढ़ के CSVTU खिलाड़ियों का हक छीना जा रहा? कंसल्टेंट पर भत्ता हड़पने का आरोप, कुलपति से कार्रवाई की मांग

CSVTU sports allowance scam: छत्तीसगढ़ के तकनीकी शिक्षा जगत से एक गंभीर मामला सामने आया है। भिलाई स्थित छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU) में आयोजित विभिन्न खेल स्पर्धाओं के लिए मिलने वाले यात्रा भत्ता और दैनिक भत्ता को हड़पे जाने का आरोप विश्वविद्यालय से जुड़े कंसल्टेंट किशोर भारद्वाज पर लगा है। खिलाड़ियों का कहना है कि उनका हक छीना जा रहा है और प्रशासन मामले में चुप्पी साधे बैठा है।


खिलाड़ियों का आरोप—“भत्ता हमें नहीं, भारद्वाज को मिलता है”

CSVTU sports allowance scam: इंजीनियरिंग कॉलेज और पॉलिटेक्निक संस्थानों के छात्र-छात्राएं जब भी किसी खेल स्पर्धा में हिस्सा लेते हैं, तो उन्हें यात्रा और दैनिक भत्ता मिलना चाहिए।
लेकिन खिलाड़ियों का दावा है कि यह भत्ता किशोर भारद्वाज द्वारा दबा लिया जाता है, जबकि वह खुद को हर समाचार पत्र में ‘खेल निदेशक’ के नाम से छपवाता है।

खिलाड़ियों के अनुसार,

“हम दिनभर मैदान में पसीना बहाते हैं, लेकिन जब भत्ते की बारी आती है, तो हमें सिर्फ आश्वासन मिलता है। असली रकम भारद्वाज तक ही पहुंचती है।”


2019 से बिना आए ले रहा है पूर्ण वेतन?

CSVTU sports allowance scam: सूत्र बताते हैं कि किशोर भारद्वाज वर्ष 2019 से दैनिक वेतन पर होने के बावजूद पूरे महीने का वेतन लेता आ रहा है, जबकि नियम के अनुसार दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी को अवकाश के दिनों की तनख्वाह नहीं दी जाती।

खिलाड़ियों के संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि

  • पूर्व कुलपति डॉ. एम. के. वर्मा ने व्यक्तिगत लाभ के लिए उसकी नियुक्ति की थी।
  • भारद्वाज ने अपने परिवार के सदस्यों को भी विश्वविद्यालय में दैनिक वेतन पर लगवाया।
  • कई कर्मचारियों ने माना कि उनसे नियुक्ति के बदले मोटी रकम ली गई

इतना ही नहीं, उसे पांच साल तक विश्वविद्यालय की गाड़ी और ड्राइवर भी उपलब्ध कराया गया था।


खिलाड़ियों की आवाज़ अब कुलपति तक पहुंची

CSVTU sports allowance scam: अपनी बात अब दबकर नहीं रखने वाले खिलाड़ी सीधे कुलपति से मिले और किशोर भारद्वाज के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
लेकिन खिलाड़ियों के बीच यह अफवाह भी फैल रही है कि विश्वविद्यालय प्रशासन कार्रवाई करने से डर रहा है, क्योंकि भारद्वाज खुद को उच्च स्तर के नेताओं से जुड़ा बताता है।

छात्रों का कहना है कि अब यह सिर्फ भत्ते की लड़ाई नहीं, बल्कि न्याय और पारदर्शिता की लड़ाई है।


समाप्ति: खिलाड़ियों ने कहा—अब कार्रवाई जरूरी

CSVTU का खेल मोर्चा वर्षों से प्रतिभाओं को जन्म देता आया है। लेकिन खिलाड़ियों का हक मारने की इस कथित व्यवस्था ने खेल भावना को चोट पहुंचाई है। खिलाड़ी केवल यही चाहते हैं कि—

  • उनकी मेहनत की कद्र हो,
  • उनका भत्ता सही हाथों तक पहुंचे,
  • और विश्वविद्यालय खेल विभाग में पारदर्शिता लायी जाए।

अब गेंद प्रशासन के पाले में है—देखना यह है कि कार्रवाई होती है या नहीं।

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