मुंबई। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने देश के दूसरे सबसे बड़े बैंक HDFC Bank पर 91 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई उन गंभीर कमियों को लेकर की गई है, जो बैंक की नियामकीय अनुपालन, KYC मानकों, और बैंकों द्वारा सेवाओं के आउटसोर्सिंग से जुड़े दिशानिर्देशों में पाई गईं।
RBI ने स्पष्ट किया है कि यह जुर्माना Banking Regulation Act के कुछ प्रावधानों के उल्लंघन और कई दिशा-निर्देशों के अनुपालन न होने पर लगाया गया है।
🔍 RBI की जांच में क्या पाया गया?
RBI के अनुसार, बैंक की वित्तीय स्थिति की 31 मार्च 2024 तक की समीक्षा के दौरान कई खामियाँ सामने आईं:
- बैंक ने एक ही प्रकार के ऋण के लिए एकाधिक ब्याज बेंचमार्क अपनाए।
- कुछ ग्राहकों के KYC सत्यापन का काम बैंक ने अपने आउटसोर्सिंग एजेंट्स को सौंप दिया, जो नियमों के खिलाफ है।
- बैंक की एक पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी ने ऐसा व्यवसाय किया, जिसकी अनुमति BR Act की धारा 6 में नहीं है।
RBI ने बताया कि HDFC Bank की ओर से भेजा गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, जिसके बाद यह दंडात्मक कार्रवाई की गई।

📌 KYC में लापरवाही और पुरानी IT समस्याएँ भी बनीं कारण
2020 में भी HDFC Bank को अपने कमजोर IT सुरक्षा सिस्टम की वजह से बड़ा झटका लगा था।
- RBI ने बैंक पर नए क्रेडिट कार्ड जारी करने पर रोक लगा दी थी।
- यह प्रतिबंध एक साल से अधिक समय तक चला और बैंक को सिस्टम सुधारने पड़े।
25 मिलियन से अधिक सक्रिय क्रेडिट कार्डों के साथ, HDFC Bank देश का सबसे बड़ा क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता है।
📄 RBI का महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण
केंद्रीय बैंक ने कहा कि जुर्माना केवल अनुपालन में कमी के आधार पर लगाया गया है।
इसका मतलब है कि:
✔ किसी ग्राहक के साथ किए गए लेनदेन की वैधता पर यह कार्रवाई प्रभाव नहीं डालती।
✔ बैंकिंग सेवाओं या ग्राहक समझौतों पर कोई प्रत्यक्ष असर नहीं होगा।
🏦 बैंकिंग सेक्टर के लिए सख्त संदेश
RBI ने हाल के वर्षों में निजी बैंकों पर निगरानी और कठोर कर दी है।
HDFC Bank पर लगा यह जुर्माना संकेत देता है कि:
- KYC नियमों में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
- आउटसोर्सिंग के नाम पर बैंकों की जिम्मेदारी कम नहीं होती।
- नियामकीय ढांचे का पालन न करने पर बड़ी कार्रवाई निश्चित है।
यह कदम बैंकिंग सेक्टर के लिए एक मजबूत और स्पष्ट संदेश माना जा रहा है।
