छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस: मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा—छत्तीसगढ़ी को जल्द भेजेंगे आठवीं अनुसूची में शामिल करने का प्रस्ताव

छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस अवसर पर राजधानी रायपुर में संस्कृति विभाग के ऑडिटोरियम में आयोजित भव्य कार्यक्रम में Chhattisgarh Rajbhasha Diwas Event संस्कृति और पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में राजनीतिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक जगत की प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति ने समारोह को विशेष बना दिया। सबसे अनोखी बात यह रही कि मंच पर मौजूद सभी अतिथियों ने अपना उद्बोधन छत्तीसगढ़ी भाषा में दिया, जिससे पूरा माहौल अपनी मातृभाषा के गर्व से भर उठा।


आठवीं अनुसूची में छत्तीसगढ़ी को शामिल करने की तैयारी

अपने छत्तीसगढ़ी में दिए उद्बोधन में मंत्री राजेश अग्रवाल ने साफ कहा कि—

  • “पहले भी छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के प्रयास हुए हैं, लेकिन अब हम पूरी तैयारी के साथ प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजेंगे और इसे जल्द पूरा करेंगे।”

उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा की विविधता और उसकी सांस्कृतिक गहराई पर जोर देते हुए प्रसिद्ध कहावत “कोस-कोस पर पानी बदले, चार कोस पर बानी” का उल्लेख किया।
मंत्री अग्रवाल ने भाषा समृद्धि के लिए सभी बोलियों को साथ लाने का संकल्प भी दोहराया।


छत्तीसगढ़ी साहित्यकारों का सम्मान और मंत्री का प्रदर्शनी अवलोकन

कार्यक्रम में छह प्रमुख साहित्यकारों को छत्तीसगढ़ी भाषा एवं साहित्य में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इनमें—

  • पद्मश्री धर्मपाल सैनी (जगदलपुर)
  • सरला शर्मा (दुर्ग)
  • एस.पी. जायसवाल (सरगुजा)
  • हेमलाल साहू निर्मोही (दुर्ग)
  • डॉ. प्रकाश पतंगीवार (रायपुर)
  • काशी साहू (बिलासपुर)
    शामिल हैं।

मंत्री अग्रवाल ने समारोह में लगाई गई छत्तीसगढ़ी किताबों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और सेल्फी प्वाइंट पर फोटो भी ली, जिसे उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा।


13 छत्तीसगढ़ी पुस्तकों का विमोचन

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी भाषा में लिखित 13 महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन हुआ। मुख्य पुस्तकों में शामिल हैं—

  • आठवीं अनुसूची में छत्तीसगढ़ी – डॉ. अभिलाषा बेहार (प्रधान संपादक), डॉ. सुधीर शर्मा (संपादक)
  • छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग प्रांतीय सम्मेलन 2024 की स्मारिका
  • श्री सदाराम सिन्हा ‘स्नेही’ की सूरूज खड़े मुहाटी म
  • स्व. नोहरलाल साहू ‘अधमरहा’ की हाना के तराना
  • श्री मकसूदन साहू की बरीवाला
  • श्री अरविंद मिश्र की छत्तीसगढ़ी शब्द सामरथ
  • डॉ. राघवेन्द्र दुबे की मोर छत्तीसगढ़ के माटी
  • डॉ. किशन टंडन की भुईयां के भगवान
  • श्री जमुना प्रसाद चौहान की मया के खोंदरा
  • डॉ. नरेंद्र वर्मा की मैं बेटा किसान के
  • डॉ. विवेक तिवारी की हमर पर्यावरण
  • स्व. भूषण लाल परगनिहा की श्री गऊ रामायन
  • श्री विकास कश्यप की एक दिया
  • श्री बलराम मिर्झा की मन चंगा तो कठौती में गंगा
  • श्रीमती आशा झा की मया भरे आंखी

इन पुस्तकों का विमोचन छत्तीसगढ़ी साहित्यिक विरासत को एक नई पहचान देता है।


कविता पाठ, गोष्ठी और प्रदर्शनी से सजा समारोह

छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस के इस समारोह में—

  • छत्तीसगढ़ी किताबों की प्रदर्शनी
  • प्रसिद्ध साहित्यकारों का कविता पाठ
  • आठवीं अनुसूची पर केंद्रित गोष्ठी
    का आयोजन हुआ।
    साहित्यकारों के भावपूर्ण कविता पाठ ने दर्शकों को भावविह्वल कर दिया और सभागार देर तक तालियों से गूंजता रहा।

यह आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक उत्सव रहा, बल्कि छत्तीसगढ़ी भाषा के संवर्धन और संरक्षण का एक मील का पत्थर भी सिद्ध हुआ।

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