सागर, मध्य प्रदेश। सागर जिले के जैसीनगर विकासखंड की सहायक संचालक लोक शिक्षण श्रृष्टि पटेल (Shrishti Patel) इन दिनों अपने अनोखे शैक्षणिक नवाचारों को लेकर सुर्खियों में हैं। सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और बच्चों में नेतृत्व क्षमता विकसित करने की दिशा में उनकी कोशिशें अब उल्लेखनीय परिणाम देने लगी हैं।
सरकारी स्कूलों में पहली बार पेपरलेस चुनाव
श्रृष्टि पटेल की पहल पर जिले में पहली बार बिना कागज यानी पेपरलेस तरीके से हेड बॉय और हेड गर्ल का चुनाव कराया गया। यह प्रयोग उन सरकारी स्कूलों के लिए नई शुरुआत साबित हुआ, जहां पहले ऐसी गतिविधियां लगभग नहीं के बराबर होती थीं।
बच्चों ने मोबाइल टैब और डिजिटल माध्यम से मतदान किया, जिससे उन्हें आधुनिक प्रक्रिया को समझने का अवसर मिला।
बच्चों में दिखा उत्साह और आत्मविश्वास
इस नवाचार का सबसे बड़ा असर बच्चों के व्यवहार और आत्मविश्वास में दिखाई दिया।
- छात्रों की उपस्थिति बढ़ी,
- स्कूलों में अनुशासन मजबूत हुआ,
- और बच्चों में नेतृत्व की भावना विकसित होने लगी।
अब बच्चे स्कूल को केवल पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि सपनों और जिम्मेदारी का मंच मानने लगे हैं। कई बच्चों ने पहली बार नेतृत्व का अनुभव किया और अपने साथियों के साथ संवाद करना सीखा।
सरकार और विभाग भी कर रहा सराहना
शिक्षा विभाग का मानना है कि जैसेनगर का यह मॉडल जिले के अन्य स्कूलों में भी लागू किया जा सकता है। इससे सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी भी वही अवसर पा सकेंगे, जो निजी स्कूलों में सहज उपलब्ध होते हैं।
‘नेतृत्व सिर्फ किताबों से नहीं आता’ – श्रृष्टि पटेल
अपनी पहल के बारे में बात करते हुए श्रृष्टि पटेल ने कहा—
“बच्चों को सिर्फ किताबें पढ़ाना पर्याप्त नहीं है। उन्हें नेतृत्व, आत्मविश्वास और जीवन उपयोगी कौशल भी सिखाने होंगे।”
उनकी सोच ने यह साबित किया है कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो सरकारी स्कूल भी उत्कृष्टता की मिसाल बन सकते हैं। उनके प्रयासों से न केवल बच्चों में बदलाव आया है, बल्कि स्कूलों की संपूर्ण माहौल में भी सकारात्मक परिवर्तन दर्ज किया गया है।
