किसानों की शिकायत पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की बड़ी कार्रवाई, सहसपुर लोहारा में पटवारी राजेश शर्मा निलंबित

छत्तीसगढ़ के किसानों की आवाज एक बार फिर सीधे सत्ता के उच्च स्तर तक पहुंची। सहसपुर लोहारा क्षेत्र में किसानों की शिकायत पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने रविवार देर शाम एक बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्राम कुरूवा के पटवारी राजेश शर्मा को तत्काल निलंबित कर दिया
यह फैसला उन किसानों के लिए राहतभरी खबर है, जो लंबे समय से अपने राजस्व कार्यों में देरी से परेशान थे।


🚜 किसानों से अचानक मुलाकात, फिर मौके पर कार्रवाई

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा सहसपुर लोहारा प्रवास पर थे। जैसे ही उन्होंने तहसील कार्यालय के बाहर किसानों की भीड़ देखी, उन्होंने बिना हिचकिचाए काफिला रुकवाया और सीधे किसानों के बीच जा पहुंचे।
किसानों ने बताया कि हल्का नंबर 15, ग्राम कुरूवा के पटवारी राजेश शर्मा जानबूझकर फाइलें लंबित रखते हैं और उनके काम में अनावश्यक देरी करते हैं।

किसानों की बात सुनते ही उपमुख्यमंत्री ने तत्काल मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए और मौके पर ही पटवारी को निलंबित करने का आदेश दे दिया। अधिकारियों ने वहीं पर निलंबन आदेश जारी कर दिया।


📜 किस नियम के तहत हुई कार्रवाई?

निलंबन आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि पटवारी राजेश शर्मा के खिलाफ कार्रवाई
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9(1) के तहत की गई है।

निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय सहसपुर लोहारा (निर्वाचन शाखा) निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।


🗣️ “किसानों को किसी भी स्तर पर परेशानी नहीं होनी चाहिए” — उपमुख्यमंत्री

किसानों से बातचीत के दौरान उपमुख्यमंत्री ने धान खरीदी, राजस्व कार्यों और जमीन संबंधी प्रक्रियाओं की स्थिति की जानकारी भी ली।
उन्होंने सख्त चेतावनी देते हुए कहा—

“किसानों के काम में देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषी कर्मचारी के खिलाफ तुरंत कार्रवाई होगी।”

इसके साथ ही उन्होंने उपस्थित सभी पटवारियों, तहसीलदार और एसडीएम को निर्देश दिए कि किसानों के कार्य समय पर और पूरी पारदर्शिता के साथ होने चाहिए।


📍 पूरे क्षेत्र की होगी नियमित मॉनिटरिंग

उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा कि

  • किसानों की शिकायतों का तत्काल समाधान किया जाए,
  • फाइलें लंबित न रहें,
  • और पूरे क्षेत्र की नियमित मॉनिटरिंग की जाए।

यह कदम प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही बढ़ाने और किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता देने की दिशा में बड़ा संदेश देता है।