छत्तीसगढ़–तेलंगाना बॉर्डर पर कर्रगुट्टा पहाड़ियों में सुरक्षाबलों का नया कैंप, नक्सलियों की आवाजाही पर लगेगी कड़ी लगाम

Security forces new camp Karregutta Hills: कर्रगुट्टा की घनी पहाड़ियों में हवा पहले जितनी खामोश नहीं है। कभी वरिष्ठ नक्सली नेताओं का गुप्त ठिकाना मानी जाने वाली यह जगह अब देश की सुरक्षा रणनीति के एक नए अध्याय को लिख रही है। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के ताड़पला गांव के पास 4 नवंबर को सुरक्षाबलों ने ‘सुरक्षा एवं जन सुविधा कैंप’ स्थापित कर दिया है, जो आने वाले समय में इस पूरे इंटर-स्टेट बॉर्डर क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने वाला है।

मुहिम की पृष्ठभूमि: छह महीने पहले की ऐतिहासिक कार्रवाई

साल 2025 की शुरुआत में केंद्रीय और राज्य बलों ने कर्रगुट्टा के जंगलों में 21 दिनों का बड़ा ऑपरेशन चलाया, जिसमें

  • 31 नक्सली मारे गए,
  • 35 हथियार मिले,
  • 450 IED और भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री जब्त हुई,
  • और 12,000 किलोग्राम से ज्यादा रसद, बिजली सामग्री, दवाइयां और नक्सली साहित्य बरामद किया गया।

यह ऑपरेशन इस क्षेत्र में नक्सलियों के सबसे बड़े नेटवर्क पर सीधी चोट था।

नया कैंप: सुरक्षा और विकास, दोनों का आधार

नया कैंप CRPF की 196वीं बटालियन और CoBRA की 205वीं बटालियन का फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस बनेगा। यहाँ से न सिर्फ नक्सलियों की आवाजाही पर नियंत्रण होगा, बल्कि इलाके में विकास कार्यों को भी तेज़ी मिलेगी।

कैंप से मिलने वाले फायदे

  • सीमावर्ती इलाके में नक्सल विरोधी अभियानों को नई ताकत
  • सड़क, बिजली, पेयजल और मोबाइल नेटवर्क जैसी सुविधाओं का विस्तार
  • स्वास्थ्य सुविधाएं, स्कूल, आंगनबाड़ी और PDS केंद्रों को मजबूती
  • आसपास के गांवों तक प्रशासन की आसान पहुँच

स्थानीय लोग बताते हैं कि उन्हें पहली बार महसूस हो रहा है कि सरकार सच में उनके दरवाजे तक पहुंच रही है।

कठिन रास्ता, लेकिन मजबूत इरादा

3 नवंबर को DRG, STF, CRPF और CoBRA की टीमों ने ताड़पला पहुँचकर कैंप के लिए स्थान चुना।
इस दौरान उन्हें—

  • खड़ी और दुर्गम पहाड़ियों,
  • सड़क संपर्क की कमी,
  • IED हमलों का खतरा,
  • और पीने के पानी की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

हेलिकॉप्टर सपोर्ट और वरिष्ठ अधिकारियों के लगातार निरीक्षण से कैंप तेजी से तैयार हो सका।

जंगल वॉरफेयर ट्रेनिंग सेंटर बनेगा कर्रगुट्टा

सुरक्षाबलों की योजना के अनुसार, यह स्थान आगे चलकर—

  • जंगल युद्धक प्रशिक्षण,
  • फील्ड क्राफ्ट,
  • टैक्टिकल मूवमेंट्स
    जैसी उन्नत ट्रेनिंग के लिए विशेष केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

लगातार सफलता: 14 IED बरामद

कैंप स्थापित होने के बाद से ही सुरक्षाबल क्षेत्र में सक्रिय हो गए हैं और 14 IED को सुरक्षित रूप से निष्क्रिय किया गया है, जिससे सुरक्षा में बड़ी बढ़ोतरी हुई है।

बीजापुर में बदलता परिदृश्य

2024 से अब तक बीजापुर में—

  • 22 सुरक्षा कैंप स्थापित,
  • 202 नक्सली मुठभेड़ों में मार गिराए गए,
  • 749 आत्मसमर्पण, और
  • 1,006 गिरफ्तारियाँ हुई हैं।

इसके साथ ही ‘नियाड़ नेल्ला नार’ योजना के तहत सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और मोबाइल नेटवर्क जैसी सुविधाओं में तेजी से सुधार हुआ है।