रायपुर, 18 नवंबर 2025।
असम प्रवास के दौरान राज्यपाल श्री रमेन डेका ने गुवाहाटी के नारेंगी-बिर्कुची बिहोगी नगर में असमिया साहित्य के विख्यात बिहोगी कवि रघुनाथ चौधरी की कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया। यह प्रतिमा न केवल असम की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है, बल्कि प्रकृति से जुड़े साहित्यिक भावों का भी सम्मान है।
इस प्रतिमा को इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के मूर्ति कला विभाग ने तैयार किया है। निर्माण कार्य का नेतृत्व सहायक प्राध्यापक डॉ. छगेन्द्र उसेंडी ने किया, जिनकी टीम ने महीनों की मेहनत से इसे आकार दिया।
रघुनाथ चौधरी—पक्षियों और प्रकृति के अनोखे कवि
कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा कि रघुनाथ चौधरी का साहित्य असम की आत्मा की तरह है।
- उन्हें “बिहोगी कोबी” (पक्षियों के कवि) के रूप में जाना जाता है।
- उनकी रचनाओं में पक्षियों की किलकारी, प्रकृति की महक और लोकसंस्कृति की गहराई स्पष्ट झलकती है।
- वे असमिया साहित्य के जोनाकी युग के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं।
उनके साहित्यिक योगदान ने उन्हें असम ही नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य में एक विशिष्ट स्थान दिलाया।
कांस्य प्रतिमा—संस्कृति, संवेदना और सम्मान का संगम
अनावरण के समय उपस्थित लोगों ने इस प्रतिमा को कलाकारों की समर्पित साधना का अनूठा उदाहरण बताया।
- प्रतिमा में रघुनाथ चौधरी के शांत और प्रकृति-निष्ठ व्यक्तित्व को बारीकी से उकेरा गया है।
- स्थानीय लोगों ने बताया कि यह प्रतिमा नई पीढ़ी को अपने साहित्यिक और सांस्कृतिक इतिहास से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस अवसर का माहौल श्रद्धा, सम्मान और कला के प्रति उत्साह से भरा हुआ रहा।
कार्यक्रम में राज्यपाल का संदेश
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा:
“रघुनाथ चौधरी जैसे साहित्यकार असम की सांस्कृतिक धरोहर हैं। उनकी प्रकृति-आधारित रचनाएँ हमें मनुष्य और प्रकृति के अनूठे संबंध का महत्व समझाती हैं।”
उन्होंने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की टीम की कलात्मक दक्षता की सराहना की और कहा कि ऐसी प्रतिमाएँ समाज को अपनी जड़ों से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इस प्रतिमा का अनावरण न केवल साहित्यकार रघुनाथ चौधरी के प्रति सम्मान है, बल्कि यह असम की सांस्कृतिक परंपरा और कलात्मक गौरव का भी प्रतीक है। यह क्षण आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति-प्रेम, साहित्य और कला के प्रति जागरूक करने का प्रेरणास्रोत बनेगा।
