रायपुर, 2 नवम्बर 2025।
छत्तीसगढ़ की धरती पर आज इतिहास रचा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नया रायपुर में देश के पहले डिजिटल आदिवासी संग्रहालय — शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक एवं आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय — का भव्य उद्घाटन किया। यह अनोखा संग्रहालय उन आदिवासी वीरों के अदम्य साहस और बलिदान को समर्पित है जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज़ उठाई और देश की आज़ादी के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया।
वीर नारायण सिंह को मिली ऐतिहासिक श्रद्धांजलि:
संग्रहालय को विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के पहले शहीद वीर नारायण सिंह की स्मृति में तैयार किया गया है, जिन्होंने सोनाखान के ज़मींदार होने के बावजूद अंग्रेज़ों के अन्याय और अत्याचार के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका था।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि “भगवान बिरसा मुंडा जैसे आदिवासी नायकों ने पूरे देश के आदिवासियों को प्रेरणा दी, वहीं वीर नारायण सिंह ने छत्तीसगढ़ की अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए।”
संग्रहालय की विशेषताएं:
यह संग्रहालय पूरी तरह डिजिटल तकनीक से सुसज्जित है। यहां आगंतुकों को 3D प्रोजेक्शन, इंटरएक्टिव स्क्रीन और ऑडियो-विजुअल अनुभव के माध्यम से आदिवासी इतिहास और वीरों की गाथाएं देखने को मिलेंगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि यह पहल राज्य के रजत जयंती वर्ष (25 वर्ष) पर छत्तीसगढ़ की संस्कृति और आदिवासी अस्मिता को सशक्त करने के उद्देश्य से की गई है।
जनभागीदारी और गर्व का प्रतीक:
उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के प्रतिनिधि, छात्र और संस्कृति प्रेमी शामिल हुए।
प्रधानमंत्री ने कहा, “यह संग्रहालय न केवल अतीत की याद है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का दीपक है।”
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह संग्रहालय छत्तीसगढ़ की आत्मा में बसने वाले वीर नारायण सिंह और अन्य आदिवासी सेनानियों के संघर्ष को स्थायी पहचान देगा।
मानवीय दृष्टिकोण:
संग्रहालय का उद्घाटन केवल एक सरकारी आयोजन नहीं था, बल्कि यह उन हजारों आदिवासी परिवारों के लिए सम्मान का क्षण था जिन्होंने आज़ादी की लड़ाई में अपनी पहचान मिटा दी पर आत्मा नहीं झुकाई। नया रायपुर में बना यह संग्रहालय आने वाले समय में राष्ट्रीय गर्व और जन-संवेदना का केंद्र बनेगा।
