नई दिल्ली, 9 सितंबर 2025। सुप्रीम कोर्ट को मंगलवार को सूचित किया गया कि छत्तीसगढ़ पुलिस ने योगगुरु बाबा रामदेव के खिलाफ दर्ज एफआईआर में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है। यह एफआईआर उनके कोविड-19 महामारी के दौरान एलोपैथिक दवाओं पर दिए गए विवादित बयान को लेकर दर्ज हुई थी।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ को बताया कि रामदेव के खिलाफ की गई शिकायतें “हित साधने वाले कुछ समूहों द्वारा प्रायोजित” प्रतीत होती हैं।
रामदेव की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ डेवे ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने कोर्ट के निर्देशानुसार अपना जवाब दाखिल कर दिया है, जबकि बिहार से अभी जवाब आना बाकी है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि शिकायतकर्ता विरोध याचिका दायर करता है तो कार्यवाही फिर से शुरू हो सकती है।
बेंच ने कहा कि अब केवल बिहार में दर्ज एकमात्र एफआईआर शेष है, ऐसे में रामदेव की कई एफआईआर को क्लब करने की याचिका निरर्थक हो गई है। जस्टिस सुंदरेश ने आश्वस्त किया कि जब तक अंतिम फैसला नहीं होता, बाबा रामदेव को किसी तरह की जबरन कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।
अदालत ने अब मामले की अगली सुनवाई दिसंबर के अंतिम सप्ताह में तय की है।
पृष्ठभूमि:
कोविड काल में बाबा रामदेव ने एलोपैथी पर विवादित टिप्पणी करते हुए दावा किया था कि एलोपैथिक दवाओं से लाखों लोगों की मौत हुई है। उनके इस बयान पर भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) की पटना और रायपुर शाखाओं ने शिकायत दर्ज कराई थी। उन्हें आईपीसी की धारा 188, 269 और 504 तथा आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
रामदेव के इस बयान ने देशभर में आयुर्वेद बनाम एलोपैथी की बहस को जन्म दिया था। हालांकि उन्होंने बाद में तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के पत्र के बाद 23 मई 2021 को बयान वापस ले लिया था।
