तेलंगाना में छत्तीसगढ़ के छह माओवादी कैडर ने किया आत्मसमर्पण, अब तक 300 ने छोड़ा हिंसा का रास्ता

तेलंगाना, 12 जुलाई 2025: तेलंगाना राज्य के भद्राद्री कोठागुडेम जिले में शनिवार को एक बार फिर माओवादी आत्मसमर्पण की संख्या में इज़ाफा हुआ, जब छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर क्षेत्र से आए छह माओवादी कैडर और मिलिशिया सदस्यों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। इस वर्ष जिले में अब तक कुल 300 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं।

भद्राद्री कोठागुडेम के पुलिस अधीक्षक बी. रोहित राजू के समक्ष आत्मसमर्पण करने वालों में प्रमुख रूप से पुनेम लालू उर्फ राकेश (35 वर्ष) शामिल हैं, जो कि सीपीआई (माओवादी) के पीएलजीए बटालियन की आर्टिलरी प्लाटून के कंपनी पार्टी कमेटी सदस्य (CYPCM) के रूप में सक्रिय थे। वे छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के निवासी हैं, जो माओवाद से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक है।

सरकार की पुनर्वास नीति बनी मुख्य वजह

पुलिस अधीक्षक बी. रोहित राजू ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को तेलंगाना सरकार द्वारा लागू की जा रही कल्याणकारी योजनाओं और पुनर्वास नीतियों से प्रोत्साहन मिला है। अब तक आत्मसमर्पित 300 माओवादियों को लगभग ₹58 लाख की अंतरिम सहायता प्रदान की जा चुकी है।

नवीनतम छह माओवादी सदस्यों को भी प्रत्येक को ₹25,000 की अंतरिम राहत राशि तुरंत दी जाएगी, जबकि शेष ₹10.75 लाख की राशि उनके आधार और बैंक खाता सत्यापन के बाद चेक के माध्यम से उनके खातों में जमा की जाएगी।

बढ़ता आत्मसमर्पण: एक सकारात्मक संकेत

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लगातार हो रहे आत्मसमर्पण यह दर्शाते हैं कि माओवादी हिंसा से जुड़ने वाले अब विकास और शांति की राह को अपनाना चाहते हैं। तेलंगाना सरकार का उद्देश्य है कि इन युवाओं को मुख्यधारा में लाकर उन्हें एक सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन प्रदान किया जाए।

सुरक्षा और विकास के समन्वय से मिल रही सफलता

पुलिस और प्रशासन की संयुक्त रणनीति के अंतर्गत माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ विकास परियोजनाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आत्मसमर्पण करने वालों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने का काम तेज़ी से किया जा रहा है।