दुर्ग/भिलाई | 22 जून 2025 — प्रगति नगर रिसाली निवासी नम्रता चंद्राकर से “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर की गई 54.90 लाख रुपये की हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी के मामले में पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। ठाणे (महाराष्ट्र) से दो और आरोपियों चंदन बालकरण सरोज और रूषिकेश जोशी को गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर दुर्ग लाकर जेल भेजा गया है।
👮♂️ डिजिटल अरेस्ट के नाम पर सीबीआई अधिकारी बनकर डराया
इस मामले की शुरुआत 29 अप्रैल 2025 को हुई, जब नम्रता चंद्राकर के पिता को कुछ अज्ञात लोगों ने वीडियो कॉल कर खुद को सीबीआई अधिकारी बताया।
उन्होंने डराने की नीयत से कहा कि —
“केनरा बैंक का खाता नरेश गोयल को बेचा गया है और वह 2 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल है।”
आरोपियों ने उन्हें गिरफ्तारी का भय दिखाकर 29 अप्रैल से 29 मई के बीच विभिन्न खातों में कुल 54 लाख 90 हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए।
🔍 पुलिस ने अब तक की जांच में ये खुलासे किए
- पहले लखनऊ से दीपक गुप्ता, राजेश विश्वकर्मा, कृष्ण कुमार और शुभम श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया गया था।
- जांच में खुलासा हुआ कि ठगी की रकम में से 4 लाख रुपये ICICI बैंक खाते (नं. 088401528050) में ट्रांसफर किए गए थे।
- यह खाता चंदन बालकरण सरोज के नाम पर था।
- पूछताछ में चंदन ने बताया कि रूषिकेश जोशी ने कमीशन के बदले यह खाता लिया और हर ट्रांजैक्शन पर ₹4,000 का भुगतान किया जाता था।
📱 मोबाइल, आधार कार्ड जब्त, गैंग पर शिकंजा कसता जा रहा
- पुलिस ने दोनों आरोपियों से मोबाइल फोन और आधार कार्ड जब्त कर लिए हैं।
- आरोपियों से पूछताछ में यह भी पता चला है कि यह ठगी एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर गैंग द्वारा की गई है।
- पुलिस अब तक इस रैकेट से जुड़े कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और अन्य की तलाश जारी है।
🎙️ पुलिस अधिकारी ने क्या कहा
भिलाई नगर सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी ने बताया:
“यह ठगी का एक जटिल और सुनियोजित मामला है, जिसमें तकनीक, डर और भ्रम का सहारा लेकर लोगों से मोटी रकम ऐंठी जा रही है। हम लगातार जांच कर रहे हैं और जो भी इसमें शामिल होगा, उसे सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा।”
⚖️ कानूनी कार्रवाई और धाराएं
इस मामले में नेवई पुलिस ने
- धारा 318(4)(5) बीएनएस
- और आईटी एक्ट की धारा 67(D)
के तहत मामला दर्ज किया है।
🚨 लोगों के लिए चेतावनी
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि
- किसी भी वीडियो कॉल या फोन कॉल पर डराने-धमकाने वाले बयान पर भरोसा न करें।
- सरकारी अधिकारी बनकर मांगी गई कोई भी निजी जानकारी या पैसे तत्काल रिपोर्ट करें।
- साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी थाने में संपर्क करें।
