दुर्ग (छत्तीसगढ़) आनंद राजपूत / रवि ठाकुर। कोरोना संक्रमण की मार के साथ अब नागरिकों को आर्थिक संकट का सामना भी करना पड़ रहा है। लॉकडाउन के 42 दिनों बाद जिले में व्यापारिक गतिविधियों को संचालित किए जाने की आंशिक रुप से अनुमति मिली है। इसके बावजूद छोटे दुकानदारों को इससे राहत नही मिल रही है। जिससे इस वर्ग में भारी पैमाने पर आक्रोश दिखाई देने लगा है। लॉकडाउन से प्रभावित इन दुकानदारों ने भी उन्हें दुकान संचालित किए जाने की आंशिक अनुमति प्रदान किए जाने की मांग कलेक्टर से की है। देखें विडियो…
बता दें कि कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रभाव के कारण छत्तीसगढ़ में सबसे पहले दुर्ग जिले में 6 अप्रैल से लॉकडाउन लगा दिया गया था। 42 दिन के बाद प्रशासन द्वारा 17 मई से अनलॉक की प्रक्रिया प्रारंभ करते हुए अधिकांश व्यवसायिक गतिविधियों को सवेरे 11 बजे से 5 बजे तक संचालित किए जाने की अनुमति प्रदान की है। लेकिन चाय-नाश्ता की दुकानों, चलित फास्टफूड सेंटर, गुपचुप-चाट के ठेलों, सेलून, पाटन ठेलों आदि को संचालित किए जाने की अनुमति प्रदान नहीं की गई है। बता दें कि यह ऐसा तबका है जिनकी जीविका रोज कमाओं पर आधारित है। 45 दिनों बाद भी इन व्यवसायों को संचालित किए जाने की अनुमति नहीं दिए जाने से इन परिवारों के समक्ष भरण-पोषण की समस्या उत्पन्न हो गई है। इन वर्ग से जुड़े लोगों ने प्रशासन से उन्हें एक निर्धारित समय में व्यापार संचालित किए जाने की मांग की है।
