छत्तीसगढ़ में Chhattisgarh Rail Projects के तहत रेल अधोसंरचना के विस्तार पर तेजी से काम किया जा रहा है। राज्य में लगभग ₹51,080 करोड़ की रेल परियोजनाएं चल रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य माल ढुलाई की क्षमता बढ़ाना, औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क देना और आदिवासी तथा दूरस्थ अंचलों की कनेक्टिविटी मजबूत करना है। इसके साथ ही रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं को आधुनिक बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
राज्य सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए छत्तीसगढ़ को ₹7,470 करोड़ का रेल बजट आवंटित किया गया है। वर्ष 2009-14 के दौरान राज्य को औसतन ₹311 करोड़ सालाना मिलते थे। इस तुलना में वार्षिक औसत आवंटन करीब 24 गुना बढ़ा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से प्रदेश में नई रेल लाइन, दोहरीकरण, विद्युतीकरण और आधुनिक यात्री सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। इन परियोजनाओं से उद्योग, व्यापार, पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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Chhattisgarh Rail Projects से माल ढुलाई को मिलेगी गति
छत्तीसगढ़ के रेल विस्तार में खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा रेल कॉरिडोर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। करीब 278 किलोमीटर लंबे इस प्रस्तावित मार्ग को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अप्रैल 2025 में मंजूरी दी थी। शुरुआत में इसकी अनुमानित लागत ₹8,741 करोड़ थी, जिसे बाद में संशोधित कर ₹7,854 करोड़ किया गया।
इस कॉरिडोर का मुख्य उद्देश्य बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग के व्यस्त रेल खंडों पर दबाव कम करना और माल तथा यात्री ट्रेनों के लिए अतिरिक्त रेल मार्ग उपलब्ध कराना है। इससे कोलकाता-मुंबई रेल मार्ग पर परिचालन का दबाव घटाने में मदद मिल सकती है।
प्रस्तावित कॉरिडोर से बलौदाबाजार सहित औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क देने की योजना है। कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट और बिजली उत्पादन से जुड़े उद्योगों को इससे माल परिवहन की अतिरिक्त क्षमता मिल सकती है। रेल ढुलाई के बेहतर विकल्प से सड़क मार्ग पर निर्भरता और लॉजिस्टिक्स लागत कम करने की भी संभावना है।
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बस्तर में Chhattisgarh Rail Projects से कनेक्टिविटी को मजबूती
बस्तर क्षेत्र में रेल नेटवर्क का विस्तार उद्योगों के साथ स्थानीय आबादी के लिए भी महत्वपूर्ण है। रावघाट-जगदलपुर की लगभग 140 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण पूरा होने की जानकारी दी गई है। वहीं, किरंदुल-कोत्तागुडेम की 180 किलोमीटर और गढ़चिरौली-बीजापुर-किरंदुल (बचेली) की लगभग 490 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन परियोजनाओं का सर्वेक्षण जारी है।
दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना के तहत दल्लीराजहरा से अंतागढ़ तक 77 किलोमीटर के खंड पर रेल सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। इससे क्षेत्र के ग्रामीण यात्रियों को रेल नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला है। अगले चरण में रावघाट तक संपर्क विकसित करने का काम चल रहा है।
परियोजना पूरी होने पर रावघाट की लौह अयस्क खदानों को भिलाई इस्पात संयंत्र से जोड़ने में मदद मिलेगी। इससे खनिज परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, कोत्तावलसा-किरंदुल रेल लाइन के दोहरीकरण से बस्तर में माल और यात्री परिवहन की क्षमता बढ़ी है।
कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल लाइन की योजना
छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल लाइन की लंबाई करीब 295 किलोमीटर है। यह मार्ग कटघोरा से करतला, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ होते हुए डोंगरगढ़ तक प्रस्तावित है।
इस परियोजना को रेल मंत्रालय और छत्तीसगढ़ सरकार के संयुक्त उपक्रम के माध्यम से विकसित करने की योजना है। इसके लिए विशेष प्रयोजन इकाई यानी एसपीवी गठित करने का प्रस्ताव है।
रेल लाइन बनने पर उन इलाकों को रेल संपर्क मिलने की संभावना है, जहां अभी सुविधा उपलब्ध नहीं है या सीमित है। इससे यात्रियों की आवाजाही, कृषि उत्पादों के परिवहन, व्यापार और पर्यटन को प्रोत्साहन मिल सकता है। हालांकि, प्रस्तावित परियोजना की प्रगति और समयसीमा की पुष्टि आधिकारिक घोषणाओं से की जानी चाहिए।
उत्तर छत्तीसगढ़ के लिए भी नए रेल कॉरिडोर प्रस्तावित
उत्तर छत्तीसगढ़ और सीमावर्ती इलाकों के लिए सरडेगा-पत्थलगांव-अंबिकापुर (244 किलोमीटर), धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा (301 किलोमीटर) और अंबिकापुर-बरवाडीह (200 किलोमीटर) रेल कॉरिडोर प्रस्तावित हैं।
इन परियोजनाओं को रेल मंत्रालय से मंजूरी मिलने की संभावना जताई गई है। अगस्त 2026 में इन प्रस्तावों पर निर्णय और सर्वेक्षण प्रक्रिया तेज करने का मुद्दा उठाया गया था। मंजूरी और निर्माण की स्थिति संबंधित आधिकारिक अपडेट से स्पष्ट होगी।
इन रेल मार्गों से खनिज परिवहन, स्थानीय व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को बड़े शहरों और बाजारों तक पहुंचने में भी सुविधा मिल सकती है।

Chhattisgarh Rail Projects के तहत 32 स्टेशनों का आधुनिकीकरण
नई रेल लाइनों के साथ मौजूदा स्टेशनों को बेहतर बनाने पर भी काम जारी है। राज्य सरकार के मुताबिक, अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत छत्तीसगढ़ के 32 रेलवे स्टेशनों को लगभग ₹1,680 करोड़ की लागत से विकसित किया जा रहा है।
योजना में बेहतर प्रतीक्षालय, स्वच्छ परिसर, दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाएं और यात्रियों के लिए आधुनिक व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। चांपा, बालोद और सरोना रेलवे स्टेशनों का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्चुअल लोकार्पण भी किया गया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार जताया। राज्य सरकार का कहना है कि स्टेशन उन्नयन से यात्रियों की सुविधा के साथ स्थानीय व्यापार, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
रेल नेटवर्क से विकास को नई दिशा
Chhattisgarh Rail Projects राज्य की औद्योगिक क्षमता, माल परिवहन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा कॉरिडोर, बस्तर की रेल योजनाएं, प्रस्तावित नई लाइनें और स्टेशन आधुनिकीकरण आने वाले समय में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे सकते हैं। हालांकि, प्रस्तावित परियोजनाओं के लाभ उनकी मंजूरी, निर्माण की प्रगति और समय पर पूरा होने पर निर्भर करेंगे।
