Ankita Bhandari Case एक बार फिर चर्चा में है। नई दिल्ली के इंडिया गेट पर न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे अंकिता भंडारी के माता-पिता, विपक्षी नेताओं और अन्य प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। खबरों के अनुसार, यह कार्रवाई सुबह करीब 4 बजे हुई, जब प्रदर्शनकारी रातभर धरने पर बैठे थे।
प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर प्रस्तावित नियुक्ति को रोकने की मांग करना था। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अंकिता भंडारी मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच पूरी होने तक नियुक्ति पर आगे नहीं बढ़ना चाहिए।
यह मामला उत्तराखंड में वर्ष 2022 में हुए अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई और न्याय की मांग को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई।
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Ankita Bhandari Case में माता-पिता की क्या है मांग?
अंकिता भंडारी के माता-पिता इंडिया गेट पर धरना देकर मामले में कथित VIP एंगल की जांच और दुष्यंत कुमार गौतम की प्रस्तावित नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मामले की जांच पूरी होने तक नियुक्ति के विषय में निर्णय रोककर रखा जाए। हालांकि, नियुक्ति को लेकर उठाए जा रहे सवाल और जांच में किसी व्यक्ति की भूमिका से जुड़े आरोपों को स्थापित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी का निर्धारण जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही हो सकता है।
अंकिता के माता-पिता की मांग ने एक बार फिर इस सवाल को सामने ला दिया है कि मामले से जुड़े सभी संदेहों की निष्पक्ष जांच किस तरह सुनिश्चित की जाए।
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दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति पर क्यों उठे सवाल?
प्रदर्शनकारियों ने भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर प्रस्तावित नियुक्ति का विरोध किया। उनकी मांग थी कि CBI जांच पूरी होने तक इस नियुक्ति को रोक दिया जाए।
विरोध का संबंध मामले में उठाए जा रहे कथित VIP एंगल से है। हालांकि, उपलब्ध समाचार विवरण के आधार पर दुष्यंत कुमार गौतम की किसी आपराधिक भूमिका को स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग प्रदर्शनकारियों की मांग है, न कि अपने आप में कोई न्यायिक निष्कर्ष।
कांग्रेस नेताओं ने पुलिस कार्रवाई पर क्या कहा?
कांग्रेस नेताओं ने हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि अंकिता के लिए न्याय की मांग कर रहे लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं के लिए चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि सुबह चार बजे इंडिया गेट पर हुई कार्रवाई लोकतंत्र की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
ये बयान कांग्रेस नेताओं की राजनीतिक प्रतिक्रिया हैं। पुलिस कार्रवाई के सभी कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं का स्वतंत्र आकलन संबंधित तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने की मुलाकात
इससे पहले बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इंडिया गेट पर धरना दे रहे अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात की थी।
इस मुलाकात के बाद मामला राजनीतिक रूप से और अधिक चर्चा में आ गया। विपक्षी नेताओं ने परिवार की न्याय संबंधी मांगों का समर्थन किया और प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।
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Ankita Bhandari Case: हत्याकांड का पूरा घटनाक्रम
अंकिता भंडारी उत्तराखंड के एक रिजॉर्ट में काम करती थीं। उनकी हत्या सितंबर 2022 में हुई थी। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 18 सितंबर 2022 को उनकी हत्या हुई और 24 सितंबर 2022 को उनका शव चीला नहर से बरामद किया गया।
मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य, जो निष्कासित भाजपा नेता विनोद आर्य के बेटे हैं, तथा रिजॉर्ट के दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था। तीनों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया।
इस हत्याकांड ने उत्तराखंड में व्यापक आक्रोश पैदा किया था। बाद में अदालत में चली सुनवाई के दौरान आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ी।
अदालत ने दोषियों को कब सुनाई सजा?
30 मई 2025 को कोटद्वार में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीना नेगी की अदालत ने पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को हत्या, साक्ष्य नष्ट करने और अन्य संबंधित अपराधों के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
यह सजा हत्याकांड से जुड़े आपराधिक मुकदमे में एक महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव थी। हालांकि, वर्तमान प्रदर्शन में उठाया जा रहा कथित VIP एंगल और उससे संबंधित सवाल अलग से जांच तथा प्रमाणों के आधार पर देखे जाने चाहिए।
Ankita Bhandari Case में आगे क्या?
Ankita Bhandari Case में इंडिया गेट पर हुई हिरासत की कार्रवाई ने न्याय, विरोध के अधिकार और कथित VIP एंगल की जांच को लेकर बहस फिर तेज कर दी है। अंकिता के माता-पिता CBI जांच पूरी होने तक दुष्यंत कुमार गौतम की प्रस्तावित नियुक्ति रोकने की मांग कर रहे हैं। अब मामले में आगे की स्थिति जांच से संबंधित आधिकारिक जानकारी, नियुक्ति पर निर्णय और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई से स्पष्ट होगी। इस संवेदनशील मामले में आरोपों, राजनीतिक दावों और अदालत में स्थापित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना बेहद जरूरी है।
