Skip to main content

4thnation

West Bengal SIR के बाद चार मजदूर डिटेंशन सेंटर में

West Bengal SIR से जुड़ा एक मामला अब पश्चिम बंगाल से लेकर छत्तीसगढ़ तक चर्चा में है। मुर्शिदाबाद के चार प्रवासी मजदूर इस समय रायपुर स्थित अवैध प्रवासियों के होल्डिंग सेंटर में हैं। मतदाता सूची से उनके नाम हटाए जाने के बाद उनकी नागरिकता को लेकर सवाल उठे और उन्हें पुलिस हिरासत में लेकर रायपुर भेज दिया गया।

मामले ने प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पीड़ित परिवारों ने इस कार्रवाई के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। अदालत में सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई और अधिकार क्षेत्र को लेकर तीखी टिप्पणियां सामने आईं।

देश-दुनिया और अपराध जगत की ताजा खबरों के लिए 4thnation WhatsApp Channel से जुड़ें

बिलासपुर रोजगार के लिए पहुंचे थे मजदूर

जानकारी के अनुसार, मुर्शिदाबाद के समशेरगंज और शहाबाद इलाके के रहने वाले 23 मजदूर अगस्त के अंत में रोजगार की तलाश में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर पहुंचे थे। ये लोग घर-घर जाकर सामान बेचने का काम कर रहे थे।

इसके बाद 4 सितंबर को छत्तीसगढ़ पुलिस ने बिलासपुर के चुंचियापारा-गणेश नगर इलाके से सभी 23 लोगों को हिरासत में लिया। पुलिस ने उन पर संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिक होने का संदेह जताया था।

मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद 19 मजदूरों को राहत मिली। लेकिन चार लोगों की स्थिति अलग रही।

यह भी पढ़ें: CEC Gyanesh Kumar का छत्तीसगढ़ दौरा स्थगित

West Bengal SIR में 19 मजदूर रिहा, 4 हिरासत में

स्थानीय अदालत के निर्देश के बाद 18 सितंबर को 19 मजदूरों को रिहा कर दिया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अप्रैल की समीक्षा के बाद उनके नाम दोबारा मतदाता सूची में जुड़ चुके थे।

हालांकि, साबिर शेख, शफीकुल इस्लाम, नसीरुद्दीन शेख और लालटू शेख के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके थे। इसी आधार पर उनकी नागरिकता को लेकर पुलिस ने सवाल उठाए और उन्हें रायपुर के अवैध प्रवासियों के होल्डिंग सेंटर में भेज दिया।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची में नाम होना या हटना अपने आप में नागरिकता का अंतिम प्रमाण या निर्धारण नहीं है। नागरिकता से जुड़े विवाद की अपनी अलग कानूनी प्रक्रिया होती है।

दशकों पुराने दस्तावेजों के बावजूद नागरिकता पर सवाल

पीड़ित परिवारों का कहना है कि उनकी कई पीढ़ियां भारत में रह रही हैं और उनके पास लंबे समय से मौजूद दस्तावेज भी हैं। शफीकुल इस्लाम के 67 वर्षीय पिता रियाजुल शेख ने कथित तौर पर परिवार के दशकों पुराने भारत में रहने की बात कही है।

परिवार के अनुसार, उनके पास 1973 से वर्तमान मकान से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं। इसके बावजूद मतदाता सूची से नाम हटने के बाद चारों युवकों की नागरिकता पर सवाल उठाया गया।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निर्वाचन आयोग की ओर से इन नामों को हटाने के पीछे ‘तार्किक विसंगति’ का हवाला दिया गया था। चारों युवकों ने इस कार्रवाई के खिलाफ पहले ही चुनावी ट्रिब्यूनल यानी संबंधित अपीलीय प्राधिकरण में याचिका दाखिल कर रखी है।

West Bengal SIR विवाद में कानूनी सवाल

मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि जब मतदाता सूची से नाम हटाने से जुड़ी कार्रवाई के खिलाफ अपीलीय प्रक्रिया पहले से चल रही थी, तो उसके दौरान पुलिस और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से नागरिकता के आधार पर हिरासत की कार्रवाई किस सीमा तक उचित थी।

इसी सवाल को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर प्रश्न उठाए गए।

West Bengal SIR मामले में हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

कलकत्ता हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति कृष्णा राव के समक्ष हुई। उपलब्ध विवरण के अनुसार, अदालत ने प्राधिकारियों के रुख को विरोधाभासी बताया और कार्रवाई के आधार पर सवाल उठाए।

अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि जब किसी व्यक्ति की नागरिकता और मतदाता सूची से संबंधित मामला पहले से अपीलीय ट्रिब्यूनल के सामने लंबित है, तो FRRO या स्थानीय पुलिस किस अधिकार के तहत स्वयं नागरिकता संबंधी निष्कर्ष पर पहुंच सकती है?

सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर भी कड़ी टिप्पणी सामने आई। अदालत ने पूछा कि क्या संबंधित प्राधिकारी आम लोगों की जिंदगी के साथ इस तरह व्यवहार कर सकते हैं।

देश-दुनिया और अपराध जगत की ताजा खबरों के लिए 4thnation WhatsApp Channel से जुड़ें

आगे क्या होगा?

अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। चारों मजदूरों के परिवार अपनी ओर से दस्तावेजों और नागरिकता से जुड़े दावों के आधार पर राहत की मांग कर रहे हैं।

वहीं, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ पहले से लंबित अपीलीय कार्यवाही का परिणाम भी इस पूरे विवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

West Bengal SIR से जुड़ा रायपुर डिटेंशन सेंटर मामला मतदाता सूची, नागरिकता और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच संबंध को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी सवाल खड़े करता है। चार मजदूरों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के बाद उनकी नागरिकता पर सवाल उठे और उन्हें हिरासत में रखा गया, जबकि परिवार पुराने दस्तावेजों के आधार पर अपने भारतीय होने का दावा कर रहे हैं। अब इस मामले में अदालत और संबंधित अपीलीय प्राधिकरण की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर है।

One thought on “West Bengal SIR के बाद चार मजदूर डिटेंशन सेंटर में”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *