Grafted Brinjal Farming को व्यावसायिक तरीके से अपनाकर सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड के ग्राम बटईकेला निवासी किसान हरिहर साय ने खेती में नई मिसाल पेश की है। उन्होंने उन्नत तकनीक, उद्यानिकी और बेहतर बाजार प्रबंधन को अपनाकर अपनी बैंगन की उपज को स्थानीय बाजार से आगे पश्चिम बंगाल के कोलकाता तक पहुंचाया।
30 सितंबर 2026 तक हरिहर साय 19.50 क्विंटल बैंगन बेच चुके हैं। इस दौरान उन्हें अलग-अलग समय पर 27 रुपये से 38 रुपये प्रति किलोग्राम तक का भाव मिला। बैंगन की तुड़ाई और बिक्री अभी जारी है, इसलिए उत्पादन और आमदनी आगे और बढ़ने की संभावना है।
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Grafted Brinjal Farming के लिए 0.40 हेक्टेयर जमीन का चयन
हरिहर साय के पास कुल 4 हेक्टेयर कृषि भूमि है। उन्होंने पूरी जमीन पर एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय 0.40 हेक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों की खेती शुरू की।
इस वर्ष उन्होंने वीएनआर-212 ग्राफ्टेड बैंगन का चयन किया। इसकी बुआई 15 जून 2026 को की गई थी। इसके बाद 27 जुलाई से पहली तुड़ाई और बिक्री शुरू हुई।
ग्राफ्टेड पौधों के साथ बेहतर फसल प्रबंधन और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन पर ध्यान देने से उन्हें लगातार उपज प्राप्त हुई। इसी वजह से फसल की तुड़ाई और बाजार में बिक्री अभी भी जारी है।
खेत से कोलकाता बाजार तक पहुंची बैंगन की उपज
हरिहर साय की सफलता का महत्वपूर्ण पहलू उनकी उपज का बाजार विस्तार है। बटईकेला में उत्पादित बैंगन को स्थानीय बाजार तक सीमित रखने के बजाय उन्होंने इसे पश्चिम बंगाल के कोलकाता बाजार तक पहुंचाया।
30 सितंबर तक कुल 19.50 क्विंटल बैंगन का विक्रय किया जा चुका था। अलग-अलग समय पर उत्पाद को 27 से 38 रुपये प्रति किलोग्राम तक का बाजार भाव मिला।
किसान की फसल की बिक्री अभी जारी है। ऐसे में अंतिम उत्पादन और इससे होने वाली कुल आय का आंकड़ा आगे बढ़ सकता है। बेहतर गुणवत्ता और बाजार से सीधा जुड़ाव इस खेती की सफलता में अहम रहा।
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Grafted Brinjal Farming के साथ फसल विविधीकरण
हरिहर साय ने खेती को केवल बैंगन उत्पादन तक सीमित नहीं रखा। वे उद्यानिकी क्षेत्र में नई तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए शेडनेट हाउस में वीएनआर करेला और वीएनआर मिर्च के बीज उत्पादन का काम भी कर रहे हैं।
इस तरह अलग-अलग फसलों और कृषि गतिविधियों से जुड़कर उन्होंने आय के कई अवसर तैयार किए हैं। यह तरीका किसानों को किसी एक फसल पर अत्यधिक निर्भरता से बचाने में मदद कर सकता है।
फसल विविधीकरण के जरिए उपलब्ध कृषि भूमि का योजनाबद्ध उपयोग किया जा सकता है। इससे मौसम, बाजार और किसी एक फसल की कीमत में होने वाले उतार-चढ़ाव के जोखिम को भी बेहतर तरीके से संभालने का अवसर मिलता है।
आधुनिक तकनीक और बाजार से बढ़ी कमाई की उम्मीद
हरिहर साय का अनुभव बताता है कि आधुनिक कृषि तकनीक का लाभ केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। उन्नत पौध सामग्री, बेहतर फसल प्रबंधन और बाजार की मांग को समझकर किसान अपनी उपज के लिए व्यापक बाजार तैयार कर सकते हैं।
ग्राफ्टेड बैंगन जैसी तकनीक आधारित खेती के साथ बाजार की सही जानकारी भी जरूरी है। यदि गुणवत्तापूर्ण उपज को सही बाजार तक पहुंचाया जाए, तो किसान अपनी कृषि गतिविधियों को अधिक व्यावसायिक रूप दे सकते हैं।
बटईकेला से कोलकाता तक बनी बाजार की राह
सरगुजा के बटईकेला से निकलकर कोलकाता बाजार तक पहुंच रही हरिहर साय की बैंगन की उपज खेती में बदलाव की एक तस्वीर पेश करती है। उन्होंने सीमित क्षेत्र में उद्यानिकी फसल अपनाकर उसे बाजार से जोड़ने का प्रयास किया।
इसके साथ करेला और मिर्च के बीज उत्पादन जैसी गतिविधियां यह भी दिखाती हैं कि किसान अपनी कृषि भूमि में विविधता लाकर आय के नए स्रोत तैयार कर सकते हैं।
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Grafted Brinjal Farming हरिहर साय के लिए केवल एक फसल उत्पादन का तरीका नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक, फसल विविधीकरण और बेहतर बाजार से जुड़ने का सफल प्रयास बनकर सामने आया है। 0.40 हेक्टेयर में शुरू हुई ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से 30 सितंबर तक 19.50 क्विंटल उपज की बिक्री और 27 से 38 रुपये प्रति किलो तक का भाव यह बताता है कि योजनाबद्ध खेती और बाजार की समझ किसानों के लिए नए आर्थिक अवसर खोल सकती है।=
