Bindhu Sodhi Murder मामले में दंतेवाड़ा की अदालत ने करीब दो साल पुराने हत्या प्रकरण में पिता-पुत्र को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। ग्राम कोटवारपारा तोयलंका में हुई इस वारदात में बिंदू सोढ़ी की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी।
सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार आदित्य ने चैतु सोढ़ी और उसके बेटे कुम्मा सोढ़ी को हत्या का दोषी माना। दोनों को उम्रकैद के साथ 2-2 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना नहीं देने पर दोनों को एक-एक महीने की अतिरिक्त जेल भुगतनी होगी।
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Bindhu Sodhi Murder की शुरुआत खेत के विवाद से हुई
यह मामला कटेकल्याण थाना क्षेत्र का है। घटना 24 जून 2024 की शाम करीब 6:30 बजे हुई थी। उस समय बिंदू सोढ़ी अपने परिवार के साथ खेत में धान की बुआई और जुताई का काम करा रही थी।
काम के लिए दूसरे गांव से ट्रैक्टर बुलाया गया था। इसी दौरान बिंदू के चाचा चैतु सोढ़ी और उसका बेटा कुम्मा सोढ़ी कुल्हाड़ी लेकर खेत में पहुंचे। धान की बुआई को लेकर दोनों पक्षों में विवाद शुरू हो गया।
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धमकी के बाद बिंदू पर किया हमला
अभियोजन के अनुसार, विवाद के दौरान चैतु ने बिंदू को जान से मारने की धमकी दी और कुल्हाड़ी लेकर उसके पीछे दौड़ा। बिंदू खेत की ढलान की ओर भागी, लेकिन इसी दौरान वह गिर गई।
इसके बाद कुम्मा ने उसे पकड़ लिया। आरोप के अनुसार, चैतु ने टंगिया से बिंदू के गाल, गले और सिर पर वार किए। गंभीर चोटों के कारण बिंदू की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के बाद भीमा सोढ़ी और कोसा सोढ़ी डरकर वहां से चले गए और बाद में पुलिस को घटना की जानकारी दी।
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Bindhu Sodhi Murder में पोस्टमॉर्टम से अहम खुलासा
बिंदू के शव का पोस्टमॉर्टम डॉ. टिकेंद्र देवांगन ने किया था। रिपोर्ट में सिर और चेहरे पर धारदार हथियार से लगी चोटों के निशान सामने आए।
सिर की एक हड्डी में फ्रैक्चर था और मस्तिष्क में भी खून जमा मिला था। डॉक्टर ने अदालत में बताया कि सिर पर धारदार और सख्त हथियार से लगी चोट के कारण अत्यधिक रक्तस्राव हुआ।
इन्हीं चोटों को बिंदू की मौत का कारण बताया गया। डॉक्टर ने मौत को हत्या की श्रेणी में माना।
पुलिस ने कुल्हाड़ी और कपड़े किए जब्त
जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से खून लगी मिट्टी और सामान्य मिट्टी के नमूने एकत्र किए। इसके अलावा चैतु सोढ़ी की टी-शर्ट, लुंगी, लाल गमछा और कुल्हाड़ी जब्त की गई।
कुम्मा सोढ़ी के कपड़े भी पुलिस ने जब्त किए। जब्त किए गए सामान को वैज्ञानिक जांच के लिए न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला, जगदलपुर भेजा गया।
15 गवाहों के बयान बने अहम आधार
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 15 गवाहों के बयान कराए गए। पुलिस की जांच, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, गवाहों के बयान और जब्त सामग्री को मामले के साक्ष्यों के रूप में अदालत के सामने रखा गया।
बचाव पक्ष ने दोनों आरोपियों को निर्दोष बताते हुए जमीन विवाद के कारण झूठा फंसाए जाने की दलील दी। हालांकि, अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद दोनों को हत्या का दोषी माना।
जमीन विवाद को माना गया हत्या की वजह
अदालत के अनुसार, बिंदू सोढ़ी और आरोपियों के बीच जमीन को लेकर पहले से विवाद था। जिस खेत में घटना हुई, वह भी विवाद से जुड़ा हुआ था।
मामले में दोनों पक्षों के बीच पहले विवाद होने की बात भी सामने आई। अदालत ने गवाहों के बयान, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर माना कि चैतु सोढ़ी और कुम्मा सोढ़ी ने मिलकर बिंदू पर हमला किया था।
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कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा
सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार आदित्य ने दोनों आरोपियों को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोनों पर 2-2 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर दोनों को एक-एक महीने की अतिरिक्त जेल की सजा भुगतनी होगी। अदालत के इस फैसले के साथ करीब दो साल पुराने Bindhu Sodhi Murder मामले में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही का महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ।
Bindhu Sodhi Murder मामले में दंतेवाड़ा कोर्ट का फैसला हत्या के करीब दो साल बाद आया है। अदालत ने गवाहों के बयान, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर चैतु सोढ़ी और कुम्मा सोढ़ी को दोषी ठहराया। दोनों को आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा दी गई है।
