Elephant Deaths का एक चिंताजनक मामला छत्तीसगढ़ के उत्तरी हिस्से में सामने आया है। कुछ ही घंटों के अंतराल में सरगुजा और रायगढ़ जिलों में दो हाथी शावकों की मौत हो गई। सरगुजा में शावक की मौत खेत के चारों ओर लगाए गए बिजली के तार की चपेट में आने से हुई, जबकि रायगढ़ में करीब एक महीने के शावक के तालाब में डूबने की आशंका जताई गई है।
दोनों घटनाओं ने राज्य में मानव-हाथी संघर्ष और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
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Elephant Deaths: सरगुजा में करंट से शावक की मौत
सरगुजा के उदयपुर वन परिक्षेत्र में हाथियों का एक झुंड खेतों के आसपास से गुजर रहा था। इसी दौरान एक हाथी शावक का सूंड और पैर खेत की सुरक्षा के लिए लगाए गए विद्युत तार में फंस गया।
लाइव तार के संपर्क में आने के बाद शावक की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बिजली की बाड़ की जांच शुरू की।
वन अधिकारियों के अनुसार, जांच इस बात पर केंद्रित है कि बाड़ में बिजली का कनेक्शन किस तरह दिया गया था और क्या इसमें किसी अवैध विद्युत कनेक्शन का इस्तेमाल हुआ।
बिजली की बाड़ की क्षमता की हो रही जांच
वन विभाग यह भी जांच कर रहा है कि खेत के आसपास लगी बाड़ वास्तव में सामान्य सौर ऊर्जा से चलने वाली शॉक फेंस थी या उसे किसी अधिक शक्तिशाली विद्युत स्रोत से जोड़ा गया था।
अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठाया गया है कि सामान्य सोलर आधारित शॉक फेंस आम तौर पर इस तरह घातक नहीं होनी चाहिए। इसलिए तार में प्रवाहित करंट की क्षमता और संभावित अवैध हुकिंग की जांच की जा रही है।
जिस जमीन के आसपास बाड़ लगाई गई थी, वह झिरमिटी के सरपंच के परिवार की बताई गई है। वन विभाग ने जमीन मालिक की पहचान कर ली है और जिम्मेदारी तय होने के बाद कार्रवाई की बात कही है।
शावक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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Elephant Deaths के बीच रातभर चिंघाड़ता रहा हाथियों का झुंड
सरगुजा की घटना के बाद इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बन गई। ग्रामीणों के अनुसार, मृत शावक के पास हाथियों का बाकी झुंड कई घंटों तक मौजूद रहा और रातभर चिंघाड़ता रहा।
अल्कापुरी इलाके के कई परिवार सुरक्षा के कारण अपने घरों के भीतर ही रहे। वन विभाग ने स्थिति पर नजर रखी और हाथियों की गतिविधियों की निगरानी की।
अधिकारियों के अनुसार, उदयपुर क्षेत्र में हाथियों की संख्या हाल में बढ़ी है। करीब 15 हाथियों के पहले से मौजूद झुंड में पड़ोसी कोरिया जिले से लगभग 12 और हाथी आ गए, जिससे संख्या करीब 27 हो गई।
यह झुंड क्षेत्र में खड़ी फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहा है।
रायगढ़ में तालाब में मिला करीब एक महीने का शावक
दूसरी घटना रायगढ़ जिले के छाओडिया गांव में हुई। यहां बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात एक करीब एक महीने के मादा हाथी शावक का शव तालाब में मिला।
रायगढ़ के DFO पीएम अरविंद के अनुसार, शावक करीब 50 हाथियों के झुंड का हिस्सा था। वन विभाग ने शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम कराया है।
शावक की मौत का वास्तविक कारण पता लगाने के लिए उसके अंगों के नमूने भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), बरेली भेजे जाएंगे।
तालाब में डूबने की आशंका
वन विभाग को आशंका है कि रात के समय हाथियों का झुंड पानी पीने के लिए तालाब के पास पहुंचा होगा। इसी दौरान शावक फिसलकर गहरे पानी में चला गया या वहां फंस गया होगा।
हालांकि, यह अभी केवल प्रारंभिक आशंका है। शावक की मौत की वास्तविक वजह जांच और नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगी।
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Elephant Deaths ने बढ़ाई वन्यजीव सुरक्षा की चिंता
छत्तीसगढ़ में मानव-हाथी संघर्ष लंबे समय से वन विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। जंगलों के आसपास खेती और हाथियों की आवाजाही के कारण कई क्षेत्रों में फसलों को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ हाथियों और ग्रामीणों दोनों के लिए जोखिम पैदा होता है।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 32 महीनों में राज्य में अलग-अलग कारणों से 45 से अधिक हाथियों की मौत हुई है। ताजा घटनाओं ने बिजली की बाड़, जलस्रोतों और हाथियों के आवागमन वाले क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।
छत्तीसगढ़ में सामने आई Elephant Deaths की दोनों घटनाएं अलग-अलग परिस्थितियों में हुई हैं। सरगुजा में बिजली की बाड़ की भूमिका की जांच जारी है, जबकि रायगढ़ में शावक की मौत का कारण पोस्टमार्टम और नमूनों की जांच के बाद स्पष्ट होगा। इन घटनाओं के बीच वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए प्रभावी निगरानी और सुरक्षा उपाय महत्वपूर्ण होंगे।
