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Chhattisgarh Heritage Tourism को नई दिशा

Chhattisgarh Heritage Tourism को नई दिशा देने के लिए भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI), भारत सरकार और संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ है। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश के संरक्षणाधीन स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों पर पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं और आवश्यक अधोसंरचना विकसित करना है।

यह पहल छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए पर्यटन अनुभव को बेहतर बनाने पर केंद्रित है। योजनाएं ASI के अधिकारियों के परामर्श से तैयार की जाएंगी, ताकि विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे।

Chhattisgarh Heritage Tourism को नई दिशा

MoU के तहत संरक्षणाधीन स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों के लिए पर्यटक सुविधाओं के विकास की योजनाएं तैयार की जाएंगी। इन योजनाओं का उद्देश्य देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए स्थलों को अधिक सुविधाजनक और व्यवस्थित बनाना है।

प्रस्तावित सुविधाओं में बुनियादी जरूरतों के साथ पर्यटकों को ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी उपलब्ध कराने वाली व्यवस्थाएं भी शामिल होंगी। इससे विरासत स्थलों पर पर्यटन अनुभव को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

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पर्यटकों के लिए बढ़ेंगी सुविधाएं

पुरातात्विक स्थलों पर पर्यटकों की सुविधा के लिए शौचालय, स्वच्छ पेयजल, विश्राम स्थल, कैफेटेरिया, पार्किंग और क्लॉक रूम जैसी सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी।

इसके अलावा सूचना केंद्र, साइट म्यूजियम और साइनेज की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इससे पर्यटकों को संबंधित स्थल के इतिहास और पुरातात्विक महत्व की जानकारी आसानी से मिल सकेगी।

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समावेशी पर्यटन पर भी जोर

नई व्यवस्थाओं में दिव्यांग और विशेष जरूरत वाले पर्यटकों की सुविधा को भी ध्यान में रखा गया है। इसके लिए ब्रेल साइनेज और टैक्टाइल पाथवे विकसित करने का प्रावधान किया गया है।

पर्यटन स्थलों पर लैंडस्केपिंग और पर्यटकों की आवश्यकता के अनुसार अन्य अधोसंरचनाओं का भी विकास किया जा सकेगा।

धरोहर की मौलिकता रहेगी सर्वोच्च प्राथमिकता

विकास कार्यों के दौरान ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाले स्मारकों के मूल स्वरूप को सुरक्षित रखना प्राथमिकता होगी। डिजाइन, निर्माण सामग्री और संरचना का निर्धारण इस तरह किया जाएगा कि स्मारकों को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे।

सभी विकास कार्य संबंधित पुरातत्त्वीय अधिनियमों और नियमों के अनुरूप किए जाएंगे। किसी परियोजना को लागू करने से पहले भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण की स्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक होगा।

इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा कि पर्यटक सुविधाओं का विस्तार हो, लेकिन ऐतिहासिक धरोहर की मौलिकता प्रभावित न हो।

Chhattisgarh Heritage Tourism के लिए संसाधन

पर्यटन सुविधाओं और अधोसंरचना के विकास के लिए विभिन्न स्रोतों से संसाधन जुटाने की व्यवस्था की गई है। परियोजनाओं के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता के अलावा राज्य शासन की एजेंसियों का सहयोग लिया जा सकेगा।

इसके साथ कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के माध्यम से भी संसाधन जुटाए जा सकेंगे।

विकसित की गई सुविधाओं के रखरखाव और प्रबंधन की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ शासन या शासन द्वारा अधिकृत एजेंसी की होगी।

योजना एवं क्रियान्वयन समिति करेगी निगरानी

परियोजनाओं को व्यवस्थित तरीके से लागू करने और उनकी लगातार निगरानी के लिए “योजना एवं क्रियान्वयन समिति” का गठन किया जाएगा।

यह समिति योजना तैयार करने, विकास कार्यों और प्रबंधन सहित विभिन्न चरणों की निगरानी करेगी। इससे पुरातात्विक संरक्षण और पर्यटन सुविधाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी।

विरासत पर्यटन को मिलेगी नई पहचान

MoU के माध्यम से प्रदेश के पुरातात्विक स्थलों पर पर्यटक सुविधाओं के विकास का रास्ता खुला है। इससे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाले स्थलों को पर्यटन के लिहाज से अधिक व्यवस्थित रूप से विकसित करने में मदद मिल सकती है।

इस पहल का एक प्रमुख पक्ष यह है कि पर्यटन विकास के साथ धरोहर संरक्षण को भी केंद्र में रखा गया है। इससे छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत को व्यापक स्तर पर सामने लाने का अवसर मिलेगा।

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MoU के दौरान ये अधिकारी रहे मौजूद

MoU के अवसर पर भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण, भारत सरकार के महानिदेशक के प्रतिनिधि के रूप में मध्य क्षेत्र के निदेशक डॉ. टी. अरुण राज और रायपुर मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. एम. कलिमुथु उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ शासन की ओर से संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। संचालक पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय डॉ. संजय कन्नौजे सहित विभागीय अधिकारी भी इस अवसर पर मौजूद रहे।

Chhattisgarh Heritage Tourism के लिए ASI और छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग के बीच हुआ यह MoU संरक्षण और पर्यटन विकास को साथ लेकर चलने की पहल है। पर्यटक सुविधाओं, सूचना केंद्रों, साइट म्यूजियम और समावेशी व्यवस्थाओं के विकास के साथ ऐतिहासिक स्मारकों की मौलिकता सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है। आने वाले समय में इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश की पुरातात्विक और सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन के माध्यम से व्यापक पहचान मिल सकती है।

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