Chhattisgarh Ayushman Card से जुड़े कथित फर्जी इलाज और गलत क्लेम की शिकायतों के बाद छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग ने जांच अभियान शुरू किया है। 30 सितंबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, अलग-अलग जिलों में अस्पतालों के रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
बताया गया है कि शुरुआती जांच के लिए 17 अस्पतालों को चिन्हांकित किया गया था। इनमें रायपुर के 7, बिलासपुर के 3, दुर्ग के 2 तथा सरगुजा, बस्तर, कबीरधाम, कोंडागांव और कोरबा के एक-एक अस्पताल शामिल हैं।
स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने अस्पतालों में पहुंचकर मरीजों के रिकॉर्ड, इलाज से संबंधित दस्तावेज और आयुष्मान योजना से जुड़े क्लेम की जानकारी की जांच की। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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Chhattisgarh Ayushman Card: 17 अस्पतालों में जांच
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, विभाग की कार्रवाई केवल 17 चिन्हित अस्पतालों तक सीमित नहीं है। 100 से ज्यादा अस्पतालों में आयुष्मान योजना से जुड़े रिकॉर्ड की जांच जारी होने की जानकारी सामने आई है।
जांच में यह देखा जा रहा है कि जिन मरीजों के नाम पर योजना के तहत उपचार दर्ज किया गया, वास्तव में उनका इलाज हुआ था या नहीं। इसके साथ ही मेडिकल रिकॉर्ड और क्लेम से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है।
रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि कुछ अस्पतालों को जोखिम आधारित जांच के लिए चिन्हित किया गया है। हालांकि, किसी अस्पताल के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
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Chhattisgarh Ayushman Card को लेकर क्या शिकायतें?
आपके दिए गए विवरण के अनुसार, दैनिक भास्कर की 22 दिन की पड़ताल में कथित तौर पर डमी मरीजों की भर्ती, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इलाज दिखाने और क्लेम के बदले बिचौलियों को कमीशन देने जैसी शिकायतों का उल्लेख किया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मामलों में आयुष्मान कार्ड वाले लोगों को कमीशन के बदले अस्पताल लाने और बिना गंभीर बीमारी के भर्ती दिखाने के आरोप सामने आए।
ऐसे मामलों में 1 से 2 लाख रुपये तक के कथित क्लेम और बिचौलियों को 10 से 15 प्रतिशत तक कमीशन दिए जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई थी। इन दावों की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही होगी।
100 से ज्यादा अस्पतालों में जांच जारी
मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कई जिलों में जांच का दायरा बढ़ाया है। टीमों द्वारा अस्पतालों के मरीज रिकॉर्ड, इलाज की फाइल और आयुष्मान क्लेम से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।
मीडिया रिपोर्टों में यह कार्रवाई एक स्टिंग ऑपरेशन और उसके बाद प्रकाशित खबरों से जोड़कर बताई गई है। हालांकि, जांच पूरी होने तक सामने आए आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना जरूरी है।
बीजू स्वास्थ्य कार्ड भी जांच के दायरे में
रिपोर्टों में बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना से जुड़े कथित फर्जीवाड़े की भी जानकारी सामने आई है। यह ओडिशा सरकार की स्वास्थ्य योजना है और इसके तहत पात्र लाभार्थियों को सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार की सुविधा मिलती है।
ओडिशा सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की सूची में रायपुर, छत्तीसगढ़ के कुछ अस्पताल भी बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना के तहत सूचीबद्ध दिखाई देते हैं।
इसलिए संबंधित रिकॉर्ड और पात्रता से जुड़े दस्तावेजों की जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
Chhattisgarh Ayushman Card क्या है?
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना यानी AB-PMJAY के तहत पात्र लाभार्थियों को सूचीबद्ध अस्पतालों में निर्धारित उपचार के लिए कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा दी जाती है।
राष्ट्रीय स्तर पर योजना के तहत पात्र लाभार्थी की पहचान और ई-कार्ड के माध्यम से सेवाओं का उपयोग किया जाता है। अस्पताल द्वारा उपलब्ध कराई गई सेवा के आधार पर योजना के नियमों के अनुसार क्लेम प्रक्रिया होती है।
छत्तीसगढ़ में पुरानी स्मार्ट कार्ड आधारित स्वास्थ्य बीमा व्यवस्था को बाद में केंद्र की आयुष्मान योजना से जोड़ा गया। वर्तमान में पात्र लाभार्थी सूचीबद्ध अस्पतालों में योजना के तहत निर्धारित उपचार का लाभ ले सकते हैं।
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जांच के बाद क्या होगा?
स्वास्थ्य विभाग की जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं योजना के नियमों का उल्लंघन, गलत क्लेम या दस्तावेजों में अनियमितता तो नहीं हुई।
यदि जांच में किसी अस्पताल के खिलाफ अनियमितता प्रमाणित होती है, तो नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इससे पहले किसी अस्पताल या व्यक्ति को दोषी मानना उचित नहीं होगा।
Chhattisgarh Ayushman Card से जुड़ी शिकायतों के बाद स्वास्थ्य विभाग की जांच का दायरा बढ़ना इस मामले को महत्वपूर्ण बनाता है। 17 चिन्हित अस्पतालों के साथ 100 से ज्यादा अस्पतालों के रिकॉर्ड खंगाले जाने की जानकारी सामने आई है। अब जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि शिकायतों में कितनी सच्चाई है और किन मामलों में नियमों का उल्लंघन हुआ। फिलहाल अंतिम निष्कर्ष का इंतजार है।
