Khus Farming ने धमतरी जिले के कुरुद विकासखंड की ग्राम पंचायत परखंदा की महिलाओं के लिए खेती को अतिरिक्त आय के अवसर में बदलने का रास्ता खोला है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत गठित धान के कटोरा उत्पादक समिति से जुड़ी स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने पारंपरिक धान की खेती से आगे बढ़कर औषधीय और सुगंधित पौधे खस की खेती शुरू की है।
महिलाओं की यह पहल बताती है कि खेती में नवाचार और फसल विविधीकरण के जरिए ग्रामीण परिवार अपनी आजीविका को मजबूत कर सकते हैं। सामूहिक प्रयास ने महिलाओं को उत्पादन से लेकर आय अर्जित करने तक एक नया अनुभव दिया है।
देश-दुनिया और अपराध जगत की ताजा खबरों के लिए 4thnation WhatsApp Channel से जुड़ें
Khus Farming की चुनौती को महिलाओं ने बनाया अवसर
परखंदा की महिलाओं ने करीब ढाई एकड़ भूमि में खस की खेती शुरू करने का निर्णय लिया। उनके लिए यह एक नई फसल थी, इसलिए तकनीक, प्रबंधन और पौधों की देखभाल से जुड़ी कई चुनौतियां सामने आईं।
समूह की महिलाओं ने सामूहिक श्रम के साथ तकनीकी जानकारी और नियमित देखभाल पर ध्यान दिया। मेहनत और बेहतर प्रबंधन के परिणाम पहली कटाई में ही दिखाई दिए।
यह भी पढ़ें: Nagri Dubraj की देश-विदेश में नई पहचान
पहली कटाई में 11.20 क्विंटल खस उत्पादन
समूह को पहली कटाई में 11.20 क्विंटल खस का उत्पादन प्राप्त हुआ। बाजार में इस उपज की बिक्री से महिलाओं को 1.12 लाख रुपये की सीधी आय हुई।
यह परिणाम समूह के लिए महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि इससे महिलाओं का भरोसा बढ़ा कि पारंपरिक खेती के साथ नई और वैकल्पिक फसलों को अपनाकर भी आय के नए स्रोत तैयार किए जा सकते हैं।
Join 4thnation channel: WhatsApp Channel
Khus Farming के साथ पर्यावरण संरक्षण
परखंदा में आजीविका के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। योजना के तहत गांव में करीब छह एकड़ क्षेत्र में मिश्रित वृक्षारोपण किया गया है।
मिश्रित वृक्षारोपण से हरित क्षेत्र बढ़ाने और जैव विविधता संरक्षण में मदद मिलने की उम्मीद है। वहीं औषधीय और सुगंधित फसलों के जरिए ग्रामीण परिवारों के लिए आय के नए विकल्प तैयार किए जा रहे हैं।
यह मॉडल कृषि, पर्यावरण और ग्रामीण आजीविका को एक साथ जोड़ने की कोशिश के रूप में सामने आया है।
फसल विविधीकरण से बढ़ेगी आय की संभावना
खस की पहली फसल से उत्साहित महिलाओं ने अपनी गतिविधियों का दायरा बढ़ाया है। अब समूह खस के साथ हल्दी की खेती भी कर रहा है।
फसल विविधीकरण से किसी एक फसल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। समूह का लक्ष्य वर्षभर आय के अवसर बनाए रखना और भविष्य में उत्पादों का मूल्यवर्धन, प्रसंस्करण तथा संगठित विपणन करना है।
महिलाओं की आर्थिक भूमिका में बदलाव
परखंदा की यह पहल केवल 1.12 लाख रुपये की आय तक सीमित नहीं है। इससे महिलाओं में सामूहिक निर्णय लेने और खेती को आजीविका के व्यवस्थित साधन के रूप में देखने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
स्व-सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी भूमिका मजबूत हो रही है। खेती अब उनके लिए केवल पारंपरिक गतिविधि नहीं, बल्कि आय बढ़ाने का माध्यम भी बन रही है।
देश-दुनिया और अपराध जगत की ताजा खबरों के लिए 4thnation WhatsApp Channel से जुड़ें
Khus Farming बनी ग्रामीण आत्मनिर्भरता की मिसाल
परखंदा की महिलाओं की Khus Farming पहल यह दिखाती है कि नई फसल, सामूहिक मेहनत और तकनीकी मार्गदर्शन के साथ ग्रामीण क्षेत्र में आय के नए रास्ते बनाए जा सकते हैं।
खस के बाद हल्दी की खेती, मिश्रित वृक्षारोपण और भविष्य में मूल्यवर्धन व प्रसंस्करण की योजना इस प्रयास को आगे बढ़ाने की दिशा दिखाती है। महिलाओं की यह पहल ग्रामीण आत्मनिर्भरता और आजीविका विविधीकरण की एक उल्लेखनीय मिसाल बनकर सामने आई है।
Khus Farming ने परखंदा की महिलाओं को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आय का नया विकल्प दिया है। ढाई एकड़ से 11.20 क्विंटल उत्पादन और 1.12 लाख रुपये की आय ने समूह के प्रयासों को मजबूत आधार दिया है। खस के साथ हल्दी और पर्यावरण-अनुकूल गतिविधियों का विस्तार आने वाले समय में इस ग्रामीण आजीविका मॉडल को और व्यापक बना सकता है।
