Nagri Dubraj अब सिर्फ धमतरी जिले के नगरी अंचल तक सीमित पारंपरिक चावल नहीं रह गया है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत गट्टासिल्ली फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (FPO) ने इस सुगंधित चावल को संगठित बाजार और आधुनिक ब्रांडिंग से जोड़कर देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ जापान तक पहुंचाया है।
कभी स्थानीय खेतों और ग्रामीण रसोई तक सीमित रहने वाला यह पारंपरिक चावल अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना रहा है। इस बदलाव में स्थानीय महिला किसानों की भूमिका अहम रही है, जिन्होंने FPO के संचालन से लेकर गुणवत्ता, पैकेजिंग और बाजार रणनीति तक में भागीदारी बढ़ाई है।
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Nagri Dubraj को मिला GI Tag, बदली बाजार की तस्वीर
नगरी दुबराज को उसकी विशिष्ट प्राकृतिक सुगंध और स्वाद के लिए GI Tag प्राप्त है। भौगोलिक संकेत यानी Geographical Indication टैग किसी विशिष्ट क्षेत्र से जुड़े ऐसे उत्पादों की पहचान और विशिष्टता को दर्शाता है, जिनकी खासियत उनके भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी होती है।
‘सेवा संकल्प अभियान’ में नगरी दुबराज को केवल कृषि उपज नहीं, बल्कि नगरी क्षेत्र की पीढ़ियों पुरानी कृषि और सांस्कृतिक विरासत के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
गट्टासिल्ली FPO ने किसानों को संगठित करते हुए पारंपरिक उत्पादन को जैविक कृषि, मूल्य संवर्धन, बेहतर पैकेजिंग और ब्रांडिंग से जोड़ा। इससे उत्पाद को प्रीमियम बाजार तक पहुंचाने की दिशा में काम हुआ।
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Nagri Dubraj की कमान महिला किसानों के हाथ
इस पहल की खास बात महिला किसानों की बढ़ती भूमिका है। नगरी क्षेत्र की महिलाएं अब केवल कृषि कार्यों में भागीदारी नहीं कर रही हैं, बल्कि FPO के प्रबंधन और कारोबारी निर्णयों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, सामूहिक सौदेबाजी और डिजिटल मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। इससे ग्रामीण महिलाओं को कृषि आधारित उद्यमिता के नए अवसर मिले हैं।
FPO मॉडल के माध्यम से किसान सामूहिक रूप से उत्पादन और बाजार से जुड़ सकते हैं। इससे छोटे किसानों को अपने उत्पाद के लिए बेहतर बाजार संपर्क विकसित करने में मदद मिलती है।
Nagri Dubraj पहुंचा जापान के बाजार तक
गट्टासिल्ली FPO की पहल का विस्तार अब स्थानीय और राष्ट्रीय बाजार से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक हुआ है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नगरी दुबराज की खेप जापान भेजी गई है।
गुणवत्ता मानकों, जैविक उत्पादन पद्धति और वैज्ञानिक पैकेजिंग को अपनाकर उत्पाद को बड़े बाजार के अनुरूप तैयार किया गया। जापान तक पहुंच इस चावल की बाजार क्षमता और स्थानीय कृषि उत्पादों को वैश्विक मंच देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
इसके अलावा, देश के विभिन्न राज्यों में भी नगरी दुबराज की मांग बताई जा रही है। इससे स्थानीय किसानों के उत्पाद को क्षेत्रीय बाजार से बाहर नए उपभोक्ताओं तक पहुंचने का अवसर मिला है।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध
आज के डिजिटल दौर में उपभोक्ताओं तक सीधे पहुंच बनाने के लिए गट्टासिल्ली FPO ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का सहारा लिया है। नगरी दुबराज को Amazon, ONDC और Tribes India जैसे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया गया है।
इससे छत्तीसगढ़ के बाहर रहने वाले उपभोक्ता भी ऑनलाइन माध्यम से इस पारंपरिक चावल को खरीद सकते हैं। डिजिटल बिक्री ग्रामीण उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।
जिला प्रशासन और PRADAN का सहयोग
इस पूरी पहल में धमतरी जिला प्रशासन के मार्गदर्शन के साथ गैर-सरकारी संस्था PRADAN का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा। संस्था की ओर से महिला किसानों के क्षमता निर्माण और कृषि आधारित संस्थाओं को मजबूत करने के लिए सहयोग दिया गया।
जैविक कृषि प्रशिक्षण, संस्थागत क्षमता बढ़ाने और बाजार से सीधे संपर्क स्थापित करने जैसी गतिविधियों में तकनीकी एवं रणनीतिक सहयोग ने FPO को आगे बढ़ाने में मदद की।
यह मॉडल दिखाता है कि स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संस्थाओं और किसान संगठनों के बीच समन्वय से ग्रामीण उत्पादों को बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा सकता है।
नगरी दुबराज से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा
नगरी दुबराज की कहानी केवल एक पारंपरिक चावल के बाजार विस्तार की कहानी नहीं है। इसमें स्थानीय कृषि विरासत, महिला नेतृत्व, आधुनिक तकनीक, ब्रांडिंग और बाजार संपर्क का संयोजन दिखाई देता है।
गट्टासिल्ली FPO का उद्देश्य नगरी दुबराज को छत्तीसगढ़ की पहचान के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना है। जापान तक पहुंच और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्धता इस दिशा में आगे बढ़ते कदम हैं।
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Nagri Dubraj ने धमतरी के नगरी अंचल की पारंपरिक कृषि विरासत को देश और विदेश के बाजार से जोड़ने का रास्ता बनाया है। GI Tag, महिला किसानों का नेतृत्व, गट्टासिल्ली FPO की पहल और डिजिटल मार्केटिंग ने इस चावल को नई पहचान दी है। जापान तक पहुंची नगरी दुबराज की खेप ग्रामीण उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की संभावनाओं को भी सामने लाती है।
