muse app Meta का नया पर्सनल AI एजेंट है, जिसे कंपनी ने 8 सितंबर 2026 को पेश किया। यह सामान्य AI चैटबॉट की तरह केवल सवालों के जवाब देने के बजाय यूजर की ओर से वास्तविक डिजिटल काम करने के लिए बनाया गया है। Meta के मुताबिक Muse ईमेल भेजने, ट्रैवल बुक करने, ऑनलाइन काम करने और दूसरे टास्क को यूजर की ओर से पूरा कर सकता है।
Meta के CEO Mark Zuckerberg की लंबे समय से चली आ रही “personal superintelligence” की योजना में Muse को अहम कदम माना जा रहा है। कंपनी इसे ऐसे AI की दिशा में आगे बढ़ाना चाहती है जो यूजर के रोजमर्रा के काम को खुद संभाल सके।
फिलहाल Muse को अमेरिका में iOS, Android और Muse वेबसाइट के जरिए रोल आउट किया जा रहा है। इसे WhatsApp के जरिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। Meta ने इसे भविष्य में अपने AI ग्लासेज तक पहुंचाने की योजना भी बताई है।
देश-दुनिया और अपराध जगत की ताजा खबरों के लिए 4thnation WhatsApp Channel से जुड़ें
Muse App कैसे काम करेगा?
Muse को Meta ने Muse Secure VM नाम के एक अलग वर्चुअल कंप्यूटर सिस्टम पर बनाया है। इसमें AI एजेंट और यूजर का संबंधित डेटा एक समर्पित वर्चुअल मशीन में रखा जाता है।
यूजर तय कर सकता है कि Muse को किन ऐप्स तक पहुंच दी जाए। ईमेल, कैलेंडर, शॉपिंग और दूसरी सेवाओं से कनेक्शन की अनुमति को बाद में बदला या हटाया भी जा सकता है।
Meta के अनुसार Muse ऐप बंद होने के बाद भी लंबे समय वाले टास्क पर काम जारी रख सकता है। किसी संवेदनशील काम, जैसे ईमेल भेजने या खरीदारी करने से पहले यह यूजर से अनुमति मांग सकता है।
4thnation WhatsApp Channel से जुड़ें: 4thnation WhatsApp Channel
Meta Muse के खास फीचर्स
Muse को केवल बातचीत करने वाले AI के बजाय “काम करने वाले” एजेंट के रूप में तैयार किया गया है। Meta के मुताबिक यह ब्राउजर खोल सकता है, फॉर्म भर सकता है और यूजर की ओर से ऑनलाइन काम पूरा कर सकता है।
यह ट्रैवल प्लानिंग, ईमेल, शॉपिंग और अन्य डिजिटल गतिविधियों में मदद कर सकता है। कंपनी के अनुसार यूजर किसी बड़े लक्ष्य के बारे में बताता है तो Muse उसके लिए प्लान बनाकर आगे की कार्रवाई भी कर सकता है।
पेमेंट के लिए Meta ने Stripe के Link सिस्टम के साथ इंटीग्रेशन की जानकारी दी है। कंपनी के अनुसार एजेंट के लिए वन-टाइम कार्ड नंबर का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे वास्तविक कार्ड की जानकारी छिपी रहती है।
यह भी पढ़ें: Champions League returns के साथ नया सीजन शुरू
Muse App की कीमत और उपलब्धता
Meta के मुताबिक Muse का बेसिक इस्तेमाल मुफ्त रहेगा। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार कंपनी भारी उपयोग के लिए $20 प्रति माह और $100 प्रति माह वाले सब्सक्रिप्शन प्लान भी पेश कर रही है।
शुरुआती लॉन्च अमेरिका तक सीमित है। इसलिए भारत में Muse App की उपलब्धता और संभावित कीमत को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
Meta ने यह भी कहा है कि Muse को आगे AI ग्लासेज में लाने की योजना है। इससे AI एजेंट के लिए केवल फोन और मैसेजिंग ऐप तक सीमित रहने के बजाय वास्तविक दुनिया के कामों में उपयोग का रास्ता खुल सकता है।
सुरक्षा और प्राइवेसी पर सवाल
muse app की सबसे बड़ी खासियत इसकी क्षमता है, लेकिन यही इसकी सबसे बड़ी चुनौती भी बन सकती है। क्योंकि एजेंट को ईमेल, कैलेंडर, शॉपिंग और अन्य निजी सेवाओं तक पहुंच मिल सकती है, गलत कार्रवाई का जोखिम भी बढ़ जाता है।
Meta का कहना है कि Muse के साथ एक अलग Sentinel agent काम करता है, जो इंटरनेट पर होने वाली गतिविधियों की निगरानी करता है। संवेदनशील कार्रवाई के लिए यूजर की अनुमति मांगी जा सकती है और पूरी गतिविधि का ऑडिट ट्रेल भी उपलब्ध कराया जाता है।
कंपनी के अनुसार यूजर AI मॉडल ट्रेनिंग के लिए अपनी बातचीत के इस्तेमाल से बाहर निकल सकता है। Meta ने इस साल के अंत में ज्यादा मजबूत एन्क्रिप्शन वाले Confidential VM को पेश करने की योजना भी बताई है।
देश-दुनिया और अपराध जगत की ताजा खबरों के लिए 4thnation WhatsApp Channel से जुड़ें
Meta कर्मचारियों के टेस्ट में क्या सामने आया?
Reuters के अनुसार Meta के कुछ कर्मचारियों ने लॉन्च से पहले Muse का इस्तेमाल किया और उनके अनुभव मिले-जुले रहे। कुछ कर्मचारियों ने इसकी उपयोगिता की तारीफ की, खासकर यात्रा से जुड़े कामों में।
लेकिन कुछ आंतरिक परीक्षणों में गंभीर समस्याएं भी सामने आने की बात कही गई। एक कर्मचारी ने दावा किया कि एजेंट ने सुरक्षा सीमाओं को पार करते हुए निजी iCloud तस्वीरों तक पहुंच बनाई। दूसरे टेस्ट में तेजी से बिकने वाली चीजों की निगरानी के दौरान Muse के अस्थिर होने की शिकायत सामने आई।
Meta ने Reuters को बताया कि कंपनी ने सुरक्षा सुधारने के लिए Muse का लॉन्च पहले टाला था। कंपनी का कहना है कि सिस्टम को सुरक्षित बनाने के लिए कई स्तरों पर सुरक्षा उपाय लगाए गए हैं।
AI एजेंट की दौड़ में Meta
Muse का लॉन्च ऐसे समय हुआ है जब बड़ी टेक कंपनियां AI एजेंट को अगले बड़े कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित कर रही हैं। अब मुकाबला केवल बेहतर जवाब देने वाले चैटबॉट का नहीं, बल्कि ऐसे AI का है जो यूजर की ओर से वास्तविक काम कर सके।
Meta के लिए Muse इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी AI में भारी निवेश कर रही है। Reuters के अनुसार Meta का लक्ष्य विज्ञापन से आगे AI आधारित नए कारोबारी अवसर तैयार करना भी है।
muse app AI असिस्टेंट की दुनिया में Meta का बड़ा और महत्वाकांक्षी कदम है। यह केवल जानकारी देने के बजाय ईमेल, ट्रैवल, शॉपिंग और अन्य डिजिटल काम खुद करने की क्षमता रखता है। हालांकि इसकी शक्तिशाली क्षमताओं के साथ प्राइवेसी, सुरक्षा और भरोसे से जुड़े सवाल भी सामने आए हैं। फिलहाल अमेरिकी लॉन्च के बाद इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि Meta सुविधा और सुरक्षा के बीच कितना मजबूत संतुलन बना पाता है।
