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NSUI Appointments पर क्यों लगी रोक?

NSUI Appointments को लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के छात्र संगठन में सियासी हलचल तेज हो गई है। यूथ कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया के बीच 20 अगस्त को जारी पांच NSUI जिला अध्यक्षों की नियुक्तियों पर रोक लगा दी गई है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह फैसला यूथ कांग्रेस चुनाव को देखते हुए राष्ट्रीय कार्यालय से चर्चा के बाद लिया गया। 20 अगस्त के आदेश के बाद कुछ ही समय में नियुक्तियों को रोकने का नया फैसला सामने आया।

हालांकि, नियुक्तियों को किसी विशेष गुट के पक्ष में या खिलाफ कार्रवाई बताए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संगठन के भीतर इसे लेकर अलग-अलग राजनीतिक चर्चाएं जरूर तेज हैं।

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20 अगस्त को हुई थीं पांच जिला अध्यक्षों की नियुक्तियां

20 अगस्त को प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय की ओर से NSUI में पांच जिला अध्यक्षों की नियुक्ति का आदेश जारी किया गया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, रंजेश सिंह क्षत्री को बिलासपुर ग्रामीण, समर्थ मिरानी को बिलासपुर शहर, दुर्गांत आर्या को मुंगेली, उस्मान रजा को बालोद और रोशन सिंह ठाकुर को खैरागढ़-छुईखदान-गंडई की जिम्मेदारी दी गई थी।

इसी दौर में चार विधानसभा अध्यक्षों की नियुक्तियां भी की गई थीं। यानी कुल नौ संगठनात्मक पदों पर नए चेहरों को जिम्मेदारी दी गई थी। बाद में इन नियुक्तियों को वापस लेने का फैसला सामने आया।

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NSUI Appointments और यूथ कांग्रेस चुनाव का कनेक्शन

NSUI Appointments पर रोक ऐसे समय लगी है, जब छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस की चुनावी प्रक्रिया शुरू होने वाली है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक युवा कांग्रेस की सदस्यता और चुनावी प्रक्रिया 30 अगस्त से 29 सितंबर 2026 तक चलने वाली है।

इसी वजह से NSUI में संगठनात्मक नियुक्तियों और आगामी चुनावी समीकरणों को लेकर चर्चा तेज है। कुछ रिपोर्टों में नियुक्तियों को कांग्रेस के अलग-अलग राजनीतिक खेमों से जोड़कर देखा गया है, लेकिन इन दावों की पार्टी की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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रंजीत सिंह ने प्रदेश अध्यक्ष पर उठाए सवाल

बिलासपुर NSUI के पूर्व जिला अध्यक्ष रंजीत सिंह ने प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि बिलासपुर NSUI को शहर और ग्रामीण क्षेत्र में बांटकर बिना उनकी जानकारी के नए जिला अध्यक्ष नियुक्त किए गए।

रंजीत सिंह का कहना है कि संगठन के भीतर चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के समय इस तरह की नियुक्तियां उचित नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे फैसलों से किसी एक गुट को फायदा पहुंच सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि वह 2023 से बिलासपुर NSUI जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे और छात्रहित से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं।

सत्येंद्र चेलक के समर्थन को लेकर विवाद

विवाद के बीच रंजीत सिंह के कांग्रेस नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समर्थित बताए जा रहे यूथ कांग्रेस प्रत्याशी सत्येंद्र चेलक के समर्थन में प्रचार करने की चर्चा भी सामने आई।

कुछ मीडिया रिपोर्टों में इसी राजनीतिक गतिविधि को शिकायत का एक कारण बताया गया है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित पक्षों की ओर से सभी आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

इस पूरे मामले को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि कांग्रेस की छात्र और युवा इकाइयों में संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया चल रही है।

राष्ट्रीय कार्यालय तक पहुंचा विवाद

रिपोर्टों के मुताबिक नियुक्तियों को लेकर शिकायत राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची। शिकायत में संगठन चुनाव की घोषणा के बाद जिला स्तर पर नियुक्तियां किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए।

NSUI में संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया पहले ही घोषित हो चुकी है। जुलाई में छत्तीसगढ़ में NSUI के संगठनात्मक चुनाव की घोषणा की खबरें सामने आई थीं, जिसमें कैंपस स्तर से लेकर जिला और प्रदेश स्तर तक संगठनात्मक प्रक्रिया की बात कही गई थी।

ऐसे में नियुक्तियों और चुनावी प्रक्रिया के बीच तालमेल को लेकर संगठन के अंदर सवाल उठना स्वाभाविक माना जा रहा है।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि पांच जिला अध्यक्षों की नियुक्तियों पर रोक के बाद NSUI की अगली रणनीति क्या होगी। संगठन इन पदों पर दोबारा नियुक्तियां करेगा या चुनावी प्रक्रिया पूरी होने तक मौजूदा व्यवस्था जारी रखेगा, इस पर आगे के फैसले का इंतजार है।

वहीं, कांग्रेस संगठन के लिए युवा कांग्रेस और NSUI की चुनावी प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता और आंतरिक समन्वय बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। NSUI Appointments का यह विवाद अब केवल नियुक्तियों तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि संगठन की चुनावी रणनीति और आंतरिक समीकरणों पर भी नजरें टिक गई हैं।

छत्तीसगढ़ में NSUI Appointments पर लगी रोक ने संगठन के भीतर चल रही चर्चाओं को तेज कर दिया है। पांच जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद फैसला बदलना और इसे युवा कांग्रेस चुनाव से जोड़कर देखा जाना आने वाले दिनों में इस मामले को और महत्वपूर्ण बना सकता है। हालांकि गुटबाजी से जुड़े आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राष्ट्रीय कार्यालय तक मामला पहुंचने से साफ है कि NSUI में संगठनात्मक फैसलों को लेकर फिलहाल गहमागहमी बनी हुई है।

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