Pavas Prasang ने रायपुर में सावन की फुहारों के बीच कला और प्रकृति का अनूठा संगम पेश किया। राजधानी के मुक्ताकाशी मंच पर 24 अगस्त 2026 को आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में कथक नृत्य और शास्त्रीय संगीत की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने वर्षा ऋतु के सौंदर्य को जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान घुमड़ते बादल, सावन की रिमझिम और शास्त्रीय सुरों की मधुरता ने माहौल को खास बना दिया। कभी बादलों की गरज सुनाई दी तो कभी घुंघरुओं की झंकार और मधुर गायन से पूरा मंच गूंज उठा।
यह आयोजन भारतीय शास्त्रीय कला परंपरा और पावस ऋतु की भावनाओं को एक साथ प्रस्तुत करने का प्रभावशाली प्रयास रहा।
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Pavas Prasang में कथक की भावपूर्ण प्रस्तुति
Pavas Prasang में कथक नृत्य के जरिए सावन की उमंग, बादलों की गरज और बारिश की रिमझिम को मंच पर साकार किया गया। सुश्री शाश्वती बैनर्जी ने भाव, लय और ताल के सुंदर समन्वय के साथ कथक की प्रस्तुति दी।
उनकी नृत्य मुद्राओं में वर्षा ऋतु की अलग-अलग अनुभूतियां दिखाई दीं। प्रस्तुति ने दर्शकों को सावन के प्राकृतिक सौंदर्य और भारतीय शास्त्रीय नृत्य की गहराई का अनुभव कराया।
इसके बाद सुश्री इशिका गिरी ने कथक की मनोहारी प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति में शास्त्रीय नृत्य की बारीकियों के साथ वर्षा ऋतु के उल्लास और सौंदर्य का प्रभावी चित्रण देखने को मिला।
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शास्त्रीय गायन ने बांधा समां
कार्यक्रम में मेघा बोस ने शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी। उनके सुमधुर स्वरों ने पावस ऋतु की कोमल भावनाओं को स्वर दिया और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मुक्ताकाशी मंच पर खुले वातावरण में शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में रही। बारिश के मौसम और संगीत के इस मेल ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
मेवाती घराने के शास्त्रीय गायक श्री प्रदीप कुमार चौबे ने भी अपनी गायकी से पावस ऋतु की अनुभूतियों को सुरों में पिरोया। उनकी प्रस्तुति के दौरान वातावरण पूरी तरह सुरमयी हो उठा।
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Pavas Prasang में कलाकारों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान साहित्य परिषद के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा ने प्रतिभागी कलाकारों को सम्मानित किया। उन्होंने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए भारतीय शास्त्रीय कला को समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। साथ ही नई पीढ़ी में भारतीय कला और संस्कृति के प्रति रुचि बढ़ाने में भी ऐसे कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के संचालक डॉ. संजय कनौजे ने भी कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कलाकारों को विभिन्न मंचों पर सम्मान और प्रोत्साहन दिए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कला और संस्कृति को बढ़ावा
डॉ. कनौजे ने कहा कि कला और संस्कृति समाज को संवेदनशील बनाने के साथ हमारी परंपराओं को आगे बढ़ाने का प्रभावी माध्यम हैं। ऐसे आयोजन स्थानीय कलाकारों को मंच देने के साथ दर्शकों को भारतीय शास्त्रीय विधाओं से जोड़ते हैं।
कला प्रेमियों से सजा मुक्ताकाशी मंच
कार्यक्रम में उप संचालक श्री उमेश मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार एवं फोटोग्राफर श्री दीपेंद्र दीवान और श्री उदयभान सिंह सहित बड़ी संख्या में कला प्रेमी, श्रोता और दर्शक मौजूद रहे।
खुले आकाश के नीचे बादलों से घिरे वातावरण में कथक और शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को पावस ऋतु का अनूठा अनुभव कराया। मंच और प्रकृति का यह मेल कार्यक्रम की सबसे खास विशेषताओं में रहा।
Pavas Prasang बना प्रकृति और कला का संगम
Pavas Prasang की शाम में सावन केवल एक मौसम नहीं रहा, बल्कि कला और संवेदना की जीवंत अनुभूति बन गया। एक ओर आसमान में घुमड़ते बादल और बारिश की फुहारें थीं, वहीं दूसरी ओर कथक की लय, घुंघरुओं की झंकार और शास्त्रीय गायन के मधुर सुर थे।
कलाकारों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुतियों से सावन के रंग, उमंग और संवेदनाओं को मंच पर उतार दिया। रायपुर का मुक्ताकाशी मंच इस सांस्कृतिक शाम में भारतीय शास्त्रीय कला और प्रकृति के अद्भुत संगम का साक्षी बना। ऐसे आयोजन Pavas Prasang जैसे सांस्कृतिक प्रयासों के जरिए कला परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
