Industrial Accidents Chhattisgarh को लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार को अहम चर्चा हुई। राज्य सरकार ने सदन में बताया कि वर्ष 2025 और जनवरी से मई 2026 के बीच फैक्ट्रियों में हुए अलग-अलग हादसों में कुल 196 मजदूरों की मौत हुई है। हालांकि सरकार ने यह मानने से इनकार किया कि इन दुर्घटनाओं के पीछे सुरक्षा नियमों की अनदेखी मुख्य कारण है। श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने विधानसभा में विभागीय कार्रवाई, निरीक्षण और सुरक्षा उपायों का विस्तृत ब्यौरा भी प्रस्तुत किया।
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Industrial Accidents Chhattisgarh: विधानसभा में उठा औद्योगिक सुरक्षा का मुद्दा
भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर, धरमलाल कौशिक और धर्मजीत सिंह ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से राज्य में लगातार हो रहे औद्योगिक हादसों का मुद्दा उठाया।
विधायकों ने कहा कि कई औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों का प्रभावी पालन नहीं हो रहा है। उनके अनुसार, इसी कारण बॉयलर विस्फोट, गैस रिसाव, लिफ्ट दुर्घटना और फैक्ट्री संरचना ढहने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में 300 से अधिक मजदूर औद्योगिक दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा चुके हैं।
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17 महीनों में 196 मजदूरों की मौत
श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने सदन को बताया कि—
- वर्ष 2025 में फैक्ट्री हादसों में 122 मजदूरों की मौत हुई।
- जनवरी से मई 2026 के दौरान 74 मजदूरों की जान गई।
इस प्रकार पिछले 17 महीनों में कुल 196 मजदूरों की मौत औद्योगिक दुर्घटनाओं में हुई।
हालांकि मंत्री ने कहा कि यह कहना उचित नहीं होगा कि सभी हादसे सुरक्षा नियमों में लापरवाही के कारण हुए।
Industrial Accidents Chhattisgarh: वेदांता हादसे का भी हुआ जिक्र
विधानसभा में 14 अप्रैल को सक्ती जिले के सिंघितराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए बॉयलर विस्फोट का भी उल्लेख किया गया।
मंत्री ने बताया कि इस हादसे में—
- 25 मजदूरों की मौत हुई।
- 10 मजदूर घायल हुए।
- इनमें से 8 घायल अस्पताल से छुट्टी पा चुके हैं, जबकि 2 का इलाज जारी है।
तकनीकी जांच में दुर्घटना का कारण बॉयलर के भीतर अचानक दबाव बनने की प्रक्रिया, जिसे “पफिंग (Puffing)” कहा जाता है, पाया गया।
वेदांता हादसे के बाद सरकार ने क्या कार्रवाई की?
श्रम मंत्री के अनुसार, दुर्घटना के बाद तत्काल कई कदम उठाए गए।
- प्लांट के बॉयलर नंबर-1 का संचालन तत्काल बंद कराया गया।
- 27 जून को फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ श्रम न्यायालय में आपराधिक मामला दर्ज किया गया।
- तकनीकी जांच और अन्य आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।
सरकार का कहना है कि जहां भी सुरक्षा नियमों का उल्लंघन मिलता है, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
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Industrial Accidents Chhattisgarh: निरीक्षण और कार्रवाई के आंकड़े
श्रम विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में—
- 964 फैक्ट्रियों का निरीक्षण किया गया।
- 299 आपराधिक मामले दर्ज किए गए।
- श्रम न्यायालयों ने 4.60 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया।
वहीं जून 2026 तक—
- 484 फैक्ट्रियों का निरीक्षण किया गया।
- 134 मामले दर्ज हुए।
- न्यायालयों ने 1.77 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया।
हर दो साल में सुरक्षा ऑडिट
सरकार ने बताया कि अधिक जोखिम वाली फैक्ट्रियों में हर दो वर्ष में बाहरी एजेंसी से सेफ्टी ऑडिट कराया जाता है।
इसके अलावा—
- हर वर्ष आंतरिक सुरक्षा मूल्यांकन किया जाता है।
- श्रमिकों के लिए नियमित मॉक ड्रिल आयोजित होती हैं।
- कार्यस्थल सुरक्षा को लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाते हैं।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि हादसों की जांच अधिकृत फैक्ट्री निरीक्षकों द्वारा की जाती है।
सरकार ने आरोपों को किया खारिज
श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि यह कहना गलत है कि राज्य में औद्योगिक सुरक्षा नियमों का पालन नहीं कराया जा रहा।
उन्होंने बताया कि फैक्ट्री अधिनियम के तहत श्रम विभाग लगातार निरीक्षण कर रहा है और जहां भी उल्लंघन मिलता है, वहां कानूनी कार्रवाई की जाती है।
सरकार का दावा है कि औद्योगिक सुरक्षा को मजबूत करने और दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
Industrial Accidents Chhattisgarh को लेकर विधानसभा में हुई चर्चा ने राज्य की औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल और सरकारी पक्ष दोनों को सामने रखा। सरकार ने 17 महीनों में 196 मजदूरों की मौत की पुष्टि करते हुए सुरक्षा नियमों की अनदेखी के आरोपों को खारिज किया और निरीक्षण, सुरक्षा ऑडिट तथा कानूनी कार्रवाई के आंकड़े भी पेश किए। दूसरी ओर, विपक्ष ने औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की जरूरत बताई। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि Industrial Accidents Chhattisgarh जैसे मामलों में सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने के लिए क्या अतिरिक्त कदम उठाए जाते हैं।
