Industrial Safety Chhattisgarh एक बार फिर विधानसभा में चर्चा का प्रमुख विषय बना। छत्तीसगढ़ सरकार ने विधानसभा में जानकारी दी कि वर्ष 2025 और वर्ष 2026 (मई तक) के दौरान राज्य में विभिन्न औद्योगिक दुर्घटनाओं में कुल 196 श्रमिकों की मौत हुई है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इन हादसों के लिए सुरक्षा मानकों के पालन में लापरवाही को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। श्रम एवं वाणिज्य-उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने विधानसभा में विस्तृत आंकड़े और विभागीय कार्रवाई की जानकारी दी।
👉 Join 4thNation WhatsApp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j
Industrial Safety Chhattisgarh पर विधानसभा में गरमाई चर्चा
गुरुवार को विधानसभा में वरिष्ठ भाजपा विधायक अजय चंद्राकर, धर्मलाल कौशिक और धर्मजीत सिंह द्वारा ध्यानाकर्षण प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया।
विधायकों ने राज्य में लगातार बढ़ रहे औद्योगिक हादसों पर चिंता व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों का प्रभावी पालन नहीं हो रहा है। उनका कहना था कि निरीक्षण, सुरक्षा ऑडिट और निगरानी केवल कागजों तक सीमित रह गई है, जिसके कारण बॉयलर विस्फोट, गैस रिसाव, लिफ्ट दुर्घटनाएं और संरचनात्मक ढहने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
यह भी पढ़ें: Siyan Sadan Committee: दुर्ग के पोटियाकला में मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान, संगीत कक्ष और नकद पुरस्कारों की सौगात
17 महीनों में 196 मजदूरों की मौत
श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने विधानसभा में बताया कि—
- वर्ष 2025 में फैक्ट्री दुर्घटनाओं में 122 श्रमिकों की मौत हुई।
- वर्ष 2026 में मई तक औद्योगिक दुर्घटनाओं में 74 श्रमिकों की जान गई।
इस प्रकार 17 महीनों में कुल 196 श्रमिकों की मौत दर्ज की गई।
मंत्री ने विपक्ष के उस दावे को खारिज किया जिसमें हाल के वर्षों में 300 से अधिक श्रमिकों की मौत होने की बात कही गई थी।
Industrial Safety Chhattisgarh: वेदांता बॉयलर हादसे का भी हुआ जिक्र
विधानसभा में 14 अप्रैल को सक्ती जिले के सिंघीतराई गांव स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर विस्फोट का भी उल्लेख किया गया।
मंत्री ने बताया कि—
- हादसे में 25 श्रमिकों की मौत हुई।
- 10 श्रमिक घायल हुए।
- इनमें से 8 को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है, जबकि 2 का उपचार जारी है।
तकनीकी जांच में बॉयलर के फर्नेस के भीतर “पफिंग (Puffing)” को दुर्घटना का कारण पाया गया।
हादसे के बाद सरकार ने क्या कार्रवाई की?
मंत्री देवांगन ने बताया कि वेदांता हादसे के तुरंत बाद—
- बॉयलर नंबर-1 का संचालन तत्काल प्रभाव से बंद कराया गया।
- श्रम विभाग ने फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ 27 जून को श्रम न्यायालय में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया।
- अन्य संबंधित मामलों की भी तकनीकी जांच कराई गई।
सरकार के अनुसार, जहां भी सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, वहां कानूनी कार्रवाई की जाती है।
अन्य औद्योगिक हादसों का भी दिया गया ब्यौरा
विधानसभा में रायगढ़ जिले के टारकोल संयंत्र में फरवरी में हुई दुर्घटना तथा जून में रायपुर स्थित स्टील प्लांट में हुए हादसे का भी उल्लेख किया गया।
मंत्री ने कहा कि इन सभी मामलों की जांच की गई है और संबंधित उद्योगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गई है।
👉 Join 4thNation WhatsApp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j
#### Industrial Safety Chhattisgarh: सुरक्षा मानकों पर सरकार का पक्ष
मंत्री लखन लाल देवांगन ने स्पष्ट कहा कि यह कहना गलत होगा कि औद्योगिक दुर्घटनाएं केवल सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण बढ़ रही हैं।
उन्होंने बताया कि श्रम विभाग फैक्ट्री अधिनियम (Factories Act) के तहत लगातार सुरक्षा मानकों को मजबूत करने और दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए कार्य कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की Ease of Doing Business नीति के तहत जोखिम वाली फैक्ट्रियों का निरीक्षण रैंडमाइज्ड सिस्टम के माध्यम से किया जाता है ताकि सुरक्षा मानकों का निष्पक्ष पालन सुनिश्चित हो सके।
सुरक्षा ऑडिट और निरीक्षण के आंकड़े
मंत्री ने विधानसभा में विभागीय कार्रवाई के आंकड़े भी प्रस्तुत किए।
वर्ष 2025
- 964 फैक्ट्री निरीक्षण
- 299 आपराधिक प्रकरण श्रम न्यायालय में दर्ज
- 4.60 करोड़ रुपये का जुर्माना
वर्ष 2026 (जून तक)
- 484 निरीक्षण
- 134 आपराधिक मामले दर्ज
- 1.77 करोड़ रुपये का जुर्माना
सरकार के अनुसार, अत्यधिक जोखिम वाली फैक्ट्रियों में हर दो वर्ष में बाहरी एजेंसी से सुरक्षा ऑडिट और हर वर्ष आंतरिक सुरक्षा मूल्यांकन अनिवार्य किया गया है।
श्रमिकों के लिए सुरक्षा प्रशिक्षण भी जारी
मंत्री ने बताया कि श्रम विभाग नियमित रूप से—
- मॉक ड्रिल
- सुरक्षा प्रशिक्षण
- कार्यस्थल सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम
आयोजित करता है ताकि श्रमिकों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दुर्घटनाओं की जांच आउटसोर्स कर्मचारियों द्वारा नहीं बल्कि अधिकृत फैक्ट्री निरीक्षकों द्वारा की जाती है।
Industrial Safety Chhattisgarh को लेकर विधानसभा में हुई चर्चा ने राज्य की औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। सरकार ने 17 महीनों में 196 श्रमिकों की मौत की पुष्टि करते हुए सुरक्षा मानकों को मजबूत करने, नियमित निरीक्षण, सुरक्षा ऑडिट और कानूनी कार्रवाई का दावा किया है। वहीं विधायकों ने उद्योगों में सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों के बेहतर पालन से ऐसे हादसों में कितनी कमी लाई जा सकती है। Industrial Safety Chhattisgarh केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं बल्कि लाखों श्रमिकों के जीवन और सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।
