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PoP Idol Ban: दुर्ग में मूर्तिकारों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, प्रतिबंध पर संतुलित निर्णय की मांग

PoP Idol Ban को लेकर छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में मूर्तिकारों ने जिला प्रशासन के सामने अपनी चिंता जाहिर की है। छत्तीसगढ़ मूर्तिकार चित्रकार संघ के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर दुर्ग को ज्ञापन सौंपकर प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) से बनी मूर्तियों के निर्माण और विसर्जन पर लगाए गए प्रतिबंध के संबंध में पुनर्विचार की मांग की। संघ का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण बेहद जरूरी है, लेकिन इसके साथ हजारों कलाकारों और उनके परिवारों की आजीविका को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

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PoP Idol Ban को लेकर कलेक्टर दुर्ग को सौंपा गया ज्ञापन

छत्तीसगढ़ मूर्तिकार चित्रकार संघ के प्रतिनिधिमंडल ने पर्यावरण संरक्षण और कलाकारों के हितों के बीच संतुलन बनाने की मांग करते हुए जिला कलेक्टर दुर्ग को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में कहा गया कि प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) से निर्मित मूर्तियों के निर्माण एवं विसर्जन पर लागू प्रतिबंध का सीधा प्रभाव प्रदेशभर के मूर्तिकारों पर पड़ रहा है। ऐसे में शासन और प्रशासन को ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित हो और कलाकारों की आजीविका भी प्रभावित न हो।


PoP Idol Ban पर मूर्तिकारों ने रखी अपनी बात

संघ ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि प्रदेश के हजारों मूर्तिकार और उनके परिवार वर्षों से मूर्ति निर्माण के कार्य से जुड़े हुए हैं। यह केवल एक व्यवसाय नहीं बल्कि पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।

मूर्तिकारों का कहना है कि यदि प्रतिबंध से पहले व्यवहारिक विकल्प और पर्याप्त तैयारी नहीं होगी तो बड़ी संख्या में कलाकार आर्थिक संकट का सामना कर सकते हैं। इसलिए PoP Idol Ban से जुड़े निर्णय में सभी संबंधित पक्षों से चर्चा की जानी चाहिए।

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हजारों मूर्तिकारों की आजीविका पर पड़ सकता है असर

संघ के अनुसार, राज्य में बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम स्तर के मूर्तिकार त्योहारों के दौरान मूर्ति निर्माण से अपनी आय अर्जित करते हैं। यदि PoP से बनी मूर्तियों के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध लागू रहता है तो इन कलाकारों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।

प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से आग्रह किया कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएं, लेकिन ऐसे निर्णयों में उन परिवारों की आजीविका को भी ध्यान में रखा जाए जो वर्षों से इस कार्य पर निर्भर हैं।


PoP Idol Ban और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की मांग

मूर्तिकार चित्रकार संघ ने स्पष्ट किया कि वह पर्यावरण संरक्षण के पक्ष में है। संघ का कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा सभी की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके लिए ऐसा मॉडल अपनाया जाना चाहिए जो कलाकारों और पर्यावरण दोनों के हितों की रक्षा करे।

ज्ञापन में शासन एवं प्रशासन से अनुरोध किया गया कि सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए व्यवहारिक और संतुलित समाधान निकाला जाए। इससे पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य भी पूरे होंगे और कलाकारों के रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव भी नहीं पड़ेगा।


जिला प्रशासन से जताई सकारात्मक पहल की उम्मीद

संघ ने विश्वास व्यक्त किया कि जिला प्रशासन इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ विचार करेगा और मूर्तिकारों की मांगों को राज्य शासन तक पहुंचाएगा।

प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि प्रशासन यदि कलाकारों, पर्यावरण विशेषज्ञों और संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर समाधान निकाले तो बेहतर परिणाम सामने आ सकते हैं।


ज्ञापन सौंपने के दौरान ये पदाधिकारी रहे मौजूद

ज्ञापन सौंपने के दौरान छत्तीसगढ़ मूर्तिकार चित्रकार संघ के कई पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।

इनमें प्रमुख रूप से—

  • बाबा सिन्हा – प्रदेश कोषाध्यक्ष
  • देवानंद साहू – प्रदेश संयोजक
  • प्रवीण वासनिक – दुर्ग जिला अध्यक्ष
  • रमन
  • गौतम
  • महेश राव
  • विनय ताम्रकार

ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।


आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल यह एक मांगपत्र है जिसे जिला प्रशासन को सौंपा गया है। प्रशासन द्वारा इस विषय पर क्या निर्णय लिया जाएगा या शासन स्तर पर क्या पहल होगी, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

मूर्तिकार संघ को उम्मीद है कि उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार किया जाएगा और ऐसा समाधान निकलेगा जिससे पर्यावरण संरक्षण तथा कलाकारों की आजीविका दोनों सुरक्षित रह सकें।

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PoP Idol Ban को लेकर दुर्ग में छत्तीसगढ़ मूर्तिकार चित्रकार संघ द्वारा सौंपा गया ज्ञापन पर्यावरण संरक्षण और रोजगार के बीच संतुलन की आवश्यकता को सामने लाता है। संघ ने प्रशासन से किसी प्रकार के टकराव के बजाय व्यवहारिक समाधान की मांग की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन और राज्य शासन इस मांग पर किस प्रकार विचार करते हैं। यदि संतुलित नीति बनाई जाती है तो PoP Idol Ban के साथ पर्यावरण संरक्षण और हजारों मूर्तिकारों की आजीविका दोनों का बेहतर समन्वय संभव हो सकेगा।

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