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Ken Betwa Link Project पर बढ़ा विवाद, NACEJ ने लगाया मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप

Ken Betwa Link Project को लेकर देश में एक बार फिर विवाद गहरा गया है। नेशनल अलायंस फॉर क्लाइमेट एंड इकोलॉजिकल जस्टिस (NACEJ) ने परियोजना को पूरी तरह रद्द करने की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि इससे प्रभावित समुदायों के संवैधानिक और मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। संगठन ने कहा कि परियोजना से जुड़े विस्थापन, कथित अवैध बेदखली और पर्यावरणीय नुकसान को देखते हुए सरकार को इस योजना की स्वतंत्र समीक्षा करानी चाहिए।

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Ken Betwa Link Project क्या है?

Ken Betwa Link Project को दिसंबर 2021 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली थी। इसका उद्देश्य केन नदी बेसिन से पानी को बेतवा नदी बेसिन तक पहुंचाना है, ताकि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई की सुविधा बढ़ाई जा सके।

सरकार के अनुसार, इस परियोजना से लगभग 62 लाख लोगों को पेयजल मिलेगा और 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो सकेगी। इस परियोजना का प्रमुख हिस्सा दौधन बांध है, जिसके माध्यम से 221 किलोमीटर लंबी नहर बनाई जानी है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 45,000 करोड़ रुपये है।

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NACEJ ने Ken Betwa Link Project पर क्यों उठाए गंभीर सवाल?

NACEJ का कहना है कि परियोजना की मूल अवधारणा ही विवादित है। संगठन का दावा है कि केन नदी को “अधिशेष जल वाली नदी” मानने का आधार वैज्ञानिक रूप से पर्याप्त नहीं है। संगठन ने यह भी कहा कि दोनों नदियों के जल प्रवाह का पूरा डेटा सार्वजनिक नहीं किया गया है।

NACEJ ने आरोप लगाया कि परियोजना से बुंदेलखंड के कुछ हिस्सों में जल संकट कम होने के बजाय और बढ़ सकता है। संगठन ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त केंद्रीय सशक्त समिति (CEC) की 2019 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि केन नदी के उपलब्ध जल का अधिकांश हिस्सा परियोजना के पहले चरण में ही उपयोग हो जाएगा, जिससे ऊपरी क्षेत्र के किसानों पर असर पड़ सकता है।

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Ken Betwa Link Project से कितना होगा विस्थापन?

NACEJ के अनुसार, Ken Betwa Link Project के कारण सबसे बड़ा असर आदिवासी और ग्रामीण समुदायों पर पड़ेगा।

संगठन के मुताबिक—

  • छतरपुर जिले में लगभग 5,288 परिवार प्रभावित होंगे।
  • पन्ना जिले में करीब 1,400 परिवारों का विस्थापन होगा।
  • कुल 10 गांव पूरी तरह जलमग्न हो जाएंगे।
  • 24 गांव प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होंगे।
  • 6,600 से अधिक आदिवासी परिवार विस्थापन की चपेट में आएंगे।

संगठन का आरोप है कि प्रभावित गांवों में ग्राम सभाओं की सहमति नहीं ली गई और सामाजिक प्रभाव आकलन (Social Impact Assessment) सार्वजनिक नहीं किया गया।


Ken Betwa Link Project का पर्यावरण पर क्या असर होगा?

NACEJ ने पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं।

संगठन के अनुसार—

वन और वन्यजीवों को नुकसान

  • लगभग 6,017 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित होगी।
  • करीब 10,500 हेक्टेयर वन्यजीव आवास पर असर पड़ेगा।
  • लगभग 46 लाख पेड़ जलमग्न या नष्ट हो सकते हैं।
  • पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र का बड़ा हिस्सा प्रभावित होगा।
  • घड़ियाल अभयारण्य और कई संकटग्रस्त पक्षियों के आवास पर भी असर पड़ेगा।

NACEJ का आरोप है कि विशेषज्ञ समितियों की कई आपत्तियों को नजरअंदाज कर मंजूरियां दी गईं।


मुआवजा और पुनर्वास पर क्या हैं आरोप?

संगठन का कहना है कि प्रभावित परिवारों को कागजों में मिलने वाले पुनर्वास पैकेज और वास्तविक भुगतान में अंतर है।

आरोप है कि अधिकांश लोगों को केवल नकद मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि जमीन के बदले जमीन और गांव के बदले गांव की व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू नहीं की जा रही। साथ ही जंगल पर निर्भर आजीविका के नुकसान का पर्याप्त मुआवजा भी नहीं दिया जा रहा है।

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विरोध प्रदर्शन क्यों तेज हुआ?

NACEJ के अनुसार, प्रभावित गांवों में कई महीनों से आंदोलन चल रहा है।

संगठन ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने सत्याग्रह, धरना, सड़क जाम और “चिता आंदोलन” जैसे कार्यक्रम आयोजित किए। आरोप लगाया गया कि आंदोलनकारियों पर मुकदमे दर्ज किए गए, कई लोगों को गिरफ्तार किया गया तथा बिना पर्याप्त सूचना के मकानों और स्कूलों को गिराया गया। जुलाई में “हमें न्याय दो या मार डालो” के नारे के साथ आंदोलन फिर शुरू हुआ।


NACEJ की प्रमुख मांगें

संगठन ने केंद्र और राज्य सरकार से कई मांगें रखी हैं, जिनमें प्रमुख हैं—

  • Ken Betwa Link Project की मंजूरी वापस ली जाए।
  • जबरन बेदखली और भूमि अधिग्रहण तत्काल रोका जाए।
  • प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लिया जाए।
  • वन अधिकार अधिनियम और भूमि अधिग्रहण कानून का पूरी तरह पालन किया जाए।
  • भूमि के बदले भूमि और गांव के बदले गांव के सिद्धांत पर पुनर्वास हो।
  • मुआवजा प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
  • परियोजना के सामाजिक, पर्यावरणीय और कानूनी प्रभावों की स्वतंत्र समीक्षा हो।

निष्कर्ष

Ken Betwa Link Project को सरकार बुंदेलखंड की जल समस्या के समाधान के लिए महत्वपूर्ण परियोजना मानती है, जबकि NACEJ ने इसके पर्यावरणीय, सामाजिक और मानवीय प्रभावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन द्वारा लगाए गए आरोप उसके आधिकारिक बयान का हिस्सा हैं और परियोजना पर सरकार का पक्ष अलग है। आने वाले समय में इस परियोजना से जुड़ी कानूनी, पर्यावरणीय और पुनर्वास संबंधी प्रक्रियाओं पर सभी की नजर रहेगी। Ken Betwa Link Project पर जारी यह बहस विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की चुनौती को एक बार फिर सामने लाती है।

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