My Village My Water 2.0 अभियान के जरिए छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले ने जल संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। महज 15 दिनों के सामुदायिक अभियान में जिलेभर के ग्रामीणों ने श्रमदान कर लाखों जल संरचनाओं का निर्माण किया। इसका परिणाम पहली ही मानसूनी बारिश में देखने को मिला, जब लगभग 31 करोड़ लीटर वर्षा जल को संरक्षित कर भूजल स्तर बढ़ाने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की गई।
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My Village My Water 2.0 बना जल संरक्षण की नई मिसाल
महासमुंद जिला लंबे समय से जल संकट और गिरते भूजल स्तर की समस्या से जूझ रहा था। खरीफ और रबी सीजन में बड़े पैमाने पर धान की खेती के कारण भूजल पर लगातार दबाव बढ़ता गया। गर्मियों में कई गांवों में पेयजल और सिंचाई दोनों की गंभीर समस्या सामने आने लगी।
इसी चुनौती से निपटने के लिए जिला प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर My Village My Water 2.0 अभियान की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य वर्षा जल को गांवों में ही रोकना, भूजल का पुनर्भरण करना और जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाना था।
My Village My Water 2.0 के तहत 551 ग्राम पंचायतों में चला अभियान
यह अभियान जिले की 551 ग्राम पंचायतों और 1,140 से अधिक गांवों में चलाया गया। इसमें लाखों ग्रामीणों ने स्वेच्छा से श्रमदान किया।
लोगों ने अपने खेतों, जंगलों और घरों में वर्षा जल संचयन के लिए विभिन्न संरचनाएं बनाई। प्रशासन ने कृषि, वन, जिला पंचायत और जनपद पंचायत सहित कई विभागों के समन्वय से इस अभियान को सफल बनाया।
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15 दिनों में बनीं 3.41 लाख जल संरक्षण संरचनाएं
My Village My Water 2.0 अभियान के तहत केवल 15 दिनों में 3.41 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया।
इनमें शामिल हैं—
- रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट
- सोख्ता गड्ढे (Soak Pit)
- ट्रेंच
- चेक डैम
- तालाब
- कुएं
इन सभी संरचनाओं का निर्माण ग्रामीणों के श्रमदान और सरकारी विभागों के सहयोग से किया गया।
My Village My Water 2.0 का असर पहली बारिश में ही दिखा
अभियान की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण पहली मानसूनी बारिश बनी।
14 मई से 30 मई के बीच हुई बारिश के दौरान जिले में लगभग 31 करोड़ लीटर वर्षा जल का संरक्षण किया गया। यदि ये संरचनाएं नहीं होतीं तो यह पानी सीधे नालों और नदियों में बह जाता।
इस पहल से न केवल भूजल रिचार्ज हुआ बल्कि आने वाले समय में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता भी बेहतर होने की उम्मीद है।
हर घर बना जल संरक्षण मिशन का हिस्सा
अरंड ग्राम पंचायत के निवासी शंकर लाल यादव ने बताया कि ग्रामसभा में जल संकट पर चर्चा हुई और निर्णय लिया गया कि हर घर में सोख्ता गड्ढा बनाया जाएगा।
ग्रामीणों ने मिलकर यह लक्ष्य पूरा किया और आज लगभग हर घर में सोख्ता गड्ढा मौजूद है। इससे वर्षा का पानी सीधे जमीन में समा रहा है और भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद मिल रही है।
प्रशासन और जनता की साझेदारी बनी सफलता की कुंजी
महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के अनुसार My Village My Water 2.0 अभियान की सबसे बड़ी ताकत जनभागीदारी रही।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘जल संरक्षण-जनभागीदारी’ के विजन से प्रेरित इस अभियान में कृषि विभाग, वन विभाग, जिला पंचायत और जनपद पंचायत सहित सभी विभागों ने समन्वित प्रयास किए।
इस मॉडल ने साबित किया कि जब प्रशासन और आम जनता एक साथ काम करते हैं तो बड़े से बड़ा लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।
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निष्कर्ष
My Village My Water 2.0 केवल एक सरकारी अभियान नहीं बल्कि जनभागीदारी की ताकत का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है। महासमुंद जिले में 15 दिनों के भीतर 3.41 लाख जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण और पहली बारिश में 31 करोड़ लीटर पानी का संरक्षण यह साबित करता है कि सामूहिक प्रयास से जल संकट जैसी गंभीर चुनौती का प्रभावी समाधान संभव है। यदि इसी मॉडल को अन्य जिलों और राज्यों में अपनाया जाए तो देशभर में जल संरक्षण को नई दिशा मिल सकती है और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
