Chhattisgarh’s Abujhmad Reconnects पहल अबूझमाड़ के हजारों आदिवासी परिवारों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। कभी नक्सल प्रभाव और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण देश के सबसे अलग-थलग क्षेत्रों में गिने जाने वाले अबूझमाड़ में इस बार मानसून से पहले ग्रामीणों और सुरक्षा बलों ने मिलकर 53 अस्थायी लकड़ी और बांस के पुल तैयार किए हैं। इन पुलों का उद्देश्य बारिश के दौरान गांवों का संपर्क बनाए रखना और लोगों को अस्पताल, बाजार तथा सरकारी सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराना है।
करीब 4,000 वर्ग किलोमीटर में फैले अबूझमाड़ क्षेत्र में लगभग 60 हजार आदिवासी 233 गांवों में निवास करते हैं। आजादी के बाद पहली बार इस क्षेत्र का राजस्व सर्वेक्षण भी किया जा रहा है, जिससे विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
Chhattisgarh’s Abujhmad Reconnects: 53 अस्थायी पुलों से आसान होगा सफर
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मानसून शुरू होने से पहले ग्रामीणों ने जिला पुलिस और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवानों के साथ मिलकर 53 अस्थायी पुलों का निर्माण किया है।
ये पुल कुटुल-कोडनार, कुडमेल-कुमानार, ओरछा-लंका, कुटुल-गोबे और गरपा-काकुर-बालेबेड़ा जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर बनाए गए हैं। इन स्थानों पर भविष्य में स्थायी कंक्रीट पुलों का निर्माण भी स्वीकृत हो चुका है, जिनका कार्य शुरू हो गया है और अगले एक वर्ष में पूरा होने की संभावना है।
तब तक ये अस्थायी पुल बारिश के मौसम में गांवों की जीवनरेखा बने रहेंगे।
ग्रामीणों और सुरक्षा बलों की साझेदारी बनी मिसाल
Chhattisgarh’s Abujhmad Reconnects केवल पुल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीणों और सुरक्षा बलों के बीच बढ़ते विश्वास का भी प्रतीक बन गया है।
गांव के निवासी रामू राम वड्डे बताते हैं कि पहले बारिश के समय लोग नदियों और नालों को पैदल या तैरकर पार करते थे। उस समय सड़क और पुलों का निर्माण नहीं हो पाता था, जिससे गांव कई सप्ताह तक पूरी तरह कट जाते थे।
अब ग्रामीण स्वयं सुरक्षा बलों के साथ मिलकर विकास कार्यों में भागीदारी कर रहे हैं।
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Chhattisgarh’s Abujhmad Reconnects के पीछे ‘माड़ मैत्री अभियान’
नारायणपुर पुलिस द्वारा चलाया जा रहा ‘माड़ मैत्री अभियान’ इस पहल की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।
इस अभियान का उद्देश्य आदिवासी समुदाय और सुरक्षा बलों के बीच विश्वास को मजबूत करना है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पुलों के निर्माण से न केवल आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं आसान होंगी, बल्कि सुरक्षा बलों की आवाजाही भी बेहतर होगी।
हाल ही में स्थापित कई सुरक्षा शिविरों के लिए यह पहला मानसून होगा और ऐसे में ये पुल संचालन की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
बारिश में जान बचाने का माध्यम बनेंगे पुल
कुडमेल गांव के निवासी विवेक पोटाई का कहना है कि हर वर्ष बारिश के दौरान कई गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट जाता था।
समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने के कारण कई लोगों की मौत की घटनाएं सामने आती थीं, जिनमें से अधिकांश दर्ज भी नहीं हो पाती थीं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार पुल बनने से ऐसी दुखद घटनाओं में कमी आएगी।
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Chhattisgarh’s Abujhmad Reconnects पहल अबूझमाड़ के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। ग्रामीणों और सुरक्षा बलों की संयुक्त भागीदारी से बने 53 अस्थायी पुल केवल आवागमन का साधन नहीं हैं, बल्कि विश्वास, सहयोग और विकास की नई कहानी भी लिख रहे हैं। स्थायी पुलों के निर्माण तक ये पुल हजारों ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा का कार्य करेंगे और अबूझमाड़ को मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
