Anganwadi Medicine Kit को लेकर छत्तीसगढ़ में बड़ा खुलासा सामने आया है। राज्य के 51 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले करीब 20 लाख बच्चों की बुनियादी स्वास्थ्य सुरक्षा अफसरों की लापरवाही की भेंट चढ़ गई है।
केंद्र सरकार हर साल फर्स्ट एड और प्राथमिक उपचार के लिए करोड़ों रुपए का बजट देती है, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण यह राशि खर्च ही नहीं हो पा रही। इससे हजारों केंद्रों में बच्चों के लिए जरूरी दवाइयों और प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
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Anganwadi Medicine Kit क्यों है जरूरी
केंद्र सरकार के अनुसार 3 से 6 साल तक के बच्चों को प्री-प्राइमरी गतिविधियों और खेलकूद के दौरान हल्की चोट लगना, बुखार आना या डिहाइड्रेशन होना सामान्य बात है।
इसी स्थिति से निपटने के लिए हर आंगनबाड़ी केंद्र में Anganwadi Medicine Kit उपलब्ध कराना अनिवार्य माना गया है।
इस किट का उद्देश्य बच्चों को तुरंत प्राथमिक उपचार देना और संक्रमण या गंभीर स्थिति से बचाना है।
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20 लाख बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा पर संकट
छत्तीसगढ़ के हजारों आंगनबाड़ी केंद्रों में फिलहाल प्राथमिक उपचार तक की व्यवस्था नहीं है।
भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि कई केंद्रों में मामूली पट्टी, बुखार की दवा या ORS तक उपलब्ध नहीं है। इससे बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों के लिए प्राथमिक उपचार की सुविधा बेहद जरूरी होती है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर मामूली समस्या भी गंभीर बन सकती है।
करोड़ों का बजट फिर भी नहीं खरीदी गई दवाएं
केंद्र सरकार हर साल Anganwadi Medicine Kit के लिए करीब 7.5 से 8 करोड़ रुपए का बजट जारी करती है।
इसके बावजूद महिला एवं बाल विकास विभाग ने पिछले वर्षों में जरूरी दवाओं की खरीदी नहीं की। नतीजा यह हुआ कि बजट लैप्स होता रहा।
सूत्रों के मुताबिक अफसर इस प्रक्रिया को “झंझट” और “गैर-जरूरी” मान रहे थे। इसी कारण बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं मिली।
CGMSC के इनकार के बाद विभाग ने छोड़ा मामला
जानकारी के अनुसार वर्ष 2021-22 और 2022-23 में केंद्र सरकार की एजेंसी HLL के माध्यम से मेडिसिन किट की सप्लाई की गई थी। उस समय सभी केंद्रों तक दवाइयां पहुंची थीं।
लेकिन बाद में CGMSC ने टेंडर प्रक्रिया की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं बनाई।
इसी वजह से Anganwadi Medicine Kit की सप्लाई पूरी तरह बंद हो गई।
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Anganwadi Medicine Kit में क्या-क्या होना चाहिए
केंद्र सरकार ने प्रत्येक मेडिसिन किट की कीमत लगभग 1500 रुपए तय की है। साथ ही इसमें शामिल होने वाली दवाओं और सामग्री की सूची भी निर्धारित की गई है।
मेडिसिन किट में शामिल जरूरी सामग्री:
- पैरासिटामोल सिरप
- सिप्रोफ्लॉक्सासिन ड्रॉप्स
- ORS पैकेट
- पोविडोन आयोडीन सॉल्यूशन
- रोलर बैंडेज
- प्राथमिक उपचार सामग्री
इसके बावजूद विभाग इन मानकों का पालन करने में विफल रहा है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताई जमीनी हकीकत
राजधानी रायपुर और आसपास के क्षेत्रों की कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि बच्चों को अक्सर खेलते समय चोट लगती है।
कई बार बच्चों को बुखार या कमजोरी की समस्या भी होती है, लेकिन केंद्रों में प्राथमिक उपचार का कोई साधन नहीं है।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि मजबूरी में उन्हें स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं या आसपास के लोगों से दवा और पट्टी मांगनी पड़ती है।
कार्यकर्ताओं का दर्द
एक कार्यकर्ता ने बताया:
“जब बच्चे गिर जाते हैं या उन्हें बुखार होता है, तब हमारे सामने दुविधा की स्थिति बन जाती है। केंद्र में कोई सुविधा नहीं होने के कारण बाहर से मदद लेनी पड़ती है।”
विभाग ने क्या सफाई दी
महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग से पूछा गया है कि मेडिसिन किट में कौन-कौन सी दवाइयां उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
उन्होंने कहा कि जानकारी मिलने के बाद खरीदी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही पहले खरीदी क्यों नहीं हुई, इसकी भी जांच की जा रही है।
हालांकि सवाल यह है कि जब करोड़ों का बजट उपलब्ध था, तब बच्चों की सुरक्षा को लेकर समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए गए।
बच्चों की सेहत से जुड़ा बड़ा सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में प्राथमिक उपचार व्यवस्था का मजबूत होना बेहद जरूरी है।
अगर समय पर Anganwadi Medicine Kit उपलब्ध नहीं कराई गई, तो लाखों बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
राज्य सरकार और विभागीय अधिकारियों को इस मामले को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
छत्तीसगढ़ में Anganwadi Medicine Kit की कमी ने 20 लाख बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। करोड़ों रुपए का बजट होने के बावजूद दवाइयों की खरीदी नहीं होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
यदि जल्द ही सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में मेडिसिन किट उपलब्ध नहीं कराई गई, तो बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है। सरकार को अब इस मामले में त्वरित और ठोस कार्रवाई करनी होगी।
