Bilaspur Ganja Arrest का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है जिसमें दो सगी बहनें अपनी असली पहचान छिपाकर अलग-अलग फर्जी नामों से बिलासपुर में गांजे का बड़ा कारोबार चला रही थीं। ACCU (Anti Crime Control Unit) की टीम ने सरकंडा पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए दोनों बहनों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
इस Bilaspur Ganja Arrest में पुलिस ने 6 किलो गांजा, 5 लाख 98 हजार रुपए कैश, एक कार, 2 स्कूटी, 2 मोबाइल और 2 घड़ी बरामद की है। जब्त संपत्ति की कुल कीमत करीब 15 लाख 78 हजार रुपए बताई जा रही है।
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Bilaspur Ganja Arrest – मुख्य घटना एक नजर में
Bilaspur Ganja Arrest का यह मामला बिलासपुर के मोपका क्षेत्र के पाटलीपुत्र नगर और राजकिशोर नगर इलाके से जुड़ा है।
दोनों आरोपी महिलाएं मस्तूरी क्षेत्र के जयराम नगर की मूल निवासी हैं, लेकिन अपना ठिकाना बदल-बदल कर सरकंडा क्षेत्र में रह रही थीं। फर्जी नामों और अलग-अलग गाड़ियों का इस्तेमाल करके वे पुलिस की नजरों से बचती रहीं।
यह Bilaspur Ganja Arrest यह साबित करती है कि गांजे का यह कारोबार काफी सुनियोजित और संगठित तरीके से चलाया जा रहा था।

मुखबिर की सूचना पर ACCU और सरकंडा पुलिस की संयुक्त रेड
कैसे पकड़ी गईं दोनों बहनें?
Bilaspur Ganja Arrest की शुरुआत तब हुई जब पुलिस को एक विश्वसनीय मुखबिर से सूचना मिली कि मोपका के पाटलीपुत्र नगर और राजकिशोर नगर इलाके में दो महिलाएं गांजे की बिक्री का काम कर रही हैं।
इस सूचना पर ACCU प्रभारी और CSP निमितेश सिंह ने तुरंत एक्शन लिया। उन्होंने सरकंडा पुलिस के साथ मिलकर एक संयुक्त टीम बनाई और दोनों महिलाओं को रंगे हाथ पकड़ने की योजना तैयार की।
टीम ने सुनियोजित तरीके से रेड की और दोनों को मौके पर ही दबोच लिया। यह Bilaspur Ganja Arrest पुलिस की सतर्कता और टीमवर्क का शानदार उदाहरण है।
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Bilaspur Ganja Arrest: स्कूटी और कार में छिपाकर ले जा रही थीं गांजा
गाड़ियों का स्मार्ट इस्तेमाल – पर पुलिस से नहीं बच सकीं
Bilaspur Ganja Arrest में यह बात सामने आई कि दोनों बहनें गांजे की सप्लाई के लिए स्कूटी और कार का इस्तेमाल करती थीं। दोनों अलग-अलग गाड़ियों में गांजा रखकर अलग-अलग इलाकों में सप्लाई करती थीं।
पुलिस के मुताबिक, जो कार उनके पास से बरामद हुई, वह किसी दूसरे व्यक्ति की थी जिसे उन्होंने उपयोग के लिए लिया था। जबकि स्कूटी उन्होंने गांजे की बिक्री से कमाए पैसों से खुद खरीदी थी।
यह तरीका बताता है कि दोनों बहनें काफी चालाकी से इस कारोबार को चला रही थीं और पुलिस को धोखा देने की कोशिश कर रही थीं।
जब्त सामान का पूरा ब्यौरा – 15.78 लाख की संपत्ति बरामद
Bilaspur Ganja Arrest में क्या-क्या मिला?
इस Bilaspur Ganja Arrest में पुलिस ने जो सामान जब्त किया, वह इस बात का सबूत है कि यह एक बड़ा और मुनाफेदार कारोबार था।
| जब्त सामान | विवरण |
|---|---|
| गांजा | 6 किलोग्राम |
| नकद राशि | ₹5,98,000 |
| कार | 1 (दूसरे व्यक्ति की) |
| स्कूटी | 2 |
| मोबाइल फोन | 2 |
| घड़ी | 2 |
| कुल जब्त मूल्य | ₹15,78,000 |
करीब 15 लाख 78 हजार रुपए की यह बरामदगी यह साबित करती है कि दोनों बहनें लंबे समय से इस गांजे के धंधे में सक्रिय थीं और इससे अच्छा खासा मुनाफा कमा रही थीं।
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कौन हैं गिरफ्तार महिलाएं? नाम बदलकर चला रही थीं धंधा
फर्जी पहचान का खेल – पर पुलिस ने उजागर किया सच
Bilaspur Ganja Arrest में गिरफ्तार दोनों महिलाओं की असली पहचान पुलिस की पूछताछ में सामने आई। ACCU प्रभारी और CSP निमितेश सिंह ने बताया:
पहली आरोपी:
- असली नाम: मानकी केंवट
- फर्जी नाम: विनिता जोशी
- उम्र: 30 वर्ष
- मूल निवास: जयराम नगर, मस्तूरी क्षेत्र
- वर्तमान निवास: सरकंडा क्षेत्र
दूसरी आरोपी:
- असली नाम: सुदामा केंवट
- फर्जी नाम: रानी यादव
- उम्र: 40 वर्ष
- मूल निवास: जयराम नगर, मस्तूरी क्षेत्र
- वर्तमान निवास: सरकंडा क्षेत्र
दोनों सगी बहनें हैं। अपनी असली जाति और पहचान छिपाने के लिए दोनों अलग-अलग फर्जी नाम और सरनेम का इस्तेमाल करती थीं। इस तरह वे पुलिस की नजरों से बचती रहीं।
यह Bilaspur Ganja Arrest की सबसे चौंकाने वाली बात है – दो सगी बहनें, दो अलग पहचानें, एक ही अपराध।
Bilaspur Ganja Arrest: पहले भी NDPS में हो चुकी है कार्रवाई
पुरानी रिकॉर्डिस्ट हैं दोनों बहनें
Bilaspur Ganja Arrest में पूछताछ के दौरान एक और बड़ा खुलासा हुआ। पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों बहनों के खिलाफ पहले भी NDPS (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances) एक्ट के तहत कार्रवाई हो चुकी है।
यह बात यह स्पष्ट करती है कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद दोनों ने अपना अवैध धंधा बंद नहीं किया, बल्कि और चालाकी से – फर्जी नाम, अलग इलाका और बदली हुई गाड़ियों का इस्तेमाल करके – इसे जारी रखा।
पुलिस ने बताया कि उन्होंने गांजे की कमाई से स्कूटी खरीदी थी जिसे वे सप्लाई के लिए इस्तेमाल करती थीं।
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नेटवर्क की तलाश जारी – और गिरफ्तारियां संभव
कहां से आता था गांजा? कौन है सप्लायर?
Bilaspur Ganja Arrest के बाद पुलिस अब इन दोनों के गांजा नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि दोनों बहनें यह गांजा कहां से खरीदती थीं और इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पुलिस दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच कर रही है और उनके कॉन्टेक्ट्स के आधार पर सप्लायर और ग्राहकों की पहचान की जा रही है।
दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जा चुका है और उन्हें जेल भेज दिया गया है।
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Bilaspur Ganja Arrest का यह मामला न केवल पुलिस की सक्रियता और सूझबूझ का प्रमाण है, बल्कि यह यह भी बताता है कि नशे के कारोबारी अब कितने शातिर और संगठित तरीके से काम करने लगे हैं। दो सगी बहनों का फर्जी नाम अपनाकर, अलग-अलग इलाकों में, अलग-अलग गाड़ियों से गांजा बेचना एक सुनियोजित आपराधिक रणनीति थी।
ACCU प्रभारी CSP निमितेश सिंह और सरकंडा पुलिस की इस संयुक्त कार्रवाई ने 15.78 लाख रुपए की संपत्ति जब्त करके बिलासपुर में चल रहे इस अवैध नेटवर्क को बड़ा झटका दिया है।
अब जरूरत है कि इस Bilaspur Ganja Arrest की जांच को और आगे बढ़ाया जाए, ताकि इन दोनों के सप्लायर और पूरे नेटवर्क को उजागर किया जा सके और बिलासपुर को नशे के इस जहर से मुक्त किया जा सके।
