Pension Liability Dispute ने 25 साल पुराने राज्य विभाजन के मुद्दे को फिर सुर्खियों में ला दिया है। छत्तीसगढ़ ने मध्य प्रदेश से 10,133 करोड़ रुपये की बकाया राशि की औपचारिक मांग की है। यह दावा पेंशन देनदारियों के पुनः सत्यापन के बाद सामने आया। विधानसभा सत्र में इस विषय पर खुलासा हुआ। अब दोनों राज्यों के बीच वित्तीय जिम्मेदारी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। यह मामला केवल रकम का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का भी है।
Pension Liability Dispute पर विधानसभा में खुलासा
Pension Liability Dispute उस समय सामने आया जब Umang Singhar ने विधानसभा में सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि वर्ष 2000 में विभाजन के समय छत्तीसगढ़ का विकल्प चुनने वाले कर्मचारियों की पेंशन राशि कितनी लंबित है।
इस पर मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और वित्त विभाग प्रमुख Jagdish Devda ने लिखित उत्तर दिया। उन्होंने पुष्टि की कि छत्तीसगढ़ सरकार ने 10,133 करोड़ रुपये का दावा किया है। यह पत्र 1 अगस्त 2025 को प्राप्त हुआ।
देवड़ा ने बताया कि यह देनदारी पेंशन भुगतान के पुनः सत्यापन के कारण उत्पन्न हुई। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग के 28 नवंबर 2025 के आदेश से दोनों राज्यों के अधिकारियों का संयुक्त कार्यदल गठित किया गया है। फिलहाल मामला अध्ययनाधीन है।
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राज्य पुनर्गठन और पेंशन बंटवारा
साल 2000 में Chhattisgarh को Madhya Pradesh से अलग कर नया राज्य बनाया गया। उस समय कर्मचारियों और संपत्तियों का बंटवारा हुआ।
मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49 के अनुसार पेंशन देनदारियां जनसंख्या अनुपात के आधार पर बांटी जाती हैं। लिखित जवाब में बताया गया कि दायित्व का अनुपात 48,566 और 17,615 के अनुसार तय हुआ।
हालांकि अब पुनः सत्यापन के बाद छत्तीसगढ़ ने अतिरिक्त राशि का दावा किया है। इसलिए Pension Liability Dispute ने दोनों राज्यों को फिर आमने-सामने ला खड़ा किया है।
राज्य पुनर्गठन अधिनियम से जुड़ी जानकारी भारत सरकार के विधि पोर्टल https://legislative.gov.in पर उपलब्ध है।
Pension Liability Dispute के मुख्य बिंदु
- छत्तीसगढ़ ने 10,133 करोड़ रुपये का दावा किया।
- दावा 1 अगस्त 2025 के पत्र के माध्यम से भेजा गया।
- पेंशन देनदारी पुनः सत्यापन के बाद विवाद उभरा।
- दोनों राज्यों का संयुक्त कार्यदल गठित।
- मामला फिलहाल अध्ययनाधीन है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
Pension Liability Dispute ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। विपक्ष ने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा। उन्होंने पूछा कि देनदारी क्यों बढ़ी और जिम्मेदारी किसकी है।
वहीं सरकार ने कहा कि प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के तहत चल रही है। संयुक्त कार्यदल तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करेगा।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि राशि का भुगतान होता है तो यह दोनों राज्यों की वित्तीय योजना पर असर डालेगा। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर समाधान की कोशिश जारी है।
Pension Liability Dispute ने राज्य विभाजन के पुराने अध्याय को फिर खोल दिया है। 10,133 करोड़ रुपये की मांग ने राजनीतिक और प्रशासनिक बहस तेज कर दी है। अब सबकी नजर संयुक्त कार्यदल की रिपोर्ट पर है। जब तक अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक Pension Liability Dispute दोनों राज्यों के बीच चर्चा का केंद्र बना रहेगा।
