Maoist Rehabilitation: 120 का ऐतिहासिक कदम, बड़ी सकारात्मक जीत

Maoist Rehabilitation की दिशा में छत्तीसगढ़ ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक तस्वीर देखी। करीब 120 आत्मसमर्पण कर चुके माओवादी, जिनमें पूर्व सेंट्रल कमेटी मेंबर तक्कालापल्ली वासुदेव राव उर्फ रूपेश भी शामिल थे, नए रायपुर स्थित विधानसभा पहुंचे। यह सिर्फ एक दौरा नहीं था, बल्कि लोकतंत्र में भरोसे की वापसी का प्रतीक था। मुख्यमंत्री ने ‘जय जोहार’ कहकर उनका स्वागत किया। वहीं पूर्व माओवादियों ने सदन की कार्यवाही देखी और मंत्रियों से बातचीत की। यह पल भावनात्मक भी था और बदलाव की कहानी भी।


Maoist Rehabilitation के तहत विधानसभा में ऐतिहासिक उपस्थिति

Maoist Rehabilitation के तहत यह दौरा राज्य सरकार की पुनर्वास नीति की सफलता का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने कहा, “यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि हमारी अच्छी पुनर्वास नीति ने परिणाम दिए हैं। 2500 से अधिक माओवादी मुख्यधारा में लौट चुके हैं।”

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उन्होंने आगे कहा कि 120 पूर्व माओवादियों का विधानसभा आना एक विशेष दिन है। उन्होंने सदन की कार्यवाही देखी, मंत्रियों और डीजीपी से मुलाकात की और तस्वीरें भी खिंचवाईं। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार उन्हें सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य देगी।

राज्य के गृह मंत्री Vijay Sharma ने भी इस अवसर को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पूरे अभियान में “सरेंडर” शब्द का उपयोग नहीं किया। बल्कि उन्हें पुनर्वास के जरिए लोकतंत्र में वापस लाया गया। उन्होंने विधानसभा को “लोकतंत्र का मंदिर” बताया।

पूर्व सीसीएम तक्कालापल्ली वासुदेव राव उर्फ रूपेश ने मीडिया से कहा कि वे सरकार के आभारी हैं। उन्होंने कहा, “हम जनता के लिए काम करना चाहते हैं और इस अनुभव का उपयोग करेंगे।”


कौन हैं रूपेश और क्या है पूरा संदर्भ

59 वर्षीय तक्कालापल्ली वासुदेव राव, जिन्हें रूपेश या अशन्ना के नाम से भी जाना जाता है, प्रतिबंधित संगठन Communist Party of India (Maoist) के पूर्व सेंट्रल कमेटी मेंबर रहे हैं। उन्हें माओवादियों का बम विशेषज्ञ माना जाता था।

उनका नाम 2003 में आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu पर हुए हमले की साजिश में भी सामने आया था।

पिछले वर्ष अक्टूबर में रूपेश ने अबूझमाड़ क्षेत्र के 209 माओवादियों के साथ बस्तर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था। उस समय 153 हथियार जमा किए गए थे। इनमें 19 AK-47, 23 INSAS, 17 एसएलआर और 36 .303 राइफल शामिल थीं। यह समर्पण जगदलपुर में हुआ था।


Key Facts: Maoist Rehabilitation से जुड़े अहम तथ्य

  • 120 पूर्व माओवादी नए रायपुर विधानसभा पहुंचे।
  • 54 महिलाएं इस समूह में शामिल थीं।
  • 5 पूर्व DKSZC सदस्य और 7 डिविजनल कमेटी सदस्य मौजूद थे।
  • 33 एरिया कमेटी सदस्य और 84 पूर्व पार्टी सदस्य शामिल थे।
  • अब तक 2500 से अधिक माओवादी पुनर्वास नीति के तहत लौट चुके हैं।

Impact और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

Maoist Rehabilitation की इस पहल को राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष ने इसे “दुर्लभ और ऐतिहासिक” अवसर बताया। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की ताकत है कि जो कभी हथियार उठाए हुए थे, आज संविधान को स्वीकार कर रहे हैं।

गृह मंत्री ने गुरुवार रात पुनर्वास समूह के लिए अपने निवास, नवा रायपुर अटल नगर में रात्रिभोज का आयोजन भी किया। यह कदम विश्वास निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि सुरक्षा बल अभी भी सक्रिय अभियान चला रहे हैं। केंद्र सरकार ने 31 मार्च तक उग्रवाद खत्म करने की समयसीमा तय की है। ऐसे में यह पहल शांति प्रक्रिया को नई दिशा दे सकती है।

अधिक जानकारी के लिए आप छत्तीसगढ़ सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं: https://www.cgstate.gov.in


Maoist Rehabilitation सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि बदलाव की गहरी कहानी है। 120 पूर्व माओवादियों का विधानसभा पहुंचना इस बात का संकेत है कि संवाद और पुनर्वास की नीति असर दिखा रही है। सरकार इसे ऐतिहासिक मान रही है, वहीं पूर्व उग्रवादी भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी की बात कर रहे हैं। अगर यह सिलसिला जारी रहा, तो Maoist Rehabilitation छत्तीसगढ़ में स्थायी शांति की मजबूत नींव बन सकता है।

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