AAP Chhattisgarh Education Protest: Aam Aadmi Party की छत्तीसगढ़ इकाई ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर साय सरकार पर तीखा हमला बोला है। शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश में शिक्षा के मौलिक अधिकार की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
पार्टी ने याद दिलाया कि भारतीय संविधान में 86वें संशोधन (2002) के जरिए शिक्षा को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया गया था। अनुच्छेद 21A के तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी दी गई है। यह प्रावधान 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ और इसी के तहत शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 अस्तित्व में आया।
AAP Chhattisgarh Education Protest के दौरान नेताओं ने कहा कि वर्तमान सरकार इस संवैधानिक अधिकार की भावना को कमजोर कर रही है।
आत्मानंद स्कूलों पर उठे गंभीर सवाल
Aam Aadmi Party Chhattisgarh के प्रदेश महासचिव वदूद आलम ने बताया कि Swami Atmanand Excellent English Medium Schools को मिलने वाले फंड में कटौती की जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्कूलों में:
- शिक्षकों की भारी कमी है
- बिजली बिल बकाया हैं
- मरम्मत और रंग-रोगन ठप पड़े हैं
- प्रयोगशालाएं और शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हैं
- बच्चों को समय पर ड्रेस और किताबें नहीं मिल पा रहीं
रायपुर के कुछ आत्मानंद स्कूलों को बिजली बिल के नोटिस मिलने, राजनांदगांव में खाली पदों और बस्तर संभाग में संसाधनों की कमी को उदाहरण के रूप में रखा गया। पार्टी का दावा है कि ये केवल कुछ उदाहरण हैं, जबकि प्रदेश भर में यही स्थिति है।
RTE सीटों में कटौती का आरोप
प्रदेश सचिव अनुषा जोसेफ ने कहा कि सरकार ने RTE के तहत 44,173 सीटों की जगह केवल 19,466 सीटों पर ही प्रवेश देने का निर्णय लिया है।
इसका अर्थ है कि 24 हजार से अधिक सीटें समाप्त कर दी गई हैं। पहले RTE के तहत निजी स्कूलों में नर्सरी, पीपी-1, पीपी-2 और कक्षा पहली तक प्रवेश दिया जाता था। अब नियम बदलकर केवल कक्षा पहली में ही भर्ती अनिवार्य कर दी गई है।
AAP Chhattisgarh Education Protest में यह मुद्दा प्रमुख रहा। पार्टी का कहना है कि इससे गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, क्योंकि उन्हें शुरुआती कक्षाओं में निजी स्कूलों की फीस खुद देनी होगी।
‘युक्तियुक्तकरण’ में 10 हजार स्कूल बंद करने का आरोप
प्रदेश अध्यक्ष (कर्मचारी विंग) विजय कुमार झा ने कहा कि युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया में लगभग 10 हजार स्कूल बंद कर दिए गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि:
- 50 हजार शिक्षकों की भर्ती लंबित है
- ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल जर्जर हालत में हैं
- सरकारी शिक्षा की बजाय निजी स्कूलों को बढ़ावा दिया जा रहा है
उनके मुताबिक यह नीति बच्चों के भविष्य के साथ समझौता है।
सरकार से तीन बड़ी मांगें
प्रदेश मीडिया प्रभारी मिहिर कुर्मी ने कहा कि AAP Chhattisgarh Education Protest के तहत पार्टी ने सरकार से तीन प्रमुख मांगें की हैं:
- सभी आत्मानंद स्कूलों को नियमित और पर्याप्त फंड जारी किया जाए।
- RTE के तहत नर्सरी, पीपी-1 और पीपी-2 से प्रवेश की पुरानी व्यवस्था बहाल की जाए।
- छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा में पुराने फीडिंग कैडर सिस्टम के तहत नए शिक्षकों की भर्ती की जाए।
बच्चों के भविष्य से समझौता नहीं
रायपुर लोकसभा अध्यक्ष अजीम खान ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत गरीब और मध्यम वर्गीय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना उनका अधिकार है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शिक्षा के मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया, तो AAP Chhattisgarh Education Protest को प्रदेशव्यापी जनआंदोलन का रूप दिया जाएगा।
AAP Chhattisgarh Education Protest ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आत्मानंद स्कूलों के फंड, RTE सीटों में कटौती और शिक्षक भर्ती जैसे मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
अब देखना यह होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और शिक्षा के क्षेत्र में आगे क्या कदम उठाती है।
