राज्य प्रशासनिक सेवा में बड़ा बदलाव: नायब तहसीलदार और तहसीलदार से Deputy Collector पदोन्नति कोटा 40% से बढ़ाकर 50%

राज्य प्रशासनिक सेवा में पदोन्नति की प्रक्रिया को लेकर सरकार ने एक अहम निर्णय लिया है। अब नायब तहसीलदार और तहसीलदार पदों से Deputy Collector Promotion Quota को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है।

इस संबंध में जारी अधिसूचना को राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया है। जैसे ही यह आदेश लागू होगा, पदोन्नति की प्रक्रिया नए प्रावधानों के तहत संचालित की जाएगी।


पहले क्या था प्रावधान?

अब तक राज्य प्रशासनिक सेवा में नायब तहसीलदार और तहसीलदार से डिप्टी कलेक्टर पद पर पदोन्नति के लिए 40 प्रतिशत कोटा निर्धारित था। हालांकि वर्ष 2020 से पहले यह प्रतिशत 50 था।

बाद में इसे घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया था, जिससे कई अधिकारियों की पदोन्नति की संभावनाएं सीमित हो गई थीं। अब सरकार ने पुनः पुरानी व्यवस्था लागू करते हुए इसे 50 प्रतिशत कर दिया है।


क्यों अहम है यह फैसला?

Deputy Collector Promotion Quota बढ़ने से प्रशासनिक ढांचे में संतुलन आएगा।

  • अनुभवी अधिकारियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
  • विभागीय कार्यकुशलता में सुधार होगा।
  • लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों को गति मिलेगी।

दरअसल, कई नायब तहसीलदार और तहसीलदार वर्षों से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे थे। ऐसे में यह निर्णय उनके करियर के लिए नई उम्मीद लेकर आया है।


राजपत्र में प्रकाशित हुई अधिसूचना

सरकार द्वारा जारी अधिसूचना आधिकारिक रूप से राजपत्र में प्रकाशित की जा चुकी है। इसका अर्थ है कि अब यह निर्णय विधिवत लागू माना जाएगा।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में पदोन्नति प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।


प्रशासनिक सेवा पर पड़ेगा सकारात्मक असर

विशेषज्ञों का मानना है कि Deputy Collector Promotion Quota बढ़ाने से प्रशासनिक संरचना मजबूत होगी। अनुभवी और जमीनी स्तर पर काम कर चुके अधिकारी जब उच्च पदों पर पहुंचेंगे, तो शासन व्यवस्था और अधिक प्रभावी हो सकेगी।

इस बदलाव से न केवल अधिकारियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि आम नागरिकों को भी बेहतर प्रशासनिक सेवाएं मिल सकेंगी।


राज्य प्रशासनिक सेवा में Deputy Collector Promotion Quota को 40 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार माना जा रहा है। वर्ष 2020 से पहले लागू व्यवस्था की वापसी से सेवा संरचना में संतुलन और पारदर्शिता आने की उम्मीद है।

अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि नई व्यवस्था के तहत पदोन्नति प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है।

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