पीएम मोदी की मेजबानी में जुटेंगे दुनिया के टेक दिग्गज, AI पर ग्लोबल साउथ की बड़ी बहस

Delhi AI Impact Summit 2026 इस सप्ताह नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है, जहां दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों के प्रमुख और ग्लोबल साउथ के नेता एक मंच पर दिखाई देंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में होने वाला यह समिट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य, उपयोग और नियंत्रण पर निर्णायक चर्चा का केंद्र बनेगा।

दिल्ली में आयोजित यह समिट सिर्फ तकनीक का प्रदर्शन नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन की नई बहस भी है।


टेक अरबपतियों का जमावड़ा, ग्लोबल साउथ की आवाज

Delhi AI Impact Summit 2026 में Google के सीईओ सुंदर पिचाई, OpenAI के सैम ऑल्टमैन और Anthropic के डारियो अमोडेई शामिल होंगे। इनके साथ हजारों टेक एक्जीक्यूटिव, AI सुरक्षा विशेषज्ञ और विभिन्न देशों के मंत्री भी मौजूद रहेंगे।

केन्या, सेनेगल, मॉरिशस, टोगो, इंडोनेशिया और मिस्र जैसे देशों के प्रतिनिधि इस मंच पर AI के उपयोग को लेकर अपनी प्राथमिकताएं रखेंगे। इन देशों में औसत आय कम है, लेकिन उम्मीदें बड़ी हैं — AI से कृषि, जल प्रबंधन और सार्वजनिक स्वास्थ्य में बदलाव की।


पीएम मोदी की रणनीति: दक्षिण एशिया और अफ्रीका का AI हब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समिट में गुरुवार को संबोधन देंगे। उनका उद्देश्य भारत को दक्षिण एशिया और अफ्रीका के लिए AI हब के रूप में स्थापित करना है।

उन्होंने हाल ही में कहा कि AI का उपयोग “मानव-केंद्रित प्रगति” के लिए होना चाहिए। समिट की थीम है — “Welfare for all, happiness for all”

Delhi AI Impact Summit 2026 के एजेंडे में शामिल है:

  • कृषि में AI
  • जल संसाधन प्रबंधन
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य
  • शिक्षा में AI का विस्तार

AI कॉलोनियलिज्म बनाम ‘टेक्नो-गांधीवाद’ की बहस

समिट के पर्यवेक्षक इसे दो विचारधाराओं की टक्कर मान रहे हैं।
एक ओर अमेरिकी टेक कंपनियां AI की वैश्विक दौड़ में आगे निकलने की होड़ में हैं। दूसरी ओर, कुछ विशेषज्ञ “टेक्नो-गांधीवाद” की वकालत कर रहे हैं — यानी AI का उपयोग सामाजिक न्याय और हाशिए के समुदायों के उत्थान के लिए हो।

Delhi AI Impact Summit 2026 ग्लोबल साउथ में आयोजित पहला ऐसा समिट है। इससे पहले यह आयोजन ब्रिटेन, सियोल और पेरिस में हो चुका है।


AI सुरक्षा और वैश्विक चिंता

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस भी दिल्ली में संबोधित करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि AI केवल विकसित देशों का विशेषाधिकार नहीं बनना चाहिए।

AI के “गॉडफादर” कहे जाने वाले योशुआ बेंगियो ने भी चिंता जताई है कि AI की क्षमताएं तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन सुरक्षा उपाय उतनी तेजी से आगे नहीं बढ़ पाए हैं।

यूक्रेन और मध्य पूर्व में AI-सक्षम युद्ध के संदर्भ में यह बहस और गंभीर हो गई है।


अमेरिका की दूरी और नीति का सवाल

ट्रम्प प्रशासन के रुख के चलते अमेरिका की ओर से उच्च-स्तरीय प्रतिनिधित्व की संभावना कम है। माना जा रहा है कि सख्त नियामक ढांचे पर वैश्विक सहमति बनना मुश्किल होगा।

एक वरिष्ठ AI कंपनी स्रोत ने कहा कि मौजूदा हालात में व्यापक नियामक समझौते की उम्मीद कम है।


भारत में AI शिक्षा और निवेश

Google DeepMind के अनुसार भारत में शिक्षा क्षेत्र में AI का तेजी से उपयोग हो रहा है। लगभग 90% शिक्षक और छात्र AI का इस्तेमाल कर रहे हैं।

Google ने भारत में 15 अरब डॉलर का निवेश किया है। आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में एक गीगावॉट-स्तरीय AI डाटा सेंटर हब विकसित किया जा रहा है, जो वैश्विक नेटवर्क से जुड़ा होगा।


निर्णायक मोड़ पर दुनिया

Delhi AI Impact Summit 2026 केवल तकनीकी सम्मेलन नहीं है। यह तय करेगा कि AI का भविष्य किस दिशा में जाएगा — कॉरपोरेट प्रतिस्पर्धा की ओर या सामाजिक विकास की राह पर।

दिल्ली इस सप्ताह वैश्विक AI बहस का केंद्र बन चुकी है। आने वाले दिनों में यहां से निकले संदेश का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।

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