Drone Registration in Madhya Pradesh and Chhattisgarh: नीतियों के बावजूद ड्रोन अपनाने की रफ्तार क्यों धीमी?

केंद्र सरकार भले ही देश में ड्रोन क्रांति की बात कर रही हो, लेकिन Drone Registration in Madhya Pradesh and Chhattisgarh के ताजा आंकड़े कई सवाल खड़े कर रहे हैं। लोकसभा में पेश एक लिखित जवाब ने मध्य भारत में ड्रोन अपनाने की धीमी रफ्तार को उजागर कर दिया है।

नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने सांसद सजदा अहमद के सवाल के जवाब में बताया कि सरकार ने ड्रोन संचालन को सुरक्षित और सरल बनाने के लिए व्यापक सुधार किए हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर क्या है व्यवस्था?

सरकार ने 2021 में Drone Rules, 2021 लागू किए। इसका उद्देश्य ड्रोन संचालन को सुरक्षित, पारदर्शी और विकासोन्मुख बनाना था।

इसके बाद 2023 और 2024 में नियमों को और सरल किया गया। अब:

  • रिमोट पायलट सर्टिफिकेट के लिए पासपोर्ट अनिवार्यता हटा दी गई है।
  • ड्रोन पंजीकरण और ट्रांसफर प्रक्रिया आसान की गई है।
  • देश के लगभग 90% एयरस्पेस को “ग्रीन जोन” घोषित किया गया है, जहां बिना पूर्व अनुमति ड्रोन उड़ाए जा सकते हैं।
  • 2022 में अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम के लिए प्रमाणन योजना लागू की गई।

हालांकि, सुरक्षा के लिए यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UIN), वैध रिमोट पायलट सर्टिफिकेट और DGCA अधिकृत प्रशिक्षण संस्थान अनिवार्य हैं। हथियार या खतरनाक सामग्री ले जाने पर सख्त प्रतिबंध जारी हैं।

नीतिगत ढांचा मजबूत दिखता है। लेकिन क्या जमीन पर भी उतनी ही मजबूती है?


Drone Registration in Madhya Pradesh and Chhattisgarh: आंकड़े क्या कहते हैं?

31 जनवरी 2026 तक देश में कुल 38,475 ड्रोन पंजीकृत हैं। लेकिन जब हम Drone Registration in Madhya Pradesh and Chhattisgarh के आंकड़े देखते हैं, तो तस्वीर चिंताजनक लगती है।

  • मध्य प्रदेश – 480 पंजीकृत ड्रोन
  • छत्तीसगढ़ – 161 पंजीकृत ड्रोन

इसके मुकाबले:

  • महाराष्ट्र – 8,210
  • तमिलनाडु – 5,878
  • तेलंगाना – 3,657
  • कर्नाटक – 3,258
  • हरियाणा – 2,179
  • आंध्र प्रदेश – 1,876

स्पष्ट है कि मध्य प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर 13वें स्थान पर है, जबकि छत्तीसगढ़ और पीछे है।


मध्य प्रदेश: “ड्रोन हब” का सपना और हकीकत

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य को “ड्रोन हब” बनाने का लक्ष्य रखा है। इसी दिशा में MP Drone Promotion and Utilisation Policy-2025 लागू की गई।

इस नीति के तहत:

  • ड्रोन निर्माण इकाइयों को 40% तक पूंजी अनुदान (अधिकतम 30 करोड़ रुपये)।
  • रिसर्च एवं डेवलपमेंट के लिए 2 करोड़ रुपये तक की सहायता।

इतने “बंपर” प्रोत्साहनों के बावजूद Drone Registration in Madhya Pradesh and Chhattisgarh के आंकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश अभी भी अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ पाया है।

कृषि, खनन, वन क्षेत्र और बुनियादी ढांचे में ड्रोन की अपार संभावनाएं हैं। किसान फसल सर्वे के लिए ड्रोन चाहते हैं, प्रशासन निगरानी के लिए, और उद्योग लॉजिस्टिक्स के लिए। फिर भी पंजीकरण संख्या 500 से भी कम है।


छत्तीसगढ़: जरूरत ज्यादा, उपयोग कम

छत्तीसगढ़ में वन क्षेत्र व्यापक है। आपदा प्रबंधन, दूरस्थ स्वास्थ्य सेवाएं और नक्सल प्रभावित इलाकों में निगरानी—इन सभी में ड्रोन उपयोगी हो सकते हैं।

इसके बावजूद 161 पंजीकृत ड्रोन का आंकड़ा राज्य की वास्तविक जरूरतों से मेल नहीं खाता।

यहां सवाल सिर्फ नीति का नहीं, बल्कि प्रशिक्षण, निवेश, स्थानीय उद्योग और जागरूकता का भी है।


असली चुनौती: नीति से जमीन तक

केंद्र का ढांचा उदार और सुव्यवस्थित है। एयरस्पेस खुला है। प्रमाणन प्रणाली स्पष्ट है। नियम सरल हैं।

फिर भी Drone Registration in Madhya Pradesh and Chhattisgarh में धीमी प्रगति संकेत देती है कि राज्यों को अब:

  • स्थानीय स्तर पर स्टार्टअप इकोसिस्टम मजबूत करना होगा।
  • ड्रोन पायलट प्रशिक्षण केंद्र बढ़ाने होंगे।
  • कृषि और उद्योग में व्यावहारिक उपयोग के मॉडल विकसित करने होंगे।
  • सरकारी विभागों में अनिवार्य उपयोग नीति पर विचार करना होगा।

निष्कर्ष

ड्रोन केवल तकनीक नहीं, बल्कि विकास का औजार हैं।

Drone Registration in Madhya Pradesh and Chhattisgarh के आंकड़े बताते हैं कि नीतियां कागज पर मजबूत हैं, लेकिन असली परीक्षा जमीन पर है।

अब देखना यह है कि क्या मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ अपने घोषित विजन को वास्तविक औद्योगिक गति में बदल पाते हैं या नहीं।

ड्रोन की उड़ान शुरू हो चुकी है। सवाल सिर्फ इतना है—क्या ये राज्य भी इस उड़ान में साथ दे पाएंगे?

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