कोंडागांव: मक्का प्लांट में तोड़फोड़, फसल बर्बाद होने का आरोप

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में स्थित कोंडागांव जिले के कोकोड़ी गांव में गुरुवार रात एक मक्का प्रोसेसिंग प्लांट पर ग्रामीणों ने जमकर तोड़फोड़ की। इस Kondagaon maize plant vandalism की घटना में करीब 10 से 20 लाख रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट से निकलने वाला गंदा पानी उनके खेतों में पहुंच रहा है, जिससे फसलें बर्बाद हो रही हैं।

बार-बार शिकायत के बावजूद नहीं मिली सुनवाई

स्थानीय किसानों का कहना है कि वे कई महीनों से प्रशासन के पास शिकायतें दर्ज करा रहे थे। लेकिन, उनकी एक न सुनी गई। इसी गुस्से का नतीजा था कि गुरुवार की रात तकरीबन 700 से 800 ग्रामीण लाठी-डंडे और पत्थरों के साथ प्लांट परिसर में घुस गए। उन्होंने दफ्तरों में तोड़फोड़ की, गाड़ियों को क्षतिग्रस्त किया और मशीनरी को भी नुकसान पहुंचाया। इस हमले में कारें, ट्रैक्टर और यहां तक कि एक पुलिस वैन भी टूट गई।

शुक्रवार सुबह फिर बढ़ा तनाव

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। पड़ोसी जिले कानकेर से अतिरिक्त बल भी बुलाया गया। शुक्रवार को भारी पुलिस बल तैनात रहा, क्योंकि सुबह ग्रामीणों ने फिर से प्लांट में घुसने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। कुछ ग्रामीण दूर से गुलेल के जरिए पुलिसकर्मियों पर निशाना साध रहे थे, जिससे माहौल और गर्म हो गया।

महाराष्ट्र से आए ड्राइवर ने जंगल में छिपकर बचाई जान

इस हिंसक घटना के दौरान महाराष्ट्र से आया एक ड्राइवर भी प्लांट में मौजूद था। उसने बताया कि हमले के समय उसने पास के जंगल में छिपकर अपनी जान बचाई। उसकी आंखों देखी कहानी इस बात का सबूत है कि घटना कितनी भयावह थी।

प्लांट का संचालन रोका गया, जांच जारी

प्लांट प्रबंधन ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। हालांकि, अगले आदेश तक सभी कार्य स्थगित कर दिए गए हैं। उप संग्राहक कोंडागांव चार्ली ठाकुर ने बताया कि प्रशासन और पुलिस हर कोण से जांच कर रहे हैं। फिलहाल प्लांट को बंद कर दिया गया है और आगे की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। नुकसान का आकलन किया जा रहा है और प्रदूषण तथा कचरा निस्तारण से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल हो रही है। अधिकारियों ने ग्रामीणों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

क्यों भड़के ग्रामीण?

ग्रामीणों का मुख्य आरोप यह है कि मक्का प्रोसेसिंग प्लांट से निकलने वाला तरल कचरा सीधे उनके खेतों में पहुंच रहा है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता खराब हो रही है और फसलें बर्बाद हो रही हैं। किसानों का कहना है कि उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है। लेकिन, बार-बार शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होने से उनका धैर्य टूट गया।

अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले में त्वरित कार्रवाई करेगा? क्या प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे? ग्रामीणों की मांग है कि या तो प्लांट को पूरी तरह बंद किया जाए या फिर ऐसी व्यवस्था की जाए कि कचरा खेतों में न पहुंचे।

फिलहाल, कोकोड़ी में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। पुलिस लगातार निगरानी रख रही है ताकि हालात बिगड़ें नहीं। Kondagaon maize plant vandalism की यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि औद्योगिक इकाइयों पर निगरानी कितनी सख्त है और आम लोगों की शिकायतों पर कितनी गंभीरता से काम होता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *