धान की खेती के लिए प्रसिद्ध धमतरी जिले में अब बदलाव की नई बयार बह रही है। Crop Diversification in Dhamtari के तहत किसान परंपरागत धान के साथ दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों की खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
यह परिवर्तन केवल फसल का बदलाव नहीं है, बल्कि आय वृद्धि, पोषण सुरक्षा और जल संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम है।
रबी मौसम में 18,450 हेक्टेयर में दलहन खेती
वर्तमान रबी सीजन में Crop Diversification in Dhamtari का असर साफ दिखाई दे रहा है। जिले में दलहन फसलों की खेती लगभग 18,450 हेक्टेयर क्षेत्र में की जा रही है।
- चना: 14,200 हेक्टेयर
- अरहर: 2,150 हेक्टेयर
- मसूर: 2,100 हेक्टेयर
दलहन फसलें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद करती हैं। इससे किसानों को दोहरा लाभ मिल रहा है—उत्पादन भी बढ़ रहा है और जमीन की सेहत भी सुधर रही है।
तिलहन में सरसों बनी पहली पसंद
तिलहन फसलों में भी किसानों की रुचि बढ़ी है। जिले में लगभग 9,600 हेक्टेयर क्षेत्र में तिलहन फसलें ली जा रही हैं।
- सरसों: 8,300 हेक्टेयर
- अन्य तिलहन: 1,300 हेक्टेयर
सरसों की खेती कम लागत और बेहतर बाजार मूल्य के कारण किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है। यही कारण है कि Crop Diversification in Dhamtari के तहत तिलहन उत्पादन लगातार बढ़ रहा है।
रागी: छोटे किसानों के लिए नई उम्मीद
मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के लिए जिले में रागी (मंडुआ) की खेती को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
वर्तमान में लगभग 1,250 हेक्टेयर क्षेत्र में रागी की खेती की जा रही है, जिसमें करीब 1,180 किसान सक्रिय रूप से जुड़े हैं।
रागी कम पानी में तैयार होती है, लागत कम लगती है और पोषण से भरपूर होती है। इसलिए Crop Diversification in Dhamtari में रागी अहम भूमिका निभा रही है।
महिला किसानों की प्रेरक भागीदारी
मगरलोड विकासखंड के ग्राम पंडरीपानी (म), भटगांव और सिरकट्टा सहित कई गांवों में रागी की रोपाई का कार्य जारी है।
खास बात यह है कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं खेतों में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। वे केवल खेती में योगदान नहीं दे रहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई मिसाल भी पेश कर रही हैं।
इससे ग्रामीण महिलाओं को रोजगार मिला है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। Crop Diversification in Dhamtari का यह सामाजिक पक्ष जिले के लिए बेहद प्रेरणादायक है।
प्रशासन की प्राथमिकता बना फसलचक्र परिवर्तन
जिला प्रशासन और कृषि विभाग किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण बीज और विभिन्न योजनाओं का लाभ उपलब्ध करा रहे हैं।
फसलचक्र परिवर्तन से:
- भूमि की उर्वरता संरक्षित हो रही है
- जल संसाधनों का संतुलित उपयोग हो रहा है
- किसानों की आय में वृद्धि हो रही है
- पोषण सुरक्षा मजबूत हो रही है
विशेषज्ञों का मानना है कि रागी जैसी फसलें जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी सहायक होंगी।
धमतरी बन रहा वैकल्पिक फसलों का केंद्र
स्पष्ट है कि Crop Diversification in Dhamtari केवल एक कृषि योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का आंदोलन बन चुका है।
आने वाले वर्षों में धमतरी जिले को दलहन, तिलहन और मोटे अनाज उत्पादन का मजबूत केंद्र बनाने के लिए ठोस प्रयास जारी हैं।
धान की हरियाली के साथ अब रागी, चना और सरसों के रंग भी खेतों में नई उम्मीद जगा रहे हैं।
