रायपुर।
Bhupesh Baghel BJP joining claim: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के एक बयान ने देश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। देश के वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल को दिए गए एक साक्षात्कार में बघेल ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उन्हें भाजपा में शामिल होने के संकेत दिए थे।
यह बातचीत कपिल सिब्बल के चर्चित यूट्यूब शो “दिल से विद कपिल सिब्बल” में हुई, जहां सिब्बल ने सीधे सवाल किया कि क्या कभी भाजपा में शामिल होने का दबाव बनाया गया। इस पर भूपेश बघेल का जवाब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।
🧩 “मुलाकात के बाद छापे बढ़ गए” — बघेल का दावा
भूपेश बघेल ने बताया कि
“एक-दो बार गृहमंत्री अमित शाह ने बुलाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आमंत्रित किया। शुरू में समझ नहीं पाया कि क्यों बुलाया गया है, लेकिन बाद में इशारे साफ हो गए।”
उन्होंने कहा कि हर मुलाकात के बाद हालात और कठिन होते चले गए।
“जब मैं मिलकर आता था, तो उसके बाद और ज्यादा छापे पड़ते थे। फिर पूछा जाता था—आपके खिलाफ कौन-कौन से केस हैं, कौन-कौन से अधिकारी भरोसेमंद हैं।”
यह बयान सीधे तौर पर Bhupesh Baghel BJP joining claim को राजनीतिक बहस के केंद्र में ले आता है।
🗣️ “मैं विपक्ष में हूं, आलोचना मेरा धर्म है”
बघेल ने इंटरव्यू में यह भी कहा कि वे हर मुलाकात में साफ शब्दों में कहते थे कि वे विपक्ष में हैं और सरकार की आलोचना करना उनका कर्तव्य है।
“मैं कहता था कि आप सहयोग करना चाहते हैं, यह अच्छी बात है, लेकिन मैं विपक्ष में रहूंगा।”
इसके बावजूद, उनके अनुसार, कुछ ही दिनों बाद फिर से छापे और जांच शुरू हो जाती थीं।
📞 प्रधानमंत्री से फोन पर हुई बातचीत का जिक्र
पूर्व मुख्यमंत्री ने एक किस्सा साझा करते हुए कहा कि एक बार उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर पूछा—
“आपने मदद की बात कही थी, लेकिन फिर छापा क्यों पड़ा?”
जिस पर प्रधानमंत्री का जवाब था—
“मैं अधिकारियों से बात करता हूं।”
यह बयान सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे हैं कि क्या जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव के तौर पर किया गया।
🔍 राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि भूपेश बघेल भी अन्य नेताओं की तरह भाजपा में शामिल हो जाते, तो संभव है कि उनके और उनके पुत्र चैतन्य बघेल पर चल रहे मामलों में राहत मिल जाती।
हालांकि, ऐसा करने की कीमत छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को चुकानी पड़ती।
⚖️ बयान के बाद सियासी तापमान तेज
भूपेश बघेल के इस खुलासे के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है।
