Pariksha Pe Charcha में संवाद, स्नेह और स्वाद का अनोखा संगम
आज एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम Pariksha Pe Charcha के माध्यम से देशभर के छात्रों से संवाद किया। बोर्ड परीक्षाओं के तनावपूर्ण माहौल के बीच प्रधानमंत्री ने छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को ऐसे सरल लेकिन प्रभावी ‘मंत्र’ दिए, जो किसी मानसिक बूस्टर से कम नहीं हैं।
यह संवाद केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें भावनाएं, अपनापन और भारतीय संस्कृति की मिठास भी देखने को मिली।
तनाव नहीं, संतुलन पर दिया जोर
Pariksha Pe Charcha के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि—
“परीक्षा जीवन का एक पड़ाव है, मंज़िल नहीं।”
उन्होंने छात्रों को समझाया कि तनाव से नहीं, आत्मविश्वास और अनुशासन से सफलता मिलती है। साथ ही, शिक्षकों और माता-पिता से अपील की कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें, बल्कि उन्हें समझने और संबल देने की भूमिका निभाएं।
छत्तीसगढ़ी अंदाज़ में हुई बातचीत की शुरुआत
तमिलनाडु के कोयंबटूर दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी जब अगले सप्ताह रायपुर पहुंचे, तो चर्चा की शुरुआत ‘जय जोहार’ से हुई।
इस आत्मीय अभिवादन ने माहौल को तुरंत सहज और अपनापन से भर दिया।
एक छात्रा ने मुस्कुराते हुए प्रधानमंत्री से कहा—
“आप मीटिंग से आए हैं, थक गए होंगे।”
बस फिर क्या था, बच्चों ने अपने घर से लाए गए खास व्यंजन प्रधानमंत्री को परोसे।
Pariksha Pe Charcha में ठेठरी-खुरमी का स्वाद
इस चर्चा के दौरान बच्चों ने प्रधानमंत्री मोदी को छत्तीसगढ़ की पारंपरिक ठेठरी-खुरमी खिलाई।
एक बच्चे ने टिफिन से निकालकर ठेठरी उन्हें खिलाई, जिसे प्रधानमंत्री ने बड़े चाव से चखा।
प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल इसका स्वाद लिया, बल्कि मुस्कुराते हुए उसकी रेसिपी भी पूछ ली।
प्रधानमंत्री ने खुद सुनी रेसिपी
बच्चे ने मासूमियत से बताया कि—
- यह चना बेसन से बनती है
- गोल आकार में तलकर तैयार की जाती है
- स्वाद में नमकीन होती है
- और इसे खास तौर पर दिवाली के मौके पर बनाया जाता है
प्रधानमंत्री ने इस जवाब को ध्यान से सुना और बच्चों की सराहना भी की।
जब संवाद औपचारिक नहीं, पारिवारिक बन जाए
Pariksha Pe Charcha PM Modi कार्यक्रम का यह पल सिर्फ एक तस्वीर नहीं, बल्कि उस भरोसे और जुड़ाव का प्रतीक था, जिसमें
👉 प्रधानमंत्री एक अभिभावक की तरह छात्रों से बात करते नज़र आए।
यही वजह है कि यह कार्यक्रम हर साल छात्रों के बीच इतना लोकप्रिय बनता जा रहा है।
संदेश साफ है—परीक्षा भी, जीवन भी मुस्कान के साथ
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने अंदाज़ में यह संदेश दिया कि—
- पढ़ाई जरूरी है
- लेकिन स्वास्थ्य, संस्कृति और खुशी उससे भी ज्यादा अहम हैं
Pariksha Pe Charcha का यह संस्करण छात्रों के लिए न केवल प्रेरणादायक रहा, बल्कि यादगार भी बन गया।
