Sehore News: सिविल अस्पताल बनने के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था
Sehore hospital newborn money demand: सीहोर जिले के बुधनी में शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को हाल ही में सिविल अस्पताल का दर्जा दिया गया था।
आम जनता को उम्मीद थी कि इससे स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होंगी, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
👶 नवजात देने से पहले पैसों की मांग का आरोप
आरोप है कि सिविल अस्पताल बुधनी में डिलीवरी के बाद
प्रसूता के परिजनों से नवजात शिशु सौंपने से पहले 4,000 रुपये मांगे गए।
परिजनों ने जब अपनी आर्थिक मजबूरी बताई और रकम देने में असमर्थता जताई,
तो दाई ने कथित तौर पर बच्चा देने से इनकार कर दिया।
😢 मजबूरी में जुटाने पड़े 1500 रुपये
बताया जा रहा है कि पीड़ित परिवार बेहद गरीब है।
अपनी नवजात संतान को पाने के लिए
परिजनों ने जैसे-तैसे 1500 रुपये की व्यवस्था की,
तब जाकर उन्हें उनका बच्चा सौंपा गया।
परिवार का कहना है कि—
“सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज की उम्मीद लेकर आए थे,
लेकिन यहां तो बच्चे के बदले भी पैसे मांगे गए।”
📝 शिकायत के बाद जांच शुरू
इस गंभीर मामले की शिकायत सामने आने के बाद
स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है।
अधिकारियों का कहना है कि—
- पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी
- दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई होगी
हालांकि, अब तक किसी पर औपचारिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।
🏥 सवालों के घेरे में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था
यह मामला एक बार फिर
सरकारी अस्पतालों में भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता पर सवाल खड़े करता है।
जहां एक ओर सरकार
मातृत्व और नवजात शिशु सुरक्षा को लेकर
कई योजनाएं चला रही है,
वहीं ऐसे आरोप सिस्टम पर गहरा धब्बा लगाते हैं।
🔎 निष्कर्ष
Sehore hospital newborn money demand का यह मामला
केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं,
बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की
हकीकत को उजागर करता है।
अब देखना होगा कि
जांच के बाद प्रशासन
दोषियों पर क्या कार्रवाई करता है
और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए
कौन से कदम उठाए जाते हैं।
