Smart Electricity Meter India: बिजली व्यवस्था में डिजिटल बदलाव
Smart Electricity Meter India को लेकर केंद्र सरकार ने संसद में अहम जानकारी साझा की है। बिहार, असम और छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल हैं, जहां स्मार्ट बिजली मीटर लगाने में सबसे तेज़ प्रगति हुई है।
इन स्मार्ट मीटरों की मदद से उपभोक्ताओं को अब मोबाइल ऐप के जरिए रियल-टाइम बिजली खपत, रीचार्ज की सुविधा और पुराने उपयोग का ग्राफ देखने की सहूलियत मिल रही है।
5.3 करोड़ स्मार्ट मीटर हो चुके हैं स्थापित
राज्यसभा में सोमवार को केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री श्रीपद नाइक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार—
- दिसंबर 2025 तक देशभर में करीब 5.3 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं
- इनमें
- बिहार में 86% से अधिक उपभोक्ता कवर
- असम में 73%
- छत्तीसगढ़ में 54% उपभोक्ता शामिल हैं
यह आंकड़े बताते हैं कि Smart Electricity Meter India योजना किस तेजी से ज़मीनी स्तर पर आगे बढ़ रही है।
RDSS योजना के तहत मिली रफ्तार
केंद्र सरकार ने जुलाई 2021 में Revamped Distribution Sector Scheme (RDSS) की शुरुआत की थी। इस योजना का उद्देश्य—
- बिजली वितरण कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ाना
- वित्तीय स्थिति को मजबूत करना
- उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति देना
इस योजना के तहत स्मार्ट मीटरिंग को एक मुख्य पहल के रूप में लागू किया गया।
RDSS के तहत कहां तक पहुंची योजना?
मंत्री ने बताया कि Smart Electricity Meter India के तहत—
- 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की
- 45 वितरण कंपनियों को
- 19.8 करोड़ उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर लगाने की स्वीकृति दी गई है
इसके अलावा—
- 54.5 लाख से अधिक वितरण ट्रांसफॉर्मर और फीडर भी स्मार्ट सिस्टम से जोड़े गए हैं
- अकेले RDSS के तहत 3.9 करोड़ मीटर लगाए जा चुके हैं
राज्यों की अपनी योजनाओं को मिलाकर कुल संख्या 5.3 करोड़ तक पहुंच गई है।
किन राज्यों में काम धीमा?
हालांकि Smart Electricity Meter India में कई राज्य आगे हैं, लेकिन कुछ राज्य अभी पीछे चल रहे हैं। इनमें शामिल हैं—
- हिमाचल प्रदेश
- केरल
- तमिलनाडु
- पश्चिम बंगाल
- महाराष्ट्र
- राजस्थान
इन राज्यों में स्मार्ट मीटरिंग की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी बताई गई है।
प्रीपेड मीटर से बिजली कंपनियों को फायदा
प्रीपेड स्मार्ट मीटरों से न केवल उपभोक्ताओं को सुविधा मिल रही है, बल्कि—
- बिजली कंपनियों को अग्रिम राजस्व प्राप्त हो रहा है
- बकाया राशि में कमी आई है
- कैश फ्लो और कार्यक्षमता बेहतर हुई है
यही वजह है कि Smart Electricity Meter India को बिजली सुधार की रीढ़ माना जा रहा है।
AT&C लॉस में आई बड़ी गिरावट
स्मार्ट मीटरिंग और अन्य सुधारों का असर यह हुआ कि—
- FY 2021 में AT&C लॉस: 21.9%
- FY 2025 में AT&C लॉस घटकर: 15%
यह गिरावट बताती है कि स्मार्ट मीटर केवल तकनीक नहीं, बल्कि बिजली सुधार का मजबूत औज़ार बन चुके हैं।
उपभोक्ताओं के लिए क्या बदला?
अब उपभोक्ता—
- अपनी बिजली खपत पर खुद नजर रख सकते हैं
- अनावश्यक खर्च से बच सकते हैं
- बिजली उपयोग को बेहतर तरीके से ऑप्टिमाइज़ कर सकते हैं
यानी Smart Electricity Meter India आम लोगों के लिए भी फायदेमंद साबित हो रहा है।
