CSVTU Fee Scam: पीएचडी छात्रों की मेहनत की कमाई पर डाका
CSVTU Fee Scam ने छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा जगत में हलचल मचा दी है।
छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU) में पीएचडी शोधार्थियों की फीस गबन का गंभीर मामला सामने आया है। इस मामले में नेवई थाना पुलिस ने विश्वविद्यालय की पीएचडी शाखा में पदस्थ कनिष्ठ सलाहकार सुनील कुमार प्रसाद के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध दर्ज किया है।
फर्जी रसीद देकर वसूली गई लाखों की फीस
आरोप है कि विश्वविद्यालय के कुछ पूर्व अधिकारियों की मिलीभगत से पीएचडी शोधार्थियों से कुल 9 लाख 44 हजार 500 रुपये की फीस वसूली गई।
यह राशि छात्रों से फर्जी रसीदें जारी कर ली गई, लेकिन उसे विश्वविद्यालय के आधिकारिक खाते में जमा नहीं किया गया।
CSVTU Fee Scam का यह मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों दोनों में हड़कंप मच गया।
2022 से 2025 के बीच हुआ फर्जीवाड़ा
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि—
- यह अनियमितता वर्ष 2022 से 2025 के बीच की गई
- कई शोधार्थियों की फीस विश्वविद्यालय के खाते में दर्ज ही नहीं हुई
- छात्रों को फीस जमा करने के बदले नकली रसीदें दी गईं
जब शोधार्थियों से पूछताछ की गई और उन्होंने अपनी रसीदें दिखाई, तो खाते और रजिस्टर का मिलान करने पर पूरा फर्जीवाड़ा उजागर हो गया।
छात्रों की पीड़ा आई सामने
कई पीएचडी शोधार्थियों ने बताया कि—
“हमने मेहनत से अपनी फीस जमा की थी। रसीद मिलने के बाद हमें कभी शक नहीं हुआ कि पैसा विश्वविद्यालय तक पहुंचा ही नहीं।”
CSVTU Fee Scam ने छात्रों के भरोसे को गहरी ठेस पहुंचाई है, क्योंकि यह मामला उनके शैक्षणिक भविष्य से जुड़ा हुआ है।
कुलपति ने गठित की जांच समिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अरुण अरोड़ा ने जांच के लिए एक जांच समिति गठित की थी।
समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का निर्णय लिया गया।
पुलिस ने दर्ज की FIR
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मणिशंकर चंद्रा ने बताया कि—
“शिकायत के आधार पर कनिष्ठ सलाहकार सुनील कुमार प्रसाद के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है। जांच जारी है।”
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि—
- इस CSVTU Fee Scam में और कौन-कौन शामिल थे
- क्या पूर्व अधिकारियों की भूमिका सीधे तौर पर रही
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
CSVTU Fee Scam ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विश्वविद्यालयों में वित्तीय पारदर्शिता और निगरानी कितनी मजबूत है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों से छात्रों का भरोसा टूटता है और शिक्षा व्यवस्था की छवि को नुकसान पहुंचता है।
आगे क्या?
अब सभी की नजर—
- पुलिस जांच की दिशा
- अन्य आरोपियों की भूमिका
- और विश्वविद्यालय द्वारा उठाए जाने वाले सुधारात्मक कदमों
पर टिकी हुई है। यह मामला आने वाले समय में और बड़े खुलासे कर सकता है।
